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Updated: 29 जुलाई, 2022 03:52 PM
अनुज शुक्ला
अनुज शुक्ला
  @anuj4media
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सिनेमाघरों में आमिर खान की फिल्म लाल सिंह चड्ढा का क्या अंजाम होगा? अगर सवाल का जवाब इंटरनेट और सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर हो रही बातचीत के आधार पर तय किया जाए तो- कह सकते हैं कि 'डिजास्टर' साबित होगी. सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर जारी निगेटिव कैम्पेन का संकेत तो यही है. दिलचस्प यह है कि सिनेमा को हिंदू-मुस्लिम बंटवारे में देख रहे लोग ही विरोध नहीं कर रहे बल्कि आमिर की फिल्मों का विरोध एक वर्ग संघर्ष चेतना का रूप लेता भी दिख रहा है. यह अपने आप में दिलचस्प है. अभी तक हिंदू-मुस्लिम आधार पर ही खान सितारों की फिल्मों का विरोध होता था.  

बॉलीवुड के दूसरे सितारों की फिल्मों का विरोध भाई भतीजावाद, कथित संस्कारहीनता और नशेबाजी के साथ ही भारतीय भावनाओं को कथित नुकसान पहुंचाने को लेकर किया जाता था. लाल सिंह चड्ढा के विरोध में जो नई बात दिख रही- वह आमिर जैसे बूढ़े हो चुके सितारों को रिटायरमेंट रिटायरमेंट दिलवाने की धारणा के साथ है. और ऐसा भी नहीं है कि इस धारणा का शिकार सिर्फ आमिर ही हैं. बल्कि अक्षय कुमार की बच्चन पांडे और सम्राट पृथ्वीराज के वक्त भी यह ट्रेंड दिखा था. सलमान खान, जॉन अबाहम, शाहरुख खान आदि 50 के पार अभिनेताओं को जबरदस्ती हीरो बने रहने पर लोगों को आपत्ति है. वैसे एक एक्टर के प्रति दर्शकों के इस आग्रह को भी जायज तो नहीं कहा जा सकता है.  

आमिर खान के पीछे इस बार सभी तरह के लोग दिख रहे हैं

आमिर खान की लाल सिंह चड्ढा के लिए दिक्कत यह है कि उन्हें बॉलीवुड की सभी विरोधी धाराओं की नकारात्मकता का सामना करना पड़ रहा है. कई लोगों का मानना है कि आमिर जैसे सुविधासंपन्न सितारों को अब नई पीढ़ी के लिए रास्ता छोड़ देना चाहिए. यह मांग करने वालों के लिए नई पीढ़ी की परिभाषा फ़िल्मी सितारों के बच्चे नहीं बल्कि गैर फ़िल्मी बैकग्राउंड से आने वाले 'वंचित' कलाकार हैं.

LSC aamir khanआमिर खान और करीना कपूर खान.

लाल सिंह चढ्ढा 11 अगस्त को सिनेमाघरों में आएगी. इसी दिन अक्षय कुमार की फैमिली ड्रामा रक्षा बंधन भी रिलीज होगी. लंबे वक्त बाद हिंदी बॉक्स ऑफिस पर दो बड़े सितारों के बीच महाजंग दिखेगी. सोशल मीडिया पर आमिर की फिल्म के खिलाफ चल रहे कैम्पेन 'जनांदोलन' के रूप में दिख रहे हैं. फिल्म रिलीज होने में अभी करीब दो हफ़्तों का समय है मगर आमिर से खफा लोग बहुत पहले से ही आस्तीनें चढ़ाकर खिलाफत के मूड में हैं. किसी भी सूरत में फिल्म ना देखे जाने की अपीलें हो रही हैं. लोगों का कहना यह है कि अगर लाल सिंह चड्ढा फ्लॉप हो गई तो गैर फ़िल्मी पृष्ठभूमि के लोगों का फिल्म उद्योग में प्रवेश सामान्य हो जाएगा. बॉलीवुड को भारत की बहुसंख्यक जनता की राष्ट्रीय/सांस्कृतिक भावनाओं की कद्र करना मजबूरी हो जाएगी.

सोशल मीडिया की राय से अलग आमिर, लाल सिंह चड्ढा को लेकर क्या सोचते हैं?

लाल सिंह चड्ढा को खुद आमिर के प्रोडक्शन ने बनाया है. यह फिल्म टॉम हैंक्स की 'फारेस्ट गंप' का आधिकारिक रीमेक है. फारेस्ट गंप के मेकर्स भी रीमेक से आधिकारिक रूप से जुड़ रहे हैं. पैरामाउंट पिक्चर्स को ओवरसीज राइट मिला है. लाल सिंह चड्ढा को हिंदी के अलावा कई और भारतीय भाषाओं में पैन इंडिया रिलीज करने की तैयारी है. निश्चित ही लाल सिंह चड्ढा को लेकर आमिर का कॉन्फिडेंस नेक्स्ट लेवल पर है. उन्हें निगेटिव सोशल कैम्पेन की कोई फ़िक्र नहीं. वे तमाम बहसों से दूर फिल्म को ब्लॉकबस्टर बनाने की तैयारियों में जुटे हैं. मिस्टर परफेक्शनिस्ट के रूप में मशहूर एक्टर को भरोसा है कि उनकी फिल्म हर हाल में 'क्लीन थियेटर ब्लॉकबस्टर' है. ओटीटी स्ट्रीमिंग के बहाने उनका आत्मविश्वास साफ़ झलक रहा है.

फिल्म की ओटीटी स्ट्रीमिंग से जुड़ी कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक़ लाल सिंह चड्ढा के सिनेमाघरों में आने के छह महीने बाद ही ओटीटी पर स्ट्रीमिंग होगी. टीवी प्रीमियर को लेकर कोई जानकारी तो सामने नहीं आई है लेकिन जाहिर है कि यहां भी प्रीमियर के लिए लंबा अंतराल लिया जाए. निर्माताओं ने अभी खुलासा नहीं किया है कि फिल्म किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर आएगी? जहां तक ट्रेंड की बात है पहले सिनेमाघर, फिर ओटीटी और इसके बाद टीवी प्रीमियर का नंबर आता है. हो सकता है कि लाल सिंह चड्ढा की ओटीटी स्ट्रीमिंग के पीछे मेकर्स की तगड़ी कारोबारी योजनाएं हों. और ऐसा ही है. क्योंकि छह महीने का अंतराल बहुत लंबा होता है. करीब दो-तीन दशक पहले सिनेमाघरों में फ़िल्में इतना लंबा चला करती थीं.

केजीएफ 2 जैसी ब्लॉकबस्टर भी छह महीने सिनेमाघरों में टिक नहीं पाती

अब तो एग्जीबिटर किसी फिल्म को सिनेमाघरों में तभी तक दिखाते हैं जब तक अच्छी खासी संख्या में दर्शक वहां पहुंचते हैं. पिछले कुछ सालों में ऐसा नहीं दिखा कि कोई फिल्म पांच या छह महीने तक सिनेमाघरों में टंगी हो और दर्शकों ने उसमें दिलचस्पी दिखाई हो. पुष्पा: द राइज, द कश्मीर फाइल्स, आरआरआर और केजीएफ़ 2 जैसी महा ब्लॉकबस्टर फ़िल्में भी दो महीने से ज्यादा वक्त तक सिनेमाघरों में नहीं टिक पाई. उनके स्क्रीन्स कम हुए या उन्हें हटाना पड़ा. ओटीटी के लिए आमिर ने इतना लंबा गैप क्यों लिया- फिलहाल यह समझ से परे है.

आमतौर पर सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली फिल्मों को 4 से 8 हफ़्तों के अंतराल में ओटीटी पर स्ट्रीम किया जाता है. 4 से 8 हफ़्तों के दौरान निर्माता सिनेमाघरों से संभावित कमाई कर भी लेते हैं. लेकिन हाल के दिनों में यह भी दिखा है कि पहले ही हफ्ते बॉक्स ऑफिस पर नकारी गई फिल्मों की लागत निकालने के लिए तमाम निर्माताओं ने अपनी फिल्मों को 4 हफ्ते से पहले ही मोटी डील लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम कर दिया था.

छह महीने लेट ओटीटी स्ट्रीमिंग के पीछे आमिर का असल मकसद भी जान लीजिए

जहां तक बात सिनेमाघरों और ओटीटी स्ट्रीमिंग में अंतराल की है- निर्माताओं की प्राथमिकता रहती है कि कोई दर्शक उनकी फिल्मों को सबसे पहले सिनेमाघर में ही देखें. सिनेमाघरों में प्रत्येक दर्शक को इंडिविजुअली भुगतान करना पड़ता है. जबकि ओटीटी, डिजिटल या टीवी प्रीमियर में दर्शक सामूहिक रूप से (इंडिविजुअली भी) फिल्मों का कंटेंट इस्तेमाल करते हैं. कोरोना महामारी के बाद तो दर्शक ओटीटी को लेकर ज्यादा सुलभ हुए हैं और सिनेमाघरों में जाने की बजाए नई फिल्मों की ओटीटी स्ट्रीमिंग का इंतज़ार करते हैं. अब सवाल है कि क्या लाल सिंह चड्ढा ऐसी फिल्म साबित होने जा रही है जिसे देखने दर्शक छह महीने तक सिनेमाघर पहुंचते रहेंगे?

देखने में आया है कि तमाम फ़िल्में- जिनसे सिनेमाघरों में बहुत बेहतर बिजनेस की अपेक्षाएं थीं टिकट खिड़की पर फुस्स साबित हुई हैं. इनमें अक्षय कुमार की सम्राट पृथ्वीराज सबसे बड़ा और ताजा उदाहरण है. फिल्म को पहले हफ्ते में ही दर्शक जुटाने में मुश्किलें हुईं. आमिर शायद लाल सिंह चड्ढा को किसी तरह बचा ले जाए. वे बॉलीवुड में पीआर के सबसे बड़े खिलाड़ी हैं.

ओटीटी स्ट्रीमिंग के लिए छह महीने का गैप मेकर्स ने जानबूझकर लिया है. आमिर की योजना काम कर गई तो उन्हें दो तरह से फायदा होगा. एक तो फिल्म रक्षाबंधन से क्लैश में है. रक्षाबंधन रिलीज के चार से आठ हफ़्तों बाद ओटीटी पर आ जाएगी. जबकि लाल सिंह चड्ढा के बारे में अभी से प्रचारित किया जा रहा है कि उनकी फिल्म को ओटीटी पर आने में 6 महीने लगेंगे. यानी लाल सिंह के मेकर्स एक तरह से दो फिल्मों में कन्फ्यूज दर्शकों को ट्रैप में फंसा रहे हैं. ताकि बजट आदि चीजों का ख्याल रखने वाले दर्शक अक्षय की फिल्म को ओटीटी पर देखने का फैसला करें और लाल सिंह के लिए सिनेमाघर जाए. आमिर की फिल्म का वर्ड ऑफ़ माउथ बढ़िया रहा तो मेकर्स ओटीटी ट्रैप के जरिए संभावित क्लैश के जोखिम को पूरी तरह से ख़त्म कर देंगे.

लाल सिंह चड्ढा में आमिर के अलावा करीना कपूर खान, नागा चैतन्य और मोना सिंह अहम भूमिकाओं में हैं. निर्देशन अद्वैत चंदन ने किया है.

लेखक

अनुज शुक्ला अनुज शुक्ला @anuj4media

ना कनिष्ठ ना वरिष्ठ. अवस्थाएं ज्ञान का भ्रम हैं और पत्रकार ज्ञानी नहीं होता. केवल पत्रकार हूं और कहानियां लिखता हूं. ट्विटर हैंडल ये रहा- @AnujKIdunia

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