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Updated: 14 फरवरी, 2022 08:04 PM
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'उस की याद आई है सांसो ज़रा आहिस्ता चलो, धड़कनों से भी इबादत में ख़लल पड़ता है''...मशहूर शायर राहत इंदौरी साहब की ये शायरी उस हर दिल की आवाज है, जो किसी की मोहब्बत में धड़कता है. इसी प्यार और मोहब्बत को आज यानी वेलेंटाइन डे पर सेलीब्रेट करने की परंपरा बहुत पुरानी है. कहा तो यहां तक जाता है कि वर्ष 496 में पहला वैलेंटाइन डे मनाया गया था, जिसकी शुरूआत रोमन फेस्टिवल से हुई थी. वैसे प्यार बॉलीवुड का हमेशा से ही पसंदीदा विषय रहा है.

हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बनने वाली अधिकतर फिल्में लोगों के लिए प्यार की पहली पाठशाला की तरह होती हैं. इन फिल्मों को देखकर सच्ची मोहब्बत करना सीखा जा सकता है. हम कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमें प्यार की असली परिभाषा बताई और दिखाई गई है. इनमें कोई प्यार में जान दे देता हैं, तो कोई अपने घरवालों से बगावत कर लेता है. 'मोहब्बतें' से लेकर 'मसान' तक, ऐसी कई फिल्में हैं, जिसमें मोहब्बत को बेहद खूबसूरत तरीके से पेश किया गया है.

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अपने महबूब से सच्ची मोहब्बत करना सिखाती हैं ये 5 बॉलीवुड फिल्में...

1. फिल्म- मोहब्बतें

सीख- प्यार में हारने के बाद भी उसके एहसास के साथ जिंदगी में आगे बढ़ते रहना.

कहां देख सकते हैं- प्राइम वीडियो

"मोहब्बत भी जिंदगी की तरह होती है, हर मोड़ आसान नहीं होता, हर मोड़ पर खुशी नहीं होती, पर जब हम जिंदगी का साथ नहीं छोड़ते, फिर मोहब्बत का साथ क्यों छोड़ें"...साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म 'मोहब्बतें' में अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, ऐश्वर्या राय, उदय चोपड़ा, जुगल हंसराज, जिमी शेरगिल, शमिता शेट्टी किम शर्मा, प्रीति झंगियानी अहम किरदार निभाए हैं. एक ऐसे शख्स राज की कहानी है जो अपनी प्रेमिका मेघा को उसकी मौत के बाद भी बेइंतहा प्यार करता है. विरोध होने के बावजूद वो उसी गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्रों को प्यार की परिभाषा सिखाता है, जहां उसकी प्रेमिका के रूढ़वादी पिता प्रधानाचार्य होते हैं.

2. फिल्म- मुगल-ए-आजम

सीख- सच्ची मोहब्बत ऊंच-नीच और जाति-धर्म से परे होती है.

कहां देख सकते हैं- जी5

''मोहब्बत जो डरती है, वो मोहब्बत नहीं, अय्याशी है, गुनाह है''...साल 1960 में रिलीज हुई फिल्म मुगल-ए-आजम के इस डायलॉग के जरिए एक सच्चे आशिक की मोहब्बत को समझा जा सकता है. इस फिल्म में अकबर के शहजादे सलीम और एक दासी अनारकली की खूबसूरत, मुश्किलों से भरी और अधूरी प्रेम काहनी दिखाई गई है. इस ऐतिहासिक फिल्म को बनने में कुल 16 साल लगे थे. इसे पहले ब्लैक एंड व्हाइट रिलीज किया गया था, लेकिन बाद कलर प्रिंट के साथ दोबारा रिलीज किया गया. ये उस समय की सबसे महंगी फिल्म थी. 1.5 करोड़ रुपए में बनी इस फिल्म ने 11 करोड़ रुपए का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन किया था.

3. फिल्म- मसान

सीख- जिंदगी एक जंग है, जिसे जीने की जद्दोजहद जारी रहनी चाहिए.

कहां देख सकते हैं- जी5

साल 2015 में रिलीज हुई फिल्म मसान में रिचा चड्ढा, विकी कौशल, संजय मिश्र, श्वेता त्रिपाठी और विनीत कुमार लीड रोल में हैं. मौत और उसके बाद के अवसाद भरे माहौल के बीच आकार लेती जिंदगियां. छोटे शहरों के जीवन के अलग-अलग दंश. धीमी और जकड़ी जिंदगी से बाहर निकलने की जद्दोजहद. आजाद ख्याल जीवन जीने की चाहत पर समाज का विकृत साया. जातिवाद के जाल में उलझा प्यार. ऐसे विषय जिनसे हम नजर नहीं चुरा सकते लेकिन अपनी भाग-दौड़ की जिंदगी में अकसर नजर अंदाज कर जाते हैं, सभी 'मसान' में नजर आते हैं. फिल्म में एक डोम लड़के और स्वर्ण लड़की की सच्ची लेकिन अधूरी प्रेम कहानी दिखाई गई है.

4. फिल्म- रॉकस्टार

सीख- कई बार में सीने में दर्द और आंखों में उदासी लिए इंसान को मुस्कराना पड़ता है.

कहां देख सकते हैं- प्राइम वीडियो

इम्तियाज अली के निर्देशन में बनी रॉकस्टार एक बेहद खूबसूरत लव स्टोरी है, हालांकि कई फिल्मों की तरह रॉकस्टार हैप्पी एंडिंग पर खत्म नहीं होती. फिल्म जनार्दन नाम के एक सीधे-सादे लड़के की कहानी है जो दिल तुड़वाने के लिए कॉलेज की सबसे पॉपुलर लड़की हीर के पास जाते हैं. इस ड्रामे के बीच जनार्दन को उस समय हीर से मोहब्बत हो जाती है जब उनकी शादी किसी और से हो रही थी. जनार्दन एक पॉपुलर सिंगर बन जाते हैं. प्राग में दोनों फिर नजदीक आते हैं हालांकि हीर की शादीशुदा जिंदगी उन्हें रोक देती है. जब जॉर्डन उर्फ जनार्दन को हीर की बीमारी अप्लास्टिक एनीमिया का पता चलता है तो दोनों कुछ आखिरी पल साथ बिताने लगते हैं.

5. फिल्म- तेरे नाम

सीख- सिर्फ शक्ल और सूरत देखकर प्यार नहीं होता, इंसान की सीरत भी अच्छी होनी चाहिए.

कहां देख सकते हैं- प्राइम वीडियो

''करनी है खुदा से एक गुज़ारिश तेरे प्यार के सिवा कोई बंदगी ना मिले हर जनम में साथी हो तुम जैसा या फिर कभी ज़िन्दगी ही ना मिले''...सलमान खान और भूमिका चावला स्टारर फिल्म तेरे नाम, राधे मोहन नाम के शख्स की कहानी है जिसे कॉलेज की एक सीधी-सादी लड़की निर्जरा से प्यार हो जाता है. गुंडे की तरह दिखने वाले राधे को निर्जरा पहले इंकार कर देती है, लेकिन बाद में जब उसे पता चलता है कि वो दिल का बहुत अच्छा इंसान है, तो इकरार कर बैठती है. इसी बीच एक हादसे में राधे घायल हो जाता है. चोट लगने की वजह से उसका मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है. दूसरी तरफ निर्जरा के पिता उसकी शादी एक पंडित से तय कर देते हैं. राधे पागलखाने से भागकर जब निर्जरा के पास पहुंचता है, लेकिन उससे पहले निर्जरा खुदकुशी कर लेती है. यह देख राधे खुद पागलखाने लौट जाता है.

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