नीतू सिंह-सुतापा सिकदर: ईश्वर मोहब्बत करने वालों की जोड़ी न बिगाड़े!

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Updated: 30 अप्रिल, 2020 09:27 PM

नीतू सिंह-सुतापा सिकदर: ईश्वर मोहब्बत करने वालों की जोड़ी न बिगाड़े!

अनु रॉय
अनु रॉय
  @anu.roy.31
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जाना सबसे आसान क्रिया है. वो जो चले जाते हैं वो सुख-दुःख से मुक्त हो जाते हैं. उन्हें शायद नहीं दिख पाता होगा कि उनके जाने के बाद उनके अपनों पर क्या बीत रही होती हैं. शायद वो ख़ामोश होंठ, उदासी से भरीं आंखों और डूबते दिल की धड़कनों में अपना नाम भी नहीं सुन पाते होंगे. इस दुनिया से दूसरी दुनिया के सफ़र में शायद वो माया से मुक्त हो जाते होंगे लेकिन उनका क्या जो पीछे छूट जाते हैं या जिन्हें वो अधूरेपन के साथ छोड़ कर चले जाते हैं. कल देर रात तक सुतापा (Sutapa Sikdar) के बारे में सोचती रही. बार-बार ख़्याल आता रहा कि सुबह जब वो जगेंगी तो इरफ़ान (Irrfan Khan) का चेहरा उन्हें नहीं दिखेगा. क्या वो सुबह सच में सुतापा की ज़िंदगी के अंधेरे को कम कर पाएगी. वो सुबह भी तो अकेले ही आएगी, इरफ़ान को अपने साथ कहां ला पाएगी? इस सोच के साथ न जाने और कितनी देर तक जागती रही. सुबह जब नींद खुली तो एक और बुरी ख़बर मिलने के लिए आ बैठी थी. चाय ले कर बैठी ही थी कि किसी ने मैसेज करके बताया ऋषि कपूर (Rishi Kapoor) नहीं रहें. मैसेज पढ़ कर एक बार के लिए समझ में ही नहीं आया कि क्या रिऐक्ट करूं? क्या कहूं. कल इरफ़ान साहब (Irrfan Khan Death) के बारे में सुन कर यक़ीन करने का मन नहीं हुआ और आज ऋषि सर (Rishi Kapoor Death) के लिए भी वही फ़ीलिंग आयी. लगा कि कही फ़ेक ख़बर होगी मगर ऐसे बुरी खबरें कहां झूठी निकलती हैं.

Rishi Kapoor Death, Rishi Kapoor, Neetu Singh, Irrfan Khan , Wifeऋषि की मौत से अगर सबसे ज्यादा आघात किसी को लगा होगा तो वो केवल ऋषि की पत्नी नीतू ही होंगी

ऋषि कपूर! आह डैडी जी के पसंदीदा हीरो. उनके गाने जब भी चित्रहार में आते डैडी जी कहीं भी हो उठ कर आ जाते देखने को. आज डैडी जी उदास होंगे ये सोच कर मन उदासियों से भर गया. फिर इन्हीं उदासियों में मुझे नीतू सिंह का चेहरा सबसे पहले याद आया. चौदह साल की एक मासूम लड़की जिसे एक भोली सूरत वाले लड़के से मुहब्बत हो गयी. मगर लड़के की सिर्फ़ सूरत भोली थी दिल से एक नम्बर का शैतान. नीतू को चिढ़ाने या छेड़ने की कोई कसर न छोड़ता.

फ़िल्म के सेट पर झड़गते-झगड़ते दोनों पहले दोस्त बने. लड़के का जब भी अपनी महिला मित्रों से ब्रेक-अप होता वो रोने के लिए नीतू का कंधा तलाशता. नीतू उस लड़के की सेफ़-हैवेन बनती जा रही थी. वो दोनों क़रीब आ रहे थे लेकिन लड़के को कमिट्मेंट से डर लगता था इसलिए उसने शुरू में ही साफ़-साफ़ कह दिया था कि वो सिर्फ़ उसे डेट करेगा, शादी नहीं. लेकिन एक फ़िल्म की शूटिंग के लिए लड़का लंदन गया और वहां उसे जा कर अहसास हुआ कि वो नहीं रह सकता उस लड़की के बिना. आधी रात को वो लंदन से टेलीग्राम करता है - 'सिक्खनी तेरी याद आ रही. नहीं रह सकता तेरे बिना.'

और फिर जो कमिट्मेंट के नाम से डरता था उसने पांच साल की डेटिंग के बाद उस लड़की से शादी कर ली. वो लड़का कोई और नहीं बल्कि ऋषि कपूर था. स्कूल-स्वीट्हार्ट जैसे दोनों फ़िल्म की सेट पर मिलने वाले बच्चे 21 और 26 की उम्र में दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत बंधन में बंध गए और ये साथ 38 साल का रहा. इसमें दोनों ने न जाने कितने उतार-चढ़ाव देखे लेकिन एक दूसरे का साथ नहीं छोड़ा.

बॉलीवुड, जहां शादियां कुछ महीने और साल नहीं टिकती ऋषि और नीतू कपूर ने साबित कर दिया कि अगर शादी में दोस्ती हो तो मुहब्बत बार-बार लौट ही आती है. तमाम झगड़े और मतभेदों के बावजूद मन से मन के बीच कभी दूरियां नहीं जगह बना पाती लेकिन नियति के आगे किसकी चलती है. आज वो 38 सालों का साथ छोड़ कर चले गए.

नीतू सिंह को दुनिया में हर कोई दिखेगा लेकिन आज के बाद इन्हें अपने चिंटू जी नहीं दिखेंगे. मैं बारहा किसी भी फ़िल्म स्टार को फ़ॉलो नहीं करती मगर मैं नीतू मैम के इंस्टाग्राम को ज़रूर हर थोड़े दिन पर स्टॉक किया करती हूं. मुझे उनको और ऋषि सर को साथ में बूढ़े होते देखना अच्छा लगता था. उन्हें देख कर हर बार दिल यही ख़्वाहिश करता था कि कोई ऐसा हो जिसके साथ हम बूढ़े हो सकें. जब हम भूलने लगे ख़ुद को तो वो हमें हमारा होना याद दिलाए. हम साथ में ज़िंदगी के आख़िरी सफ़र पर निकलें.

मगर अब वो नहीं दिखेंगे साथ में. अब नीतू मैम की सेल्फ़ी में कभी मुस्कुराता तो कभी ग्रम्पी लुक लिए ऋषि कपूर का चेहरा नहीं दिखेगा. काश कि ईश्वर मुहब्बत करने वालों को कभी जुदा नहीं करता. ख़ास कर उम्र के इस पड़ाव में तो बिलकुल भी नहीं. बुढ़ापे में हमें अपने हमसफ़र की सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है. जवानी तमाम ज़िंदगी की ज़रूरतों को पूरा करने में गुज़र जाती है. जीवन के सांझ में ही तो हम साथ पाते हैं अपने साथी का.

लेकिन मेरे ऐसा सोच लेने से क्या बदल जाएगा. न तो सुतापा का अकेलापन ख़त्म होगा और न नीतू मैम अपने चिंटू जी के बिना ख़ुश हो पाएंगी. ज़िंदगी का दस्तूर यही है ये जानती हूं मगर दुःख है कि कम ही नहीं हो रहा. ऋषि सर आपको दूसरी दुनिया में सकून मिले. आप जहां कहीं भी हों वहां वही मुहब्बत वाली मुस्कान आप के चेहरे पर बिखरी रहे.

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लेखक

अनु रॉय अनु रॉय @anu.roy.31

लेखक स्वतंत्र टिप्‍पणीकार हैं, और महिला-बाल अधिकारों के लिए काम करती हैं.

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