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Updated: 26 सितम्बर, 2018 06:37 PM
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भारत में इलेक्ट्रिक कारों की मांग बहुत ज्यादा नहीं है. इलेक्ट्रिक गाड़ियों को लेकर न तो लोगों में उत्साह दिखता है और न ही सरकार इनपर कोई खास पॉलिसी निकाल रही थी, लेकिन अब जो फैसला भारत सरकार ने लिया है उससे लगता है कि यकीनन इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री बढ़ सकती है. भारत सरकार ने पहले से ही ये प्लान बना रखा था कि 2030 तक कम से कम 40% गाड़ियां इलेक्ट्रिक हो जाएं, लेकिन इसके लिए अभी तक कोई खास पॉलिसी सरकार ने नहीं निकाली थी. अब आ गई है.

इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री बढ़ाने के लिए सरकार ने ये फैसला किया है कि हर इलेक्ट्रिक गाड़ी की बिक्री पर 1.4 लाख की डायरेक्ट सब्सिडी दी जाएगी. ये फैसला 23 अगस्त को हुई एक मीटिंग में लिया गया और इसके लिए भारत सरकार वित्त मंत्रालय ने 4500 करोड़ का फंड भी दे दिया है. ये सब्सिडी FAME स्कीम (फास्टर अडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक (एंड हाइब्रिड) वेहिकल्स) के तहत मिलेगी. ये FAME स्कीम का फेज 2 है.

क्या होगा इस स्कीम में?

रिपोर्ट कहती है कि हर खरीददार जो भी इलेक्ट्रिक गाड़ी खरीदेगा उसे सरकार 1.4 लाख की डायरेक्ट सब्सिडी दे सकती है. हालांकि, ये जरूरी नहीं है कि सब्सिडी 1.4 लाख की ही हो दरअसल, गाड़ी के मूल्य और बैटरी पावर, और तकनीक के आधार पर सब्सिडी तय होगी और ये गाड़ी के मूल्य के 20% से ज्यादा नहीं हो सकती.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई बड़ी गाड़ी लेता है जैसे 20 लाख की गाड़ी लेता है तो उसपर अन्य लाभ मिल सकते हैं यानी 1.4 लाख की सब्सिडी और आगे के कुछ लाभ उसे 4 लाख रुपए तक की कीमत का बना सकते हैं. इसमें वो मॉडल भी शामिल हो सकते हैं जो भारत में अभी लॉन्च नहीं हुए.

इलेक्ट्रिक कार, इलेक्ट्रिक स्कूटर, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, भारत सरकार, ऑटोमोबाइलभारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का मार्केट सिर्फ 1% का है

हाई पावर कमेटी ने 4500 करोड़ सब्सिडी के लिए और 1000 करोड़ चार्जिंग स्टेशन बनाने के लिए प्रस्तावित कर दिए हैं यानी इलेक्ट्रिक कार की स्कीम पर सरकार कुल 5500 करोड़ रुपए खर्च करेगी.

खास बात ये है कि इस स्कीम में टू-व्हीलर और थ्री-व्हीलर वाहन भी आ जाएंगे. ऐसा सरकार इसलिए कर रही है ताकि इलेक्ट्रिक कारों को लेकर लिया गया संकल्प पूरा हो सके और भारत में सुरक्षित ईंधन वाली गाड़ियां ज्यादा आ सकें.

क्या हाल है भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का?

एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में सिर्फ 1 प्रतिशत मार्केट हिस्सा ही इलेक्ट्रिक गाड़ियों का है. इस हिस्से को बढ़ाकर 2030 तक सरकार 40% करना चाहती है. इसके अलावा, अगर इलेक्ट्रिक गाड़ियों के हिस्से को देखें तो उस 1% का भी 95% हिस्सा कम गति वाले टू-व्हीलर का है.

2016-17 का डेटा बताता है कि भारत में तीस लाख पेट्रोल कारों की तुलना में सिर्फ 2000 इलेक्ट्रिक कारें ही हैं. अगर इसी आंकड़े को टू-व्हीलर में देखा जाए तो 1 करोड़ 60 लाख पेट्रोल टू-व्हीलर की तुलना में सिर्फ 23000 ई-स्कूटर ही होंगे.

सरकार ने जो स्कीम निकाली है वो बेहद बेहतरीन है, लेकिन अगर आपसे ये पूछा जाए कि आपकी नजर में बेहतर इलेक्ट्रिक कार कौन सी है तो आप क्या कहेंगे? यकीनन आम लोगों को इलेक्ट्रिक कारों के विकल्पों के बारे में ही नहीं पता है क्योंकि देश में इलेक्ट्रिक कारों और टू-व्हीलर के विकल्प हैं ही नहीं.

मौजूदा समय में अगर आपको अभी तुरंत कोई इलेक्ट्रिक कार खरीदनी हो तो आप सिर्फ महिंद्रा की E2O Plus और e-Verito खरीद सकते हैं. टाटा ने भी इलेक्ट्रिक कारें लॉन्च की हैं, लेकिन अभी तक वह बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं हैं. महिंद्रा ई-वेरिटो के तीन और महिंद्रा ई2oप्लस के दो वेरिएंट ही उपलब्ध हैं. इसके अलावा, Toyota Camry hybrid और Honda Accord Hybrid मिड हाई- रेंज गाड़ियां भी हैं.

अगर हम हाई एंड कारों की बात करें तो BMW i8 है जिसकी कीमत ₹ 3.06 कोरड़ से भी ज्यादा हो सकती है. ये कार एक बार चार्ज करने पर 47.5 किलोमीटर चलती है.

मनमोहन सरकार से लेकर मोदी सरकार तक दोनों ही सरकारों ने इलेक्ट्रिक वेहिकल पॉलिसी पर जोर दिया है और अब ये सब्सिडी वाली बात यकीनन मार्केट को कुछ तो आगे ले जाएगी. एक दशक पहले जहां सस्ती इलेक्ट्रिक बाइक्स ने मार्केट में उथल-पुथल मचा दी थी वहां मनमोहन सरकार की सब्सिडी इन गाड़ियों के लिए काफी काम आती थी. तब ये कहा जाता था कि 10 पैसे में एक किलोमीटर चलने वाली ये बाइक भविष्य की बाइक है, लेकिन सब्सिडी खत्म होते ही इनका जादू भी खत्म हो गया.

ऑटोमोबाइल मार्केट में भी हमेशा से ही इलेक्ट्रिक कारों को लेकर थोड़ा न थोड़ा विरोध होता रहा है. इलेक्ट्रिक गाड़ियां बनाने के लिए भारतीय कंपनियां अभी उतनी तैयार नहीं हैं और अगर मार्केट में सस्ती इलेक्ट्रिक गाड़ियां आ जाती हैं तो यकीनन गाड़ियां बनाने वाली कंपनियों को थोड़ा नुकसान तो होगा.

बहरहाल, लग रहा है जैसे सरकार इस पॉलिसी को लेकर काफी सीरियस है और सब्सिडी देने के बात यकीनन बेहतर है. पर सरकार को इसके लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर भी बनाना होगा. सितंबर 2017 में नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार कार बनाने वाली कंपनियों को इलेक्ट्रिक कारों की तरफ मुड़ने को कह रही है, अगर उन्होंने ऐसा नहीं किया तो जबरदस्ती सरकारी पॉलिसी उन्हें इलेक्ट्रिक कार बनाने पर मजबूर करेगी.

जनवरी 2018 में नितिन गडकरी ने ही कहा कि इलेक्ट्रिक वेहिकल पॉलिसी नीति आयोग द्वारा बना ली गई है और इसके लिए बस कैबिनेट का अप्रूवल चाहिए. फरवरी 2018 में गडकरी ने ही कहा कि इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए किसी पॉलिसी की जरूरत नहीं है. मार्च 2018 में सरकार ने कहा कि नीति आयोग को इसके लिए एक एक्शन प्लान तैयार करना चाहिए. इसके लिए नीति आयोग की तरह से 7 मंत्रालयों का सपोर्ट लिया है और रूपरेखा तैयार करने को कहा है. और इसी दौर की एक रिपोर्ट आई थी जो कहती थी कि सरकार ऐसा प्लान तैयार कर रही है जिससे हर 3 किलोमीटर में एक चार्जिंग स्टेशन होगा. पर इस सपने को साकार करने के लिए सरकार को बहुत पापड़ बेलने जरूरी हैं और सरकार को चाहिए कि वो

सब्सिडी के बाद क्या हो जाएगी भारतीय इलेक्ट्रिक कारों की कीमत?

किस गाड़ी को कितनी सब्सिडी मिलेगी ये उसकी कीमत और तकनीक पर निर्भर करेगा. वैसे तो 20% सब्सिडी की बात की गई है.

भारत में इस समय ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें मौजूद नहीं हैं. कुछ गिनी चुनी कारें हैं जैसे-

1. Mahindra e-Verito -

मौजूदा कीमत- 10.39 लाख रुपए से शुरूकितनी मिल सकती है सब्सिडी- इस मूल्य पर अधिकतम 2.1 लाख की सब्सिडी मिल सकती है. यानी कीमत 8.28 लाख तक हो सकती है. इसकी बैटरी को चार्ज होने में 11 घंटे 30 मिनट का समय लगता है, लेकिन आप इसे क्विक चार्ज भी कर सकते हैं, जिसमें सिर्फ 1 घंटा 30 मिनट का समय लगता है.

2. Mahindra E2O Plus

मौजूदा कीमत- 6.07 लाख रुपए से शुरूकितनी मिल सकती है सब्सिडी- इस मूल्य पर अधिकतम 1.2 लाख की सब्सिडी मिल सकती है. यानी कीमत 4.87 लाख तक हो सकती है. इस कार का टू-सीटर वर्जन पहले लॉन्च हुआ था और 4 सीटर वर्जन भी अब आ गया है. 4 सीटर वर्जन की शुरुआती कीमत 8.51 लाख रुपए है. ये कार फुल चार्ज पर 99.9Km चल सकती है.

वैसे तो Toyota Camry, Honda Accord, Toyota Prius, BMW i8 जैसी गाड़ियां भी मार्केट में मौजूद हैं, लेकिन ये सब हाईब्रिड गाड़ियां हैं जिनमें पेट्रोल/डीजल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह का इंजन सपोर्ट है. ये गाड़ियां 35 लाख की कीमत से शुरू होती हैं और इनपर 20% वाला रूल नहीं लगाया जा सकता. FAME II से हाईब्रिड गाड़ियों और ट्रकों को बाहर रखने की बात की गई है.

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(नोट: ये सिर्फ अनुमानित कीमतें हैं.)

मार्केट में लॉन्च होने वाली है तीन कारें-

Mahindra KUV 100

अभी यह कार ग्राहकों के लिए बाजार में उपलब्ध नहीं है. ऑटो एक्सपो 2018 में इस कार का प्रदर्शन किया गया था, जो जल्द ही बाजार में आ सकती है. बताया जा रहा है कि इसकी कीमत करीब 11-12 लाख रुपए तक हो सकती है. एक बार फुल चार्ज करने पर यह कार करीब 140 किलोमीटर तक चल सकेगी और करीब 1 घंटे 30 मिनट में फास्ट चार्जिंग से फुल चार्ज भी हो जाएगी. बताया जा रहा है कि यह कार 0-100 की स्पीड सिर्फ 9 सेकेंड में पकड़ सकती है और 186 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ सकती है.

Tata Tiago electric

महिंद्रा के अलावा टाटा ने भी इलेक्ट्रिक कारों की दुनिया में कदम रख दिया है. ऑटो एक्सपो 2018 में टाटा ने अपनी कार टाटा टियागो एलेक्ट्रिक (हैचबैक) का प्रदर्शन किया. यह कार 2019 तक बाजार में आ सकती है, जिसकी कीमत लगभग 8-10 लाख रुपए तक हो सकती है. इसमें 216 AH की बैटरी लगी है, जिसे एक बार फुल चार्ज करके कार करीब 130 किलोमीटर तक चल सकती है. इसे फुल चार्ज होने में करीब 6 घंटे का समय लगता है, लेकिन फास्ट चार्जिंग के जरिए यह 1 घंटे 30 मिनट में फुल चार्ज हो सकती है.

Tata Tigor EV

अगर आप टाटा की सेडान कार लेना चाहते हैं तो आपके पास टाटा टिगोर का विकल्प होगा, जिसे टाटा ने ऑटो एक्सपो 2018 में दिखाया था. इसमें 216 AH की बैटरी लगी होगी, जिसके फुल चार्ज होने पर आप 130 किलोमीटर तक का सफर तय कर सकते हैं. इसकी टॉप स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी. यूं तो इसकी बैटरी को फुल चार्ज होने में 6 घंटे लगते हैं, लेकिन क्विक चार्जिंग के जरिए आप महज 1 घंटे 30 मिनट में ही इसकी बैटरी फुल चार्ज कर सकेंगे.

तो कुल मिलाकर आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों को खरीदने वाले लोग फायदे में रहेंगे. हालांकि, सरकार का सपना तब तक पूरा नहीं हो सलता जब तक कार बनाने वाले ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें नहीं बना लेते.

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