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Updated: 21 जून, 2022 03:39 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स यानी एमसीयू की हर सुपरहीरो फिल्म से लेकर टेलीविजन या वेब सीरीज को लेकर दुनियाभर के दर्शकों में गजब का क्रेज रहता है. लेकिन, मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स का हालिया वेब सीरीज 'मिस मार्वल' दर्शकों को अपनी ओर खींचने में नाकामयाब रही है. जबकि, 'मिस मार्वल' वेब सीरीज को रिलीज से पहले काफी अच्छे रिव्यू मिले थे. फोर्ब्स में छपी एक रिपोर्ट के आधार पर 'मिस मार्वल' वेब सीरीज को केवल 7.75 लाख दर्शकों ने ही पहले 5 दिनों में देखा है. जबकि, मार्वल यूनिवर्स की सबसे कमजोर कड़ी मानी जा रही 'हॉकआई' को भी 1.5 मिलियन व्यूअर्स मिले थे. डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई 'मिस मार्वल' के अब तक दो एपिसोड आ चुके हैं. लेकिन, इन दो एपिसोड में ही एमसीयू फैंस को 'मिस मार्वल' ने निराशा से भर दिया है. सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर एमसीयू फैंस क्यों 'मिस मार्वल' वेब सीरीज को पसंद नहीं कर पा रहे हैं? आइए इसकी वजहों पर एक नजर डालते हैं...

Ms Marvel why the audience is not able to like the web series'मिस मार्वल' यानी कमाला खान में कॉस्मिक शक्तियों आने की कहानी टीनएजर्स को पसंद आएगी.

नए सुपरहीरो का किरदार नहीं पैदा कर पाया दिलचस्पी

'मिस मार्वल' यानी कमाला खान एमसीयू की नई हीरो हैं. इस बात में कोई दो राय नही है कि एमसीयू ने बीते कुछ सालों में महिलाओं को ताकतवर सुपरहीरो के तौर पर पेश किया है. मार्वल यूनिवर्स की सुपरहीरो सीरीज की अगली फिल्म 'थॉर: लव एंड थंडर' में भी माईटी थॉर के महिला किरदार को लेकर एमसीयू फैंस में गजब का उत्साह नजर आ रहा है. इससे पहले वांडा मैक्सिमॉफ और कैप्टन मार्वल जैसे बेहतरीन किरदारों को भी काफी पसंद किया जा चुका है. लेकिन, 'मिस मार्वल' एमसीयू फैंस के बीच उस क्रेज को छूने में नाकाम रही है. क्योंकि, 'मिस मार्वल' यानी कमाला खान का किरदार पूरी तरह से एक नये कैरेक्टर को ध्यान में रखकर गढ़ा गया है.

फैन को सुपरहीरो बनाने की कमजोर कहानी

'मिस मार्वल' यानी कमाला खान की कहानी 'कैप्टन मार्वल' की एक टीनएजर फैन में कॉस्मिक शक्तियों के आने की कहानी भर है. इसके साथ किसी सुपरहीरो कैरेक्टर का सीधा जुड़ाव नहीं है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो एक सुपरहीरो फैन को एक कॉस्मिक शक्तियों से भरे कड़े के जरिये सुपर पॉवर्स देने की कहानी लोगों को खुद से जोड़ने में कामयाब नहीं हो पाई है. हालांकि, इस बात की संभावना है कि आने वाले एपिसोड्स में जब कमाला खान का कैरेक्टर अपनी शक्तियों के साथ धूम मचाएगा. तो, दर्शक इससे जुड़ सकते हैं. लेकिन, 'मिस मार्वल' यानी कमाला खान के किरदार को पूरी तरह से टीनएजर्स को ध्यान में रखते हुए गढ़ा गया है. तो, एमसीयू फैंस के सभी दर्शकों का इससे खुद को कनेक्ट करना मुश्किल भरा होने वाला है.

'मिस मार्वल' को कमाला खान ने बनाया 'सुस्त'

'मिस मार्वल' में कमाला खान का किरदार निभाने वाली पाकिस्तानी-कनाडाई एक्टर इमान वेल्लानी का नया चेहरा वेब सीरीज के लिए अच्छा कहा जा सकता है. इमान वेल्लानी ने अपनी एक्टिंग से कमाला खान के किरदार में जान डाल दी है. लेकिन, कितनों लोगों ने आज से पहले इमान वेल्लानी के चेहरे को किसी ऐसी बड़ी फिल्म में देखा गया था. जो वर्ल्डवाइड रिलीज हुई हो. आसान शब्दों में कहा जाए, तो एक नई एक्टर के तौर पर इमान वेल्लानी का चेहरा दर्शकों के बीच अपनी छाप छोड़ने में नाकाम रहा. जबकि, हैरी पॉटर फ्रेंचाइज में एमा वॉटसन पहली ही फिल्म से लोगों की नजरों में आ गई थीं.

'मिस मार्वल' और 'सी हल्क' में जमीन-आसमान का अंतर

मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स की एक और वेब सीरीज 'शी हल्क: अटॉर्नी एट लॉ' इसी साल अगस्त महीने में रिलीज होने वाली है. इस वेब सीरीज को लेकर एमसीयू फैंस में अभी से क्रेज बन गया है. क्योंकि, इसके ट्रेलर में हल्क के किरदार को गेस्ट अपीरियंस के तौर पर दिखाया गया है. लेकिन, 'मिस मार्वल' वेब सीरीज की बात करें, तो इसके ट्रेलर में एक टीनएजर लड़की की जिंदगी से जुड़ी जद्दोजहद को दिखाने के लिए कहानी में इतना घालमेल कर दिया गया है कि यह सबके लिए देखने लायक नहीं कही जा सकती है.

क्या मुस्लिम कैरेक्टर और रंगभेद की शिकार हुई कमाला खान?

'मिस मार्वल' यानी कमाला खान का एक मुस्लिम परिवार से होना भी 'मिस मार्वल' के लिए कहीं न कहीं नुकसान पहुंचाने वाला रहा है. क्योंकि, इसमें हिजाब, दाढ़ी जैसे मामलों पर भी इस्लामी ज्ञान दिया गया है. जो एक बड़े दर्शक वर्ग को खुद से जोड़ने की वजह नहीं देता है. अमेरिका के न्यूजर्सी में रहने वाला पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम परिवार अगर लंबे समय से वहां रहने के बाद भी अपनी पुरानी सोच में बदलाव नहीं ला पाया है. तो, यह 'मिस मार्वल' की कहानी लिखने वाली की सबसे बड़ी गलती रही है. या फिर ऐसा कहा जा सकता है कि एमसीयू को इसे मिडिल ईस्ट और एशियन दर्शकों के लिए स्पेशली बनाई गई वेब सीरीज के तौर प्रचारित करना चाहिए था. क्योंकि, एमसीयू की अब तक आई वेब सीरीज या फिल्मों में धर्म को इतना ज्यादा एक्सपोजर नहीं दिया जाता था.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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