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Updated: 31 जनवरी, 2018 06:04 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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यूनियन बजट आने को अब बहुत कम समय रह गया है और एक बार फिर क्या सस्ता होगा और क्या महंगा होगा इस बारे में बहस होने लगी है. लेकिन क्या इस बहस की जरूरत है? हर मिडिल क्लास भारतीय के लिए बजट में क्या सस्ता हुआ और क्या महंगा ये बहुत बड़ी बहस और चिंता का विषय होता है, लेकिन इस साल से सस्ता और महंगे के लिस्ट लोगों को मिलेगी नहीं..

कारण?

कारण ये है कि इस बार कस्टम ड्यूटी और एक्साइज ड्यूटी है ही नहीं जो बदली जाएगी. पेट्रोल और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को छोड़कर बाकी सब कुछ जीएसटी के अंतरगत आ गया है. तो कीमतों में कोई भी बदलाव होगा वो खास तौर पर जीएसटी काउंसिल की बैठक में होगा. बाकी कुछ भी बजट में सस्ता और महंगा होने की उम्मीद नहीं दिखती. यही कारण है कि जीएसटी के बाद बजट में बदलाव होगा.

अरुण जेटली, यूनियन बजट, नरेंद्र मोदी, रेलवे बजट

पर फिर भी कयासों की मानें तो कुछ चीजों पर असर पड़ सकता है. इकोनॉमिक पंडितों के अनुसार स्मार्टफोन्स पर असर पड़ सकता है.

स्मार्टफोन्स...

हर कोई ये उम्मीद जता रहा है कि स्मार्टफोन्स को लेकर कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. ऐसी उम्मीग लगाई जा रही है कि स्मार्टफोन्स सस्ते हो जाएंगे. COMIO स्मार्टफोन्स के सीईओ और डायरेक्टर संजय कलिरोना के अनुसार जीएसटी को कम कर देना चाहिए जो भारत में मोबाइल इंडस्ट्री को बढ़ावा देगा.

भारत सबसे तेजी से बढ़ने वाला मोबाइल मार्केट है और यहां गैजेट्स के दाम कम होना बहुत ज्यादा फायदा पहुंचाएगा. इसलिए स्मार्टफोन्स के दाम कम होने चाहिए.

इसलिए कम या बढ़ सकते हैं दाम...

हमारे देश में भले ही बाकी आइटम पर जीएसटी लगा हो, लेकिन इम्पोर्ट में अभी भी IGST (इंटरनेशनल जीएसटी) के साथ कस्टम ड्यूटी लगाई जाती है. ऐसा माना जा रहा है कि इस बार बजट खास तौर पर मेक इन इंडिया पर ध्यान दिया जाएगा और इसलिए कस्टम ड्यूटी में बदलाव किए जा सकते हैं. जो भी इम्पोर्टेड स्मार्टफोन्स हैं वो महंगे हो सकते हैं और जो मेक इन इंडिया वाले हैं वो सस्ते हो सकते हैं.

सेहत के मामले में सुधार...

जी यहां लोगों की सेहत नहीं बल्की हेल्थ सेक्टर की बात हो रही है. सीनियर सिटिजन के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हो सकती हैं. भारत की हेल्थकेयर फेडरेशन 'NATHEALTH' के मुताबिक सरकार को हेल्थ इंश्योरेंस भारत के सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य कर देनी चाहिए जैसे विदेशों में होता है. भारत को भी हेल्थकेयर को सबसे ऊपर रखना चाहिए.

नैटहेल्थ ने कई सारे सुझाव दिए हैं और अगर ये मान लिए जाते हैं तो 75 साल तक हेल्थ इंश्योरेंस अनिवार्य करी जा सकती है जो अभी 65 साल तक के लिए ही है. साथ ही साथ स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती हो जाएंगी. गौरतलब है कि लाइफ सेविंग ड्रग्स पिछले बजट में भी सस्ते किए गए थे और यही ट्रेंड इस बार भी देखने को मिल सकता है. 

बाकी अगर किसी बड़ी घोषणा की बात की जाए तो टैक्स एक्जेम्पशन लिमिट कम हो सकती है और अगर ऐसा हो गया तो नौकरीपेशा लोगों के लिए ये राहत की बात होगी.

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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