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Updated: 01 अप्रिल, 2017 04:48 PM
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लंबी बहस के बाद आजादी के बाद का 'सबसे बड़ा आर्थिक सुधार' कहा जाने वाले जीएसटी बिल को लोकसभा ने पारित कर दिया. इसके साथ ही देश के सबसे बड़े टैक्स रिफॉर्म्स को लागू करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा माइलस्टोन पार कर लिया.

लोकसभा में सेंट्रल जीएसटी बिल को पास तो हो गया है. मगर इससे कुछ नुकसान भी होने हैं. कमर्शियल, रेजिडेंशियल जमीन या घर को लीज पर देने, किराए पर देने को सप्लाई ऑफ सर्विस माना जाएगा. इस पर 1 जुलाई से जीएसटी देना होगा. अगर 1 जुलाई से जीएसटी लागू होता है तो इसके बाद लीज पर दी गई जमीन, रेंट और निर्माणाधीन घरों पर दी जा रही ईएमआई के भुगतान पर जीएसटी चुकाना होगा. जमीन और मकान की बिक्री, जीएसटी के दायरे में नहीं आऐगी. इन पर सिर्फ स्टांप ड्यूटी ही लगेगी.

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निर्माणाधीन घरों की बिक्री पर सर्विस टैक्स लगता है. छूट का नियम भी लागू होता है. जीएसटी काउंसिल 31 मार्च को नियमों पर चर्चा करेगी. तब फैसला हो सकता है कि निर्माणाधीन बिल्डिंग पर कम टैक्स लगाया जाए या छूट का नियम जारी रहे. किस वस्तु या सेवा पर कितना टैक्स लगे, यह अप्रैल में तय होगा. उसके बाद ही स्थिति साफ होगी.' - एमएसमनी, सीनियर डायरेक्टर, कंसल्टेंसी फर्म डेलॉय हैस्किंस

अभी तक अगर आप कोई घर खरीदते है, किराये के घर में रहते हैं और घर की ईएमआई पर भी सरकार की तरफ से इनकम टैक्स में छूट मिलती है. लेकिन वहीं दूसरी तरफ सरकार इन सब को जीएसटी के दायरे में ला रही है जिस पर आप को जुलाई से टैक्स देना पड़ेगा.

मसलन अगर आप किसी कंपनी में जॉब करते हैं आप को एचआरे मिलता है उसमें से आप एक लाख तक के किराया के कागजात लगाकर छूट ले लेते हैं. इसके लिए मकान मलिक के पैन कार्ड की आवश्यकता नहीं पड़ती है. अगर आप का मकान किराया एक लाख से ऊपर है तो मकान मलिक के डॉक्युमेंट्स लगाने होते हैं. तभी जाकर एक लाख से ऊपर के किराये को कुल इनकम से घटाया जाता है. जीएसटी लागू होने के इसकी दर ज्यादा होगी तो सभी को परेशानी होने वाली है. अभी पूरी तरह से साफ नहीं हैं जीएसटी लगने के बाद इसकी दर क्या होगी और किराया देने वालों को कोई छूट मिलेगी की नहीं.    

यहां भी हो सकता है बंटा धार...

अगर किसी कर्मचारी को मुफ्त वस्तुएं एवं सेवाएं दी जा रही हैं तो उस पर भी जीएसटी देय हो सकता है.

मसलन अगर किसी कर्मचारी को 50,000 रुपये से अधिक मुफ्त में वस्तुऐं या सेवाऐं दी जा रही हैं तो उस पर भी जीएसटी देना होगा. अगर कोई कर्मचारी व्यक्तिगत उपयोग के लिए कंपनी की संपत्ति (मसलन कार ,घर ,फोन आदि) का लाभ लेता है तो वह भी जीएसटी के दायरे में आएगा. कंपनी से वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपये से अधिक की कीमत के मिले उपहारों पर जीएसटी के तहत टैक्स देना पड़ेगा.

केपीएमजी इंडिया में अप्रत्यक्ष कर मामलों को देखने वाले सचिन मेनन का कहना है, “सुविधाएं जो कि एक कर्मचारी को प्रदान की जाती हैं और जो कि उसकी कॉस्ट टू सैलरी यानी सीटीसी का हिस्सा नहीं होता है, उस पर जीएसटी लगाया जा सकता है.”

(ये आर्टिकल आईचौक के साथ इंटर्नशिप कर रहे जयंत विक्रम सिंह की रिसर्च के आधार पर लिखा गया है.)

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