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Updated: 03 अगस्त, 2017 01:27 PM
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पौराणिक कथाओं की दुनिया भी काफी अजीब है. यथा-कथा एक ना एक ऐसी कहानी और किरदार सामने आ जाता है जिसके बारे में जानकर आप चौंक जाएं. सावन का महीना चल रहा है और शिव की पूजा और भक्ति में सभी लीन हैं. शिव की संतानों के बारे में बात की जाए तो हमेशा सिर्फ दो नाम ही याद आते हैं. कार्तिकेय और गणेश. गणेश जिन्हें लगभग हर घर में पूजा जाता है और दूसरे हैं कार्तिकेय जिन्हें देश के दक्षिणी भाग में महत्व दिया जाता है. ये तो हुई दो संतानों की बात, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भगवान शिव की तीन बेटियां और थीं. साथ ही एक बेटा अइयप्पा और था.

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पौराणिक कथाओं की मानें तो भगवान शिव कुल 6 बच्चों के पिता थे. इन सभी को देश के अलग-अलग कोने में पूजा जाता है. गणेश, कार्तिकेय, अयप्पा, अशोक सुंदरी, ज्योती और मनसा. श्री गणेश का जन्म कैसे हुआ और कैसे तारकासुर को मारने के लिए भगवान कार्तिकेय के 6 मुख और 12 हाथों वाले अवतार का जन्म हुआ इसकी कहानी तो सभी जानते हैं, लेकिन शिव की बाकी संतानों का जन्म और उनसे जुड़ी कथाएं शायद ही आपको पता हों.

शिव पुराण में सबसे ज्यादा शिव के सामाजिक होने का जिक्र है. इस पुराण में शिव से जुड़ी अनेक कहानियां हैं. जिसमें वो एक पिता की भूमिका निभाते नजर आए हैं.

पार्वती के अकेलेपन की साथी अशोक सुंदरी...

गुजरात और उसके आस-पास के इलाकों की व्रत कथाओं में अशोक सुंदरी की चर्चा होती आई है. शिव पुराण में भी अशोक सुंदरी का व्याख्यान मिलता है. अशोक सुंदरी को पद्म पुराण में भी जगह मिली है. बहचर्चित सीरियल देवों के देव महादेव में भी अशोक सुंदरी को दिखाया गया था.

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असल में अशोक सुंदरी के जन्म के पीछे की कहानी पार्वती से जुड़ी हुई है. पार्वती ने अपना अकेलापन दूर करने के लिए कल्प वृक्ष जिसे लोगों की इच्छाओं को पूरा करने वाला पेड़ कहा जाता है, से एक वर्दान मांगा. एक कन्या का वर्दान. इसे ही अशोक सुंदरी के जन्म से जोड़कर देखा जाता है. कन्या का नाम अशोक सुंदरी रखा गया क्योंकि उसने पार्वती के शोक को खत्म किया था और वो बहुत सुंदर थी. कथाओं के अनुसार जब भगवान गणेश का सिर शिव ने काट दिया था तब अशोक सुंदरी नमक की बोरी के पीछे छुप गई थीं. ऐसा उन्होंने अपनी क्रोधित मां से बचने के लिए किया था. तब से अशोक सुंदरी को नमक से जोड़कर देखा जाने लगा. अशोक सुंदरी की शादी नहुशा से होनी तय थी, लेकिन एक राक्षण हुंडा ने अशोक सुंदरी को धोखे से अपने पास रख लिया. नहुशा तब छोटे थे और उन्हें मारने की भी कोशिश की गई. तब नहुशा को ऋषि वैशिष्ठ के आश्रम में रखा गया और बड़े होकर उन्होंने हुंडा को खत्म किया और अशोक सुंदरी से शादी की.

शिव के तेज से जन्मी ज्योती...

दक्षिण में शिव के साथ ज्योती को भी पूजा जाता है. ज्योती के जन्म से जुड़ी कई कहानियां हैं. पुराणों की मानें तो शिव के तेज से ज्योती का जन्म हुआ था. हालांकि, ज्योती के जन्म को पार्वती से भी जोड़कर देखा जाता है और कहा जाता है कि पार्वती के माथे से निकली एक चिंगारी से ज्योती का जन्म हुआ था. माना जाता है कि ज्योती शिव के तेज को सह सकती थीं. हालांकि, इन्हें ज्वालामुखी से भी जोड़कर देखा जाता है. खास तौर पर दक्षिण में ज्योती को पूजा जाता है.

पार्वती की ईर्ष्या और मनसा देवी...

मनसा देवी को पार्वती की ईर्ष्या से जोड़कर देखा जाता है. अगर आपको ना पता हो तो बता दूं कि हरिद्वार में मनसा देवी का बहुप्रसिद्ध मंदिर है. मनसा देवी उन कुछ देवियों में से एक हैं जिन्हें कभी खुशी नहीं मिली. कम से कम कथाओं में तो इसका जिक्र है. बंगाली लोक कथाओं में खास तौर पर मनसा को जगह दी गई है.

दरअसल, मनसा का जन्म शिव के वीर्य से जरूर हुआ था, लेकिन वो पार्वती की बेटी नहीं थी. कथाओं में जिक्र है कि काद्रु (सांपों की मां) ने एक मूर्ती बनाई थी और किसी तरह से शिव का वीर्य उस मूर्ती को छू गया था और उससे जन्मी थीं मनसा. मनसा के बारे में प्रसिद्ध है कि वो सांपों के विश का असर भी बेअसर कर सकती हैं और मंदिरों में उन्हें सांप के काटे और छोटी माता जैसी बीमारियों को ठीक करने वाली देवी के रूप में पूजा जाता है.

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क्योंकि, मनसा शिव की बेटी थीं और पार्वती की नहीं इसलिए पार्वती हमेशा मनसा से नफरत करती थीं. कथाओं में इसका जिक्र है कि एक बार कलह-कलेश के तंग आकर शिव ने मनसा को त्याग दिया था. एक कथा में ये भी जिक्र है कि मनसा ने ही शिव को उस जहर से बचाया था जो समुद्रमंथन के समय शिव ने पिया था. उसके बाद ही शिव नीलकंठ बने थे.

एक पौराणिक कथा जिसमे पार्वती को चंडी रूप में बताया गया है ये कहा जाता है कि चंडी ने मनसा से कहा था कि वो अपने पती के सामने सांपों से बने जेवर में जाए. मनसा की शादी जकार्तू से हुई थी और मनसा का ये रूप देखकर जकार्तू डर गए और मनसा को छोड़कर चले गए. तब से मनसा देवी को गुस्सैल भी कहा जाने लगा.

शिव और विष्णु की संतान अयप्पा...

अब बात करते हैं शिव के उस बेटे की जिसे हिंदु त्रिमूर्ती में से दो देव शिव और विष्णु की संतान माना जाता है. कहा जाता है कि अयप्पा शिव और मोहिनी की संतान हैं. इन्हें केरल और तमिलनाडु में (देव अय्यनार के नाम से) पूजा जाता है. अयप्पा कुछ सबसे बलशाली देवों में से एक हैं. कहा जाता है कि अयप्पा ने परशुराम से लड़ना सीखा.

अयप्पा के जन्म की कहानी भस्मासुर के अंत से शुरू होती है जब उस राक्षस को खत्म करने के लिए विष्णु ने मोहिनी की अवतार लिया था. शिव ने एक बार विष्णु से फिर मोहिनी अवतार में आने को कहा. विष्णु के अवतार लेते ही भगवान शिव उनपर मोहित हो गए और उसके बाद जन्म हुआ अयप्पा का.

तो इस तरह भगवान शिव कुल 6 बच्चों के पिता थे. इसके अलावा, भी कई कथाएं हैं जिनमें भगवान शिव के 3 नहीं 6 बेटों का जिक्र है.

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