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Updated: 08 जून, 2021 09:46 PM
अनुज शुक्ला
अनुज शुक्ला
  @anuj4media
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क्या रेप आरोपी के साथ सिर्फ इस वजह से हमदर्दी बनाई जा सकती है कि उसके ऊपर एक अकेली बीमार और बूढ़ी मां की देखभाल का बोझ है? अगर इस तरह के मानवीय आधार पर किसी आरोपी के लिए हमदर्दी दिखाई जाए तो शायद दुनिया के हर गुनहगार को जेल की सलाखों से बाहर निकालना पड़ जाएगा. लगभग हर आरोपी या अपराधी जिम्मेदारियों से परे तो नहीं होता. वैसे भी कानूनन ये कोई तर्क नहीं है. बावजूद हमारी टीवी इंडस्ट्री में कुछ टॉप सेलेब मासूम बच्ची के साथ हुए बेहद घिनौने मामले में अपना फैसला सुना रहे हैं. पुलिस के निष्कर्षों पर अदालत कुछ कहे, उससे पहले ही रेप आरोपी को निर्दोष बताने की कहानी गढ़ी जा रही है. टीवी एक्टर पर्ल वी पुरी के मामले में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है.

पर्ल के ऊपर बेपनाह प्यार के सेट पर एक नाबालिग बच्ची से रेप का घिनौना आरोप लगा है. टीवी इंडस्ट्री का ये सनसनीखेज मामला 2019 का है. बच्ची की उम्र इस वक्त 7 साल है. पिछले हफ्ते गिरफ्तार पर्ल पुलिस कस्टडी में है. लेकिन गिरफ्तारी के बाद पर्ल के पक्ष में आए बहुत से सितारों ने रेप विक्टिम की ना सिर्फ पहचान खोली और बल्कि उनकी गतिविधियां विक्टिम के परिवार को ही गलत साबित कर रही हैं. जबकि विक्टिम की मां भी एक्ट्रेस है. पुलिस में शिकायत विक्टिम के पिता ने दर्ज कराई है. उसका पत्नी से कथित अनबन है.

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विक्टिम की मां ने इस बारे में सोशल मीडिया पर लिखा भी था. अभिनेत्री दिव्या खोसला कुमार ने ना सिर्फ कानूनी नियमों की धज्जियां उड़ाई बल्कि बेहूदगी का प्रदर्शन भी किया. नियम कहते हैं कि किसी भी सूरत में माध्यमों के जरिए रेप विक्टिम की पहचान उजागर नहीं की जा सकती. लेकिन पर्ल के साथ प्रोजेक्ट कर चुकी दिव्या ने विक्टिम के पेरेंट्स की फोटो साझा की और कई आरोपों के बहाने उन्हें ही गलत साबित करने पर तुली नजर आती हैं. दिव्या ने लिखा- पति-पत्नी के आपसी झगड़े में एक बेगुनाह को फंसाया जा रहा है. बच्ची की मां को सब पता है लेकिन शर्मनाक है कि वो सामने नहीं आ रही. इस मामले में दो साल पहले अनाम केस दर्ज हुआ था. मैंने खुद एफआईआर पढ़ी है.

विक्टिम की मां ने सोशल मीडिया पर इस बात की आलोचना भी की है कि क़ानून की धज्जियां उड़ाते हुए सार्वजनिक रूप से उनकी बेटी और उनका मजाक उड़ाया जा रहा है. वाजिब नाराजगी जाहिर करते हुए उन्होंने लिखा- मेरी चुप्पी को मेरी कमजोरी नहीं समझना चाहिए. मैं चुप इसलिए थी क्योंकि मामले में मैंने शिकायत नहीं की थी. इस पोस्ट पर दिव्या ने बेमतलब का तर्क प्रस्तुत किया और लिखा- हाल ही में पर्ल के पिता का निधन हुआ है. उनकी मां भी कैंसर से ग्रस्त हैं. कोई उनकी मदद करने वाला नहीं है. वे बार-बार मुझे कॉल कर रही हैं. पर्ल सलाखों के पीछे है. हाईकोर्ट छुट्टियों की वजह से बंद है. ऐसे में उसकी मां को कुछ हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा?

यहां तक कि पिछले दिनों टीवी क्वीन एकता कपूर ने भी विक्टिम की मां के साथ निजी बातचीत का ऑडियो साझा कर पर्ल का बचाव किया था. कुछ तो ये भी दुहाई दे रहे कि सेट पर पर्ल महिलाओं की बहुत इज्जत करता है और कभी कोई शिकायत नहीं मिली. जबकि मामले पर मुंबई पुलिस के डीसीपी संजय कुमार पाटिल कह चुके हैं कि पर्ल पर लगे आरोप गलत नहीं हैं. उनके पास ठोस सबूत हैं.

पहली बात ये कि पर्ल के बचाव में तर्क दे रहे लोगों को अपराध के मनोविज्ञान की कोई समझ नहीं है. दूसरी और जरूरी बात ये कि रेप और उत्पीडन जैसे संवेदनशील मामले में सितारों की हरकतें सरासर क़ानून का माखौल हैं. अब नामधारी सितारों को कौन समझाए कि अगर बच्ची घटना के दो साल बाद आरोपी की पहचान कर रही है तो इस बिना पर ही आरोपी को निर्दोष नहीं कहा जा सकता. क्या ये जरूरी है कि हमउम्र या वरिष्ठ महिलाओं के साथ शालीनता से रहने वाला कोई शख्स किसी बच्ची के साथ भी वैसा ही रहे. यह भी तो हो सकता है कि आरोपी चाइल्ड अब्यूज को लेकर किसी मानसिक बीमारी से ही ग्रस्त हो और मासूम बच्चों को ही शिकार बनाता हो.

divya-650_060821070123.jpgदिव्या और पर्ल.

चलिए ठीक है कि पर्ल पर लगे आरोप जैसा कि सेलेब्स बता रहे हैं गलत ही हों. लेकिन मामला दर्ज होने के बाद तो यह तय करने का काम कोर्ट का है ना कि आरोपी के हमदर्दों का. पर्ल अपनी लीगल टीम के जरिए कोर्ट में बेगुनाही साबित करें. यह बात भी ठीक है कि बूढ़ी मां को सजा क्यों? लेकिन कानूनी प्रक्रिया की अपनी पेंचीदगी होती है. ऐसे में दिव्या जैसे सितारे जो पर्ल के लिए संवेदनाएं दिखा रही हैं और उनकी बीमार बूढ़ी मां को लेकर बहुत परेशान हैं, कायदे से उन्हें बेहूदगी का प्रदर्शन करने की बजाय इस वक्त पर्ल की मां को मजबूत सहारा देना चाहिए. ऐसा नहीं है कि किसी करीबी के परिवार को मुश्किल वक्त में सपोर्ट नहीं किया जा सकता. साथ ही यह कोर्ट में आरोपी एक्टर के लिए लीगल बैटिंग करना चाहिए. एकता कपूर और दिव्या खोसला को कौन बताए कि रेप और दूसरे अपराधों से जुड़े अनगिनत मामलों में आरोपियों का कोई आपराधिक अतीत नहीं रहा है.

पर्ल का सपोर्ट करने वाले सितारों को नहीं भूलना चाहिए कि जो कुछ हुआ है वो सिर्फ इंडस्ट्री ही नहीं पूरे समाज पर धब्बे की तरह है. एकता कपूर और दिव्या अगर वाकई पर्ल की हमदर्द हैं तो उन्हें कानूनी संभावनाओं में विकल्प तलाशने चाहिए. लेकिन अगर उनका मकसद ही सनसनीखेज मामले में घड़ियाली संवेदना दिखाकर सुर्खियां बटोरना है तो भी उन्हें इस बात का जरूर ध्यान रखना चाहिए कि जो हरकतें हुई हैं वो कानूनी पचड़े में उलझाने के लिए पर्याप्त हैं. क्योंकि रेप विक्टिम की पहचान उजागर करने की किसी भी कोशिश में बहुत सख्त सजा का प्रावधान है. सितारों को समझना चाहिए कि यौन उत्पीड़न जैसे मुद्दे पीआर स्टंटबाजी के लिए नहीं होते.

लेखक

अनुज शुक्ला अनुज शुक्ला @anuj4media

लेखक इंडिया टुडे ग्रुप डिजिटल से जुड़े हैं.

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