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 |  4-मिनट में पढ़ें  |   08-10-2018
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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क्रिकेट में कुछ निश्चित नहीं है. बात जब विराट कोहली की हो तो वो बिल्कुल भी निश्चित नहीं हैं. एक ऐसे वक्त में जब हम बचपन से यही सुनते आ रहे हैं कि अगर बॉडी बनानी और फिट रहना है तो दूध-घी, अंडा-मुर्गी खाना ही होगा. विराट ने इस मिथक को तोड़ दिया है. खबर है कि किसी जमाने में बिरयानी में पड़ी बोटियों के शौकीन विराट ने अपनी फिटनेस और सेहत के मद्देनजर नॉन वेज खाना छोड़ दिया है और अब वो पूर्णतः शाकाहारी हो गए हैं. ध्यान रहे कि कप्तान कोहली को किसी भी तरह का एनिमल प्रोटीन लिए हुए 4 महीने हो गए हैं. बताया जा रहा है कि कोहली ने वीगन डायट शुरू की है जिसके कारण न सिर्फ उन्होंने मांस, मछली, अंडे से तौबा की है बल्कि वो हर उस चीज से दूर हैं जो एनिमल प्रोडक्ट्स है.

विराट कोहली, फिटनेस, शाकाहारी, भोजनविराट इसलिए फिट हैं क्योंकि उनके अंदर फिट रहने का जुनून है

वीगन डायट को फॉलो करने वाले विराट ने कहा है कि इस डायट के बाद उनका खेल बेहतर हुआ है. बात अगर कोहली की मौजूदा डायट की हो तो अब कोहली प्रोटीन शेक के अलावा खूब सारी वेजिटेबल और सोया खाते हैं. कोहली का मानना है कि इस डायट के बाद उनकी पाचन शक्ति बढ़ गई है. साथ ही उन्हें अब मीट, अंडा या डेयरी प्रोडक्ट जैसी चीजें बिल्कुल भी अच्छे नहीं लगती.

हो सकता है कि इस खबर के बाद व्यक्ति विराट की तारीफ करे और कहे कि उन्होंने जो भी किया, बहुत अच्छा किया. वहीं कोई व्यक्ति विराट के इस फैसले की आलोचना कर सकता है. चूंकि ये मुद्दा खाने पीने से जुड़ा है तो कुछ और कहने से पहले हम बस इतना कहेंगे कि व्यक्ति क्या खाए, क्या न खाए ये उसका निजी फैसला है और उसको अपनाने के लिए वो पूर्णतः स्वतंत्र है.

बहरहाल, विराट ये सब इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वो न सिर्फ फिट हैं. बल्कि उन्हें अपनी फिटनेस की पूरी चिंता है. उनका लक्ष्य क्लियर है. उन्हें अपना गोल पता है. हमारा आपका मामला दूसरा है. हमारी लाइफ स्टाइल इतनी ज्यादा अस्त व्यस्त है कि आज अनहेल्थी खानपान हमारे जीवन का अभिन्न अंग हो गया है. हमारा शुमार ऐसे लोगों में है जो नाश्ते में मैगी खाते हैं और चाय के साथ सिगरेट का कश लेते हुए सोचते हैं कि, 'भई वाह! आज तो पूरा नाश्ता कर लिया'. उसके बाद कहो तो पूरा दिन खाना ही न खाएं. या फिर अगर खा रहे हैं तो ऐसा खाएं कि हमारा पेट न हुआ स्टोर रूम हो गया कि सामान उठाया और उसे इधर-उधर, ऐसे-वैसे, जहां-तहां भर लिया.

बात साफ है चाय सिगरेट के संग मैगी या फिर जल्दबाजी में मेट्रो के धक्कों में सैंडविच खाने वाले लोग. बटर नान में अलग से 50 ग्राम बटर खाने वाले लोग. दाल मखनी में मक्खन न देखकर नाम-भौं सिकोड़ने वाले लोग, खाने के हर कौर के साथ कोल्ड ड्रिंक सिप करने वाले हम लोग क्रांति नहीं कर सकते. क्रांति के लिए डेडिकेशन चाहिए और हमारी लाइफ स्टाइल हमें इतना मौका ही नहीं देती कि किसी तरह का कोई डेडिकेशन हम अपने अन्दर रखें.

विराट अपनी फिटनेस के लिए नॉन वेज से वेज हुए हैं, ये वाकई बहुत अच्छी बात है. विराट ने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उनकी नजर मछली की आंख पर थी और वो फोकस थे. विराट हमारी तरह बिल्कुल नहीं है. कहना गलत नहीं है कि हमारा तो उनसे कहीं से भी कोई मुकाबला नहीं है. हममें से ऐसे लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है जो विराट या विराट जैसे लोगों को देखने के बाद अपनी तोंद पर हाथ रखकर उसके लिए कुछ करने की बात करते हैं.

हम वो लोग हैं जो फिटनेस के मद्देनजर हर साल न्यू ईयर पर न्यू न्यू रिजोल्यूशन बनाते हैं और उसमें जिम जाने को तरजीह देते हैं. मगर होता वही है जो हमेशा से होता चला आया है. न तो हम जिम ही जा पाते हैं और न ही हमारी तोंद ही कम हो पाती है.

विराट क्या से क्या हुए हैं, मुद्दा ये बिल्कुल नहीं है. बल्कि मुद्दा ये है कि आखिर हमारा नंबर कब आएगा ? आखिर हम कब फिट होंगे और हमारा भी लक्ष्य मछली की आंख होगी. बाक़ी कुछ छोड़ना हमारे बस का तो वैसे भी नहीं है. नाश्ते में मैगी के बाद चाय संग सिगरेट का कश लेते हुए तो हम यूं भी सोचते ही हैं कि आज कम्प्लीट फूड और बैलेंस डायट ली है. ऐसे ही रोज हेल्थी नाश्ता करेंगे और एक दिन फिट हो जाएंगे.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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