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Updated: 05 अक्टूबर, 2016 09:06 PM
संतोष चौबे
संतोष चौबे
  @SantoshChaubeyy
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गूगल ने अपना पिक्सेल स्मार्टफोन लांच किया. इस रेंज के तहत गूगल ने दो वैरिएंट्स, पिक्सेल और पिक्सेल एक्सएल, बाजार में उतारे हैं. इस स्मार्टफोन की यूएस, यूके, जर्मनी, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में प्री-आर्डर बुकिंग शुरू हो चुकी है जबकि भारत में ये स्मार्टफोन 13 अक्टूबर से प्री-आर्डर के लिए उपलब्ध होगा.

स्मार्टफोन हार्डवेयर में गूगल की तरफ से एप्पल के आईफोन के लिए पिक्सेल पहली गंभीर चुनौती साबित हो सकता है. गूगल ने खुद ही पिक्सेल का डिजाइन और उत्पादन किया है जबकि उसके पहले प्रयास मोटोरोला का अधिकरण और नेक्सस स्मार्टफोन्स की आउटसोर्सिंग, एंड्राइड के लिए एक्सपेरिमेंटल प्लेटफार्म थे. हम कह सकते हैं कि गूगल ने नेक्सस फ़ोन एंड्राइड को फाइन-ट्यून करने के लिए बाजार में उतारे थे और एप्पल के आईफोन से उनकी सीधी प्रतिस्पर्धा नहीं थी.

लेकिन गूगल भी भारत में वही गलती करने जा रहा है जो एप्पल ने किया है.

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एप्पल के आईफोन सहित अन्य उत्पादों की बिक्री तथा रेवेन्यू भारत में अभी भी उसके ग्लोबल परफॉरमेंस का केवल 1 फीसदी है जबकि एप्पल को भारतीय बाजार में उतरे लंबा समय हो चुका है.

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 गूगल स्मार्टफोन लांच

वजह एप्पल की प्राइसिंग रेंज है जो भारत जैसे प्राइस-सेंसिटिव बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठती. भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाले हाई-एन्ड स्मार्टफोन 50,000-60,000 रुपये की रेंज में आते हैं जबकि अगर हम ओवरआल देखें तो 10,000 से 30,000 रुपये में आने वाले स्मार्टफोन सबसे ज्यादा बिकते हैं. लेकिन आईफोन की तो शुरुआत ही 60,000 रुपये से होती है और 92,000 तक जाती है.

ये उस देश में है जहाँ की पर-कैपिटा इनकम 2015-16 में 7774 रुपये थी.

अब जबकि आईफोन की बिक्री के मुख्य बाज़ारों में गिरावट या स्थिरता आनी शुरू हो गयी है, तो एप्पल को भारत के बाजार की जरूरत है. लेकिन इस प्राइस-रेंज के साथ एप्पल कभी भी भारत में सफल नहीं हो सकता. एप्पल अभी भी आईफोन के दाम भारत में ज्यादा ही रखना चाहता है. ऐसा करके एप्पल अपने सबसे महंगे और विशिष्ट ब्रांड की छवि तो बचा सकता है लेकिन भारत में बिज़नेस के हिसाब से बड़ा कभी नहीं बन सकता. सो ऐसा एप्पल का मैनेजमेंट क्यों कर रहा है ये तो वही जाने.

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और अब गूगल भी यही गलती करने जा रहा है

गूगल पिक्सेल की रेंज भारत में 57,000 रुपये से शुरू होती है और 76,000 रुपये तक जाती है. इस प्राइस-रेंज पर तो हम यही उम्मीद कर सकते हैं की पिक्सेल भारत में दूसरा आईफोन बनकर रह जायेगा. जबकि एप्पल से ज्यादा गूगल के लिए भारतीय बाजार को क्रैक करना जरूरी है.

भारत के अलावा, अमेरिका, चीन और हर दूसरे बड़े बाजार में एप्पल सबसे बड़ा ब्रांड है और आईफोन सबसे ज्यादा प्रॉफिट दर्ज करता है. ऐसे बाजार में गूगल को एप्पल के अलावा सैमसंग सहित और दूसरे स्थापित ब्रांडो का सामना करना पड़ेगा. जबकि भारत में एप्पल नहीं है. उस स्थिति में भारत गूगल के लिए बड़ा मौका साबित हो सकता है अपनी ब्रांड इक्विटी के बल पर भारतीय बाजार में पैठ बनाने के लिए.

गूगल सबसे मूल्यवान और मजबूत ब्रांडो में गिना जाता है और 97 फीसदी हिस्सेदारी के साथ इसके OS एंड्राइड का भारतीय बाजार में लगभग एकछत्र राज है. इसका सीधा मतलब है कि भारत में बिकने वाला लगभग हर स्मार्टफोन एंड्राइड ही प्रयोग करता है. लेकिन गूगल इस प्राइस-रेंज पर भारत में कभी भी सफल नहीं हो सकता.

कॉउंटरपॉइंट रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में हालाँकि 22 करोड़ स्मार्टफोन यूज़र्स हैं और भारत का बाजार अमेरिका को पीछे छोड़कर दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार बन गया है. आबादी के हिसाब से स्मार्टफोन की जनसंख्या में पहुंच यहां अभी भी 30 फीसदी से भी कम है. अगर हम ओवरआल मोबाइल सब्सक्रिप्शन बेस की बात करें तो भारत में ये आंकड़ा 1 बिलियन को पार कर चुका है.

चूंकि 17 फीसदी ग्रोथ रेट के साथ भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता स्मार्टफोन बाजार है और 2021 तक भारत में मोबाइल सब्सक्रिप्शन बेस के 1.4 बिलियन तक पहुंच जाने की सम्भावना है, ऐसे में एप्पल या गूगल या कोई अन्य कंपनी भारतीय बाजार को अपने ही जोखिम पर नज़रअंदाज़ कर सकती है.

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लेखक

संतोष चौबे संतोष चौबे @santoshchaubeyy

लेखक इंडिया टुडे टीवी में पत्रकार हैं।

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