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इकोनॉमी

 |  4-मिनट में पढ़ें  |   14-04-2018
मनीष जैसल
मनीष जैसल
  @jaisal123
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परिवर्तन प्रकृति का अनिवार्य नियम है. लेकिन परिवर्तन का सिलसिला इतना बदलेगा यह हमने नहीं सोचा था. वाकई हम कहां से कहां आ गए हैं. मेलों, समारोहों और साप्ताहिक बाज़ारों में ही जहां जीवन की एक प्रक्रिया पूरी हुआ करती थी, लोग एक दूसरे से मिलते, घर का जरूरी समान खरीदते थे उसका अब एक नया रूप सामने है. विज्ञान ने उस दौर को पूरी तरह से खत्म कर दिया है, वाकई नवीनता ला दी है, जीवन में भी और समाज में भी.

इंटरनेट के प्रयोग का भरपूर नशा मुझमे है, इसीलिए गाहे बगाहे अनचाही चीजों से भी रूबरू हो ही जाता हूं. ऑनलाइन शॉपिंग करते हुए जब इस सर्वपूजा अंतिम क्रिया किट को देखा तो एक बार चौंका. मुझे तो अभी यह भी ठीक से नहीं मालूम कि अंतिम क्रिया कर्म में क्या क्या इस्तेमाल होता है. इस किट से मुझे अब यह जान पड़ा कि अंतिम क्रिया कर्म में क्या क्या चल रहा है. प्रॉडक्ट स्पेसिफिकेशन बता रहें हैं और कंपनी यह दावा भी कर रही हैं कि हम गुणवत्ता, गरिमा और नवीनता का पूरा ख्याल रखते हैं. सुखद है आज सेल्फ शॉपिंग के जमाने हम कुछ तो दूसरों के लिए ऑनलाइन बुक कर सकते हैं.

अंतिम संस्कार, मृत्यु, ऑनलाइन शॉपिंग बाजारवाद के इस दौर में अब जीवन से लेकर मृत्यु तक सभी चीजें ऑनलाइन हो गई हैं

बहरहाल इन दिनों अमेज़न पर अंतिम क्रिया कर्म का पूरा किट मात्र 2999 में  मिल रहा है. अमेज़न ने जानकारी में बताया भी है कि यह 4 मार्च को पहली बार लॉन्च हुआ है. इस किट में वह सारी चीजें मौजूद हैं जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद समान्यतया उपयोग में लाई जाती हैं. स्मार्ट सिटी की ओर बढ़ते जन जीवन में यह तो संभव है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ी चीजें वहां मिलना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे में अमेज़न और निर्माता कंपनी के इनोवेशन सार्थक सिद्ध हो सकते हैं. दूसरी तरफ यह भी है कि बाज़ार  का निजी जीवन में दखल इतना बेहिसाब बढ़ता जा रहा हैं कि पैदा होने से लेकर मृत्यु तक में बाज़ार शामिल हो गया है. वह भी नए जमाने वाले ई बाज़ार के साथ. फिलहाल प्रॉडक्ट को खरीदने वाले इसका रिव्यू भी रोचक ढंग से लिख रहें हैं.

अंतिम संस्कार, मृत्यु, ऑनलाइन शॉपिंग ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट अमेज़न पर लोग इस प्रोडक्ट को हाथों हाथ ले रहे हैं

खुद सोचिए अगर आस पास किसी की मृत्यु हो जाए और हम तुरंत इस सर्वपूजा किट को बुक करने लगें तो कैसा माहौल हो जाएगा? वहीं कई बार हम अपनी जरूरत के हिसाब से चीजों को ऑनलाइन पहले से ही मंगा लेते हैं, वैसा ही अगर किसी की मृत्यु से पहले कर लें तब क्या होगा? मामला संवेदना और व्यक्तित्व का है. जीवन का अंतिम सत्य यहीं है कि जो आया है वो जाएगा जरूर. बावजूद इसके अमेज़न के इस खास प्रॉडक्ट पर हम सबकी एक अलग प्रतिक्रिया हो सकती हैं. कोई इसमें खामियां तो कोई अच्छाई खोज ही लेगा.

मेरी नज़र में यह भयंकर बाज़ारवाद का फल है, जो हमारे ही कारण दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है. इसकी जरूरत इसलिए भी है कि जैसे जैसे समाज आधुनिक होता जा रहा है धार्मिक मान्यताओं/ क्रियाकलापों में इस्तेमाल होने वाली चीजें भी मिलना बंद होती जा रहीं हैं. जब तेजी से गांव खत्म हो रहें हैं तो बांस कहां से आएगा? कैसे बनेगी वो टांट की चटाई जो आज भी मान्यताओं का हिस्सा है. अमेज़न के इस प्रॉडक्ट पर कंपनी से इन मान्यताओं पर रिसर्च कर इसे ग्राहकों तक पहुंचाया है. आने वाले दिनों में इसके असर को भी देखा जा सकेगा.

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लेखक

मनीष जैसल मनीष जैसल @jaisal123

लेखक सिनेमा और फिल्म मेकिंग में पीएचडी कर रहे हैं, और समसामयिक मुद्दों के अलावा सिनेमा पर लिखते हैं.

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