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Updated: 24 मई, 2020 10:28 PM
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ईद (Eid) मुसलमानों (Muslims) का सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है. ईद रमज़ान (Ramadan) महीने के खत्म होने पर मनायी जाती है. ईद मनाने के लिए तैयारियां हफ्तों और महीने भर पहले से ही शुरू हो जाती हैं. इस दिन सभी मुसलमान नए नए पोशाक (कपड़े) पहनकर ईदगाह में नमाज़ अदा (पढ़ने) करने जाते हैं. ईद का दिन चांद (Moon Sighting) देखकर मनाया जाता है लेकिन चांद के सिलसिले में हमेशा मुस्लिम समुदायों में मतभेद सामने आ जाता है. जिसकी वजह से दो-दो ईद हो जाया करती हैं. आखिर ऐसा मतभेद क्यों होता है? चांद क्यों देखा जाता है? इसे समझने के लिए आपको थोड़ा गहराई में जाना होगा. दरअसल ईद उर्दू कैलेंण्डर (हिजरी) के हिसाब से मनाई जाती है. उर्दू कैलेंडर का 9वां महीना रमज़ान का होता है जो आमतौर पर 29 या 30 दिनों का होता है. इसके बाद 10वां महीना शव्वाल शुरू होता है जिसकी पहली तारीख को ही ईद मनाई जाती है. उर्दू कैलेंडर का हर महीना चांद को देखकर शुरू होता है. माना जाता है जब नया चांद दिखाई दे तो ही नया महीना शुरू होता है. इसी नए चांद को देखकर ही ईद (शव्वाल) का महीना शुरू होता है. चूंकि ईद मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार है इसलिए ईद के चांद का इंतेजार न सिर्फ मुसलमानों को बल्कि अन्य समुदाय के लोगों को भी खूब रहता है. कभी कभी इसी चांद को लेकर मुसलमानों में मतभेद उत्पन्न हो जाता है जिसकी वजह से लोग अलग अलग धड़ों में बंट जाते हैं और दो ईद हो जाती है.

Coronavirus, Lockdown, Moon, Eid, Muslimप्रायः ये देखने को मिला है कि हमेशा ही ईद के चांद को लेकर मुसलमानों के बीच गफलत रही है

क्या होता है नया चांद 

पृथ्वी सूर्य का चक्कर लगाती है और इस चक्कर को पूरा होने में 365 दिन और कुछ घंटे लगते हैं. जिसकी वजह से 365 दिनों वाला साल हर चौथे वर्ष लीप ईयर हो जाता है और फरवरी में एक दिन बढ़ जाते हैं और पूरा साल 366 दिनों का हो जाता है. ठीक इसी तरह पृथ्वी चांद का भी चक्कर लगाती है. विज्ञान के अनुसार अगर पृथ्वी अपनी जगह ठहरी रहे और चांद अपनी परिक्रमा करता रहे तो 27 दिन में चांद पृथ्वी का एक चक्कर पूरा कर लेता है. लेकिन चांद के साथ साथ पृथ्वी भी घूमती है. जिसकी वजह से पृथ्वी और चांद का एक चक्कर 29 दिन और कुछ घंटों में पूरा होता है. इसी एक चक्कर को पूरा हो जाने के बाद जो चांद दिखता है उसे नया चांद कहा जाता है.   

हर साल अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार क्यों घट जाता है ईद का दिन

आप हमेशा देखते होंगे की ईद कभी जुलाई में होता है तो कभी जून में या फिर अन्य महीनों में, तो इसकी भी एक बड़ी वजह यह है कि उर्दू कैलेंडर में 355 या 356 दिन होते हैं ये 10 दिनों का फर्क ही ईद को हर साल 10 दिन घटा देता है जिससे यह अलग अलग महीनों में पड़ता रहता है.

उर्दू कैलेंडर क्या है 

उर्दू कैलेंडर एक इस्लामिक कैलेंडर है. जिसको हिजरी के अनुसार जाना जाता है. हिजरी की शुरूआत तब हुई जब पैगंबर मोहम्मद साहब ने सउदी अरब के मक्का शहर को छोड़कर मदीना शहर बसा लिया. उसी साल से हिजरी की शुरुआत हुयी. वर्तमान में 1441 हिजरी चल रहा है. मोहर्रम उर्दू कैलेंडर का पहला महीना होता है जिसकी पहली तारीख से उर्दू कैलेंडर का आगाज़ होता है. इसमें भी 12 महीने होते हैं जिसमें रमज़ान 9वें महीनें में और ईद दसवें महीने की पहली तारीख व बकरीद 12 वें महीने की दसवीं तारीख को मनाई जाती है.

भारत में कैसे मनाई जाती है ईद 

भारत के कई शहरों में अलग अलग चांद कमेटियां गठित की गई है. सबसे असरदार ऐलान लखनऊ या दिल्ली की शाही जामा मस्जिद से होता है. भारत में मुस्लिम समुदाय दो धड़े में बटा हुआ है. जिनमें एक शिया समुदाय और दूसरा सुन्नी समुदाय है. इन दोनों ही समुदाय की अलग अलग चांद कमेटियां गठित की गई हैं.

इन चांद कमेटियों के हर राज्य में नुमाइंदे होते हैं और दो काबिले कुबूल लोगों की चांद देखने की गवाही पर ये फैसला लेते हैं और ऐलान कर चांद होने न होने का ऐलान करते हैं. चूंकि उर्दू महीना 30 दिन का ही होता है इसलिए 29 तारीख को चांद न दिखने पर 30 तारीख को चांद हो या न हो अगले दिन को महीने का पहला दिन मान लिया जाता है.

भारत में कमेटियां 

भारत में मुख्य दो कमेटी हैं. जिनमें एक शिया चांद कमेटी है तो दूसरी सुन्नी चांद कमेटी. इन दोनों का मुख्यालय लखनऊ में है. इनमें सुन्नी चांद कमेटी के अध्यक्ष राशिद फिरंगी हैं तो शिया कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ अब्बास नकवी और मौलाना रज़ा हुसैन साहब हैं. जिनके ऐलान पर भारत में शिया और सुन्नी ईद मनाते हैं कभी कभी इन्हीं दोनों समुदायों के बीच मतभेद हो जाता है जिससे भारत में दो ईद हो जाती हैं.

अन्य देश कैसे मनाते हैं ईद 

दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों में भी चांद कमेटियां गठित की जाती हैं वही चांद कमेटी चांद से जुड़े फैसले लेती हैं लेकिन टेक्नालाजी के इस दौर में अब वैज्ञानिक आधार पर चांद की स्थिति देख कर उसके अनुसार ही उर्दू कैलेंडर छापा जाता है और उसी कैलेंडर के हिसाब से ईद भी मनाई जाती है अधिकतर मुस्लिम देशों में ईद की तारीख पहले ही घोषित कर दी जाती है और उसी के अनुसार ईद मनायी भी जाती है.

सऊदी अरब और ईरान में भी उर्दू कैलेंडर के हिसाब से ही ईद मनायी जाती है अपवाद को छोड़ दें तो इन देशों में सभी समुदाय एक साथ ही ईद मनाते हैं जबकि पाकिस्तान और भारत में अक्सर दो ईद हो जाया करती है. पाकिस्तान में भी चांद को लेकर खूब मतभेद सामने आते हैं. लेकिन इस साल इमरान सरकार में संघीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने चांद को लेकर एक अहम फैसला लिया.

एक प्रेस वार्ता करते हुए कहा कि विज्ञान के अनुसार अब चांद की स्थिति का पता लगाया जा सकता है और इसी के अनुसार अब पूरे पाकिस्तान को ईद मनाना चाहिए और दोपहर में ही उन्होंने चांद की स्थिति को बतलाते हुए रविवार को ईद की घोषणा कर दी,हालांकि मुस्लिम धर्मगुरूओं की इस पर एक राय नहीं थी लेकिन रात होते होते लगभग सभी धर्मगुरुओं ने रविवार को ईद मनाने का ऐलान कर दिया.

माना जाता है कि फवाद चौधरी के ही बयान से पूरे मुल्क में एक ईद मनाई गई है. फवाद के अनुसार ऐसी कोशिश पहले भी की गई थी और 1974 में एक कमेटी गठित की गई थी लेकिन उस कमेटी में ही फूट पड़ गई और सब अपना अलग अलग ऐलान करने लगे. इस साल एक ईद होने के बाद माना जा रहा है कि अब पाकिस्तान भी विज्ञान के आधार पर ईद को पूरे मुल्क में एक साथ मनाया जाएगा.

भारत में भी क्या विज्ञान के आधार पर होगा ईद का ऐलान

इस समय तो भारत में जो चांद कमेटियों का रुख है उसके अनुसार भारत में तो अभी पुराने तरीके से ही चांद का ऐलान हुआ करेगा. हालांकि लखनऊ के एक विद्वान मौलाना डा कल्बे सादिक हर साल एक माह पहले ही ईद और बकरीद की तारीखों का ऐलान कर देते हैं. वह विज्ञान के आधार पर ही इन तारीखों का ऐलान करते हैं और पिछले 15-20 वर्षों से वह ऐसा करते आ रहे हैं उनके द्वारा बताई गयी तारीख सटीक होती है.

चांद देखने के बाद चांद कमेटी जो ऐलान करती है वह बिल्कुल वही होती है लेकिन इसके बावजूद चांद कमेटियों का कहना है कि शरीयत के अनुसार चांद हकीकत में देखना या दो खास लोगों की गवाही के बाद ही ऐलान किया जा सकता है विज्ञान के आधार पर चांद का ऐलान नहीं किया जा सकता है.

क्या है वैज्ञानिक आधार 

दरअसल यह स्पेस सिस्टम के अनुसार तय होता है सैटेलाइट और अंतरिक्ष के ज़रिए चांद की स्थिति को देखकर बताया जाता है कि चांद अपना यह चक्कर कब और किस समय पूरा करेगा. इसी तरह नए चांद को माना जाता है और महीने के खत्म होने का ऐलान कर दिया जाता है.

आमतौर पर हर महीना चांद के अनुसार ही तय होता है लेकिन इसपर लोगों की खास दिलचस्पी नहीं रहती है चूंकि ईद सभी मुसलमान मनाते हैं इसलिए ईद के चांद पर हर किसी की नज़र टिकी हुई होती है. चांद की स्थिति को बतलाने वाली एक वेबसाईट भी है जिसके अनुसार कई देश चांद होने न होने का फैसला लेते हैं. इस वेबसाइट का नाम मून शाइटिंग है.

भारत में ही क्यों हो जाती है दो ईद

भारत में भी केरल और जम्मू कश्मीर दो ऐसे राज्य हैं जहां आज ईद मनाई गई है. जबकि अन्य राज्यों में कल या सोमवार को ईद मनाई जाएगी. यह इसलिए होता है कि जम्मू कश्मीर और केरल ये दोनों ही राज्य लखनऊ के फैसले से अलग हटकर अपना खुद का फैसला लेते हैं लेकिन इनमें कुछ हिस्से के लोग ही होते हैं अधिकतर लखनऊ के चांद कमेटी के फैसले को ही मानते हैं.

लेकिन कुछ ग्रुप ऐसे हैं जो पड़ोसी देश के चांद की तस्दीक को भी मान लेते हैं. और उसी के आधार पर ईद मना लेते हैं उनका मानना है कि ऐसा नहीं है कि पड़ोसी मुल्क में चांद दिखा हो तो वह चांद भारत में नहीं माना जाएगा. दूसरी ओर लखनऊ स्थित चांद कमेटियों का मानना है कि भारत के किसी भी हिस्से में कम से कम दो लोगों का चांद का देखना ज़रूरी है तभी चांद की तस्दीक की जा सकती है अथवा नहीं.

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