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Updated: 14 जनवरी, 2022 03:41 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 (UP Assembly Elections 2022) में खुद को स्थापित करने के लिए कांग्रेस (Congress) ने जितनी मेहनत की है, शायद ही किसी सियासी दल ने की होगी. यूपी चुनाव 2022 की तारीखों के ऐलान से पहले ही कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) ने 40 फीसदी महिलाओं को पार्टी टिकट देने का ऐलान कर सूबे का माहौल बदल दिया था. यहां तक की कांग्रेस के पूरा चुनावी कैंपेन ही महिला केंद्रित होते हुए 'लड़की हूं, लड़ सकती हूं' के नारे पर चल रहा था. प्रियंका गांधी के इस एक ऐलान ने यूपी की 403 विधानसभा सीटों पर बीते पांच साल से प्रत्याशी बनने का ख्वाब पाल रहे तमाम उम्मीदवारों को झटका दे दिया था. खैर, प्रियंका गांधी ने अपने वादे के हिसाब से कांग्रेस प्रत्याशियों की पहली लिस्ट में महिलाओं को दिल खोलकर पार्टी टिकट बांटा है. वैसे, यूपी चुनाव में केवल पार्टी का टिकट ही पर्याप्त नहीं होता है. इसके लिए राजनीतिक दल की अपनी वैल्यू भी होनी चाहिए. और, सुल्तानपुर की कांग्रेस नेत्री रीता यादव ने बता दिया है कि कांग्रेस के टिकट की कितनी वैल्यू है?

Rita Yadav shot herself for assembly ticketराजनीतिक महत्वाकांक्षा यानी पार्टी का टिकट (Assembly Ticket) ही 'सम्मान' कहलाता है.

राजनीति में ये एक आम सी बात है कि कोई भी नेता ग्राम पंचायत से शुरुआत कर बहुत आगे तक जाने की महत्वाकांक्षा रखता है. ये राजनीतिक महत्वाकांक्षा यानी पार्टी का टिकट (Assembly Ticket) ही 'सम्मान' कहलाता है. और, कांग्रेस नेत्री बनने से पहले रीता यादव को ये सम्मान समाजवादी पार्टी में नहीं मिला था. इसे विडंबना ही कहा जा सकता है कि समाजवादी पार्टी में रहते हुए रीता जी 'यादव' वाली सबसे बड़ी अर्हता को पूरा करती थी. बावजूद इसके उनको समाजवादी पार्टी ने सम्मान नहीं दिया. तो, अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए रीता यादव जी ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली. 40 फीसदी महिलाओं को टिकट मिलने का ऐलान हो ही रखा था. तो, रीता जी ने प्रियंका गांधी की नजरों में आने का सरल और सर्वोत्तम तरीका खोज निकाला. उन्होंने सुल्तानपुर में पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को काले झंडे दिखाए और कांग्रेस आलाकमान की नजरों में आ गईं.

तो, पीएम नरेंद्र मोदी को काले झंडे दिखाने के बाद हुआ वही जैसा पहले ही ब्रह्मा जी ने रीता यादव की कुंडली में लिख रखा था. हालांकि, ब्रह्मा जी का यहां उतना बड़ा रोल नहीं रहा. क्योंकि, पीएम मोदी को काले झंडे दिखाने वाला कोई भी शख्स कांग्रेस के लिए कितनी अहमियत रखता है, यहां ये बताने की आवश्यकता नहीं पड़ेंगी. तो, प्रियंका गांधी ने उन्हें हाथोंहाथ लेते हुए कांग्रेस में शामिल कर लिया था. और, बाकायदा अपने साथ कंधे से कंधा जोड़े फोटू भी खिंचाई थी. कुंडली में लिखे के अनुसार, अब बारी थी कांग्रेस की ओर से सम्मान यानी पार्टी का टिकट मिलने की. लेकिन, किसी भी पार्टी का टिकट मिलना इतना आसान थोड़े ही होता है. वैसे भी प्रियंका गांधी ने ये कहा था कि 40 फीसदी महिलाओं को टिकट दी जाएगी. उन्होंने ये थोड़े बताया था कि किन विधानसभा सीटों से महिला प्रत्याशियों को टिकट मिलेगी? अगर प्रियंका गांधी ने ऐसा पहले ही बोल दिया होता, तो गौतमबुद्ध नगर से कांग्रेस की पहले से ही तय प्रत्याशी मानी जा रहीं पंखुड़ी पाठक के अलावा और जो दर्जन भर कांग्रेस नेताओं ने पूरे विधानसभा में पार्टी के लिए पोस्टर, बैनर और होर्डिंग्स लगवाकर जो माहौल बना रहे थे, वो कैसे बन पाता.

वैसे, यूपी चुनाव 2022 (UP Election 2022) की तारीखों का ऐलान तो हाल में ही हुआ है. लेकिन, यूपी विधानसभा चुनाव 2022 लड़ने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों से पूछिए कि वो कितने समय से मेहनत कर रहे हैं? उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में जहां पंचायत चुनाव में दर्जनों लोग सियासी दलों से अधिकृत प्रत्याशी बनने के लिए सारे 'जैक' लगा देते हैं. वहां विधानसभा चुनाव में डॉक्टर से लेकर इंजीनियर, समाजसेवी से लेकर पर्यावरणप्रेमी, आम आदमी से लेकर खास आदमी तक पार्टी का टिकट पाने के लिए अपने विधानसभा क्षेत्रों को पोस्टर, बैनर, होर्डिंग्स से पाट देता है. ऐसे समय में सियासी दलों के बड़े नेताओं के पीछे उचक कर फोटो खिंचाने वाले लोग भी 'मंत्री जी के साथ गहन चर्चा और मंत्रणा' के साथ सोशल मीडिया पर भौकाल गांठते हुए पार्टी टिकट पाने के लिए माहौल बनाने का कोई मौका नहीं छोड़ते हैं. एक ही पार्टी से टिकट पाने के लिए दर्जनों लोग अपनी उम्मीदवारी जताते हैं. तब कहीं जाकर कोई एक उम्मीदवार पार्टी का प्रत्याशी बनता है. 

लेकिन, प्रियंका गांधी के 40 फीसदी महिलाओं को कांग्रेस का टिकट देने के फैसले से रीता यादव को अपना सम्मान होता नजर आने लगा था. लेकिन, मुश्किल थी, तो केवल एक. साथ में उम्मीदवारी का दावा ठोंक रहे दर्जनों नेता. कांग्रेस को लेकर रीता यादव ने करीबियों से मंत्रणा की, तो पता चला कि राजनैतिक कद बढ़ाने के लिए केवल पीएम मोदी को काले झंडे दिखाने और प्रियंका गांधी के साथ फोटू खिंचाने से काम नहीं चलेगा. जिसके बाद तय हुआ कि पार्टी के टिकट का काम तभी बनेगा, जब 'गोली' चलेगी. और, रीता यादव जब पीएम नरेंद्र मोदी को काले झंडे दिखाने का जुगाड़ लगा सकती हैं, तो उन्होंने कांग्रेस पार्टी के टिकट के लिए भी जुगाड़ सेट कर लिया. रीता यादव ने अपने राजनीतिक गुरू और जानने वाले पूर्व ग्राम प्रधान माधव यादव से बातचीत कर साजिश के तहत खुद पर गोली चलवा ली. इस घटना के बाद कांग्रेस ने बाकायदा ट्वीट कर भाजपा पर निशाना साधा था. इस ट्वीट को देखकर रीता यादव भी काफी हद तक आश्वस्त हो गई थीं कि यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में उनका कांग्रेस से टिकट पक्का है. 

लेकिन, मुंह से ठांय-ठांय करते हुए अपराधियों को खदेड़ देने वाली उत्तर प्रदेश पुलिस ने सारा बेड़ा गर्क कर दिया. गोली लगने की घटना के बाद पुलिस की जांच में मामला संदिग्ध लगा था. जिसके बाद पुलिस ने रीता यादव के साथ गाड़ी में बैठे धर्मेंद्र यादव और ड्राइवर मोहम्मद मुस्तकीम को अपने हिसाब से टाइट किया, तो पूरे मामले की हवा निकल गई. जिसके बाद पुलिस ने खुलासा किया कि रीता यादव ने खुद ही अपने ड्राइवर मुस्तकीम, धर्मेंद्र यादव और माधव यादव समेत अन्य लोगों के साथ खुद के ऊपर गोली चलवाई थी. तो, इस खुलासे के बाद हुआ वही जो तुलसीदास ने कहा था कि 'हुइहै वही जो राम रचि राखा.' पुलिस ने साजिश रचने के मामले में रीता यादव समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. पकड़े गए आरोपियों के पास से हथियार भी बरामद हुआ है. लेकिन, रीता यादव की इस पूरी मेहनत से कांग्रेस के टिकट की वैल्यू जरूर पता चल गई है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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