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 |  5-मिनट में पढ़ें  |   09-02-2019
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हाल ही में एक ऐसी घटना हुई है जिसने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. जरा सोचिए किसी कंपनी का मालिक लोगों से करोड़ों रुपए का निवेश करवाए और फिर उस पैसे को बिना चाभी न खोली जा सकने वाली तिजोरी में रख चाभी कहीं खो दे तो क्या होगा. चौंक गए? दरअसल, ऐसा असल में हुआ है.

जयपुर में एक कंपनी के सीईओ Gerald Cotten किसी काम से आए थे. कॉटन क्रिप्टोकरंसी फर्म QuadrigaCX के सीईओ थे. ये कनेडियन फर्म लोगों से पैसे लेकर क्रिप्टोकरंसी में डीलिंग करती थी. फर्म ने 145 मिलियन डॉलर (लगभग 1000 करोड़ रुपए) क्रिप्टोकरंसी के तौर पर रखे थे. क्योंकि क्रिप्टोकरंसी की डीलिंग करना इतना पेचीदा होता है इसलिए इस करंसी को 'कोल्ड सेफ' (एक तरह का डिजिटल लॉकर) में रखा गया था. इसका पासवर्ड सिर्फ एक ही इंसान के पास था और वो थे Gerald Cotten. अब उनकी मृत्यु के साथ उस कोल्ड सेफ का पासवर्ड भी चला गया जिसमें 1000 करोड़ रुपए थे.

कॉटन जयपुर आए थे. वो जयपुर इसलिए आए थे क्योंकि उन्हें एक अनाथआश्रम बनवाना था. यहीं उनकी मृत्यु हो गई. उनके डेथ सर्टिफिकेट में लिखा है कि ये Crohn's disease के कारण हुआ. ये एक तरह की पाचन तंत्र की बीमारी है जो इंसान को बेहद कमजोर भी बना सकती है और कई गंभीर मामलों में जानलेवा भी साबित हो सकती है.

पासवर्ड, तकनीक, क्रिप्टोकरंसी, सुरक्षाGerald cotten की मृत्यु पर सवाल खड़े हो गए हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि अब निवेशकों के 1000 करोड़ रुपए का क्या होगा

कॉटन की पत्नी रॉबर्टसन ने कोर्ट में अर्जी डाली है कि उन्हें दीवालिया न घोषित किया जाए क्योंकि पासवर्ड तो उनके पास थे ही नहीं. कॉटन की पत्नी के अनुसार एक्सपर्ट्स को बुलाया गया है जिससे यूजर्स के पैसे वापस पाने का कोई तरीका मिल सके. रॉबर्टसन को न ही पासवर्ड के बारे में कुछ पता है और न ही Recovery Key के बारे में कुछ जानती हैं.

अब इस पूरे मामले से निवेशकों के बीच चिंता बनी हुई है. निवेशकों का कहना है कि हो सकता है कॉटन मरे ही न हों, बल्कि ये निवेशकों के पैसे हड़पने की चाल हो. दरअसल, पिछले कुछ समय से QuadrigaCX कंपनी से निवेशकों को अपने ही पैसे निकालने और क्रिप्टोकरंसी में काम करने में दिक्कत हो रही थी. न सिर्फ ये बल्कि इस कंपनी पर केस भी चल रहा था और दिसंबर में ही कंपनी ने निवेशकों को ये जानकारी दी थी कि अब सारी मुश्किलें खत्म हो गई हैं और निवेशक अपने पैसे का लेन-देन आसानी से कर सकते हैं.

इसके बाद लोगों को लगा कि थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन अब जो हालात बने हैं उससे निवेशकों का पूरा पैसा डूब सकता है. क्योंकि कॉटन की मौत बहुत विवादास्पद तरीके से हुई है इसलिए लोगों को लग रहा है कि ये सब कुछ महज पैसे लूटने का तरीका है. यहां तक कि Reditt पर लोग इसे लेकर चर्चा भी कर रहे हैं कि आखिर ये सब हुआ कैसे और क्या ऐसा हो सकता है कि वो जिंदा हों.

मृत्यु के 12 दिन पहले ही कॉटन ने एक वसीयत बनाई थी जिसमें अपना सब कुछ उन्होंने अपनी पत्नी के नाम कर दिया था और उसके बाद अचानक ऐसी खबर ने शक पैदा कर दिया है.

क्यों नहीं मिल सकता पासवर्ड?

क्रिप्टोकरंसी को कई लेवल सिक्योरिटी पर रखना होता है क्योंकि ये आसानी से हैक हो सकती है. कॉटन की कंपनी ने क्रिप्टोकरंसी को हॉट वॉलेट में रखा था जिसे इंटरनेट से एक्सेस किया जा सकता था और इसे निकालने के लिए कोल्ड वॉलेट का इस्तेमाल किया जाता था. ये कोल्ड वॉलेट यूएसबी की तरह कोई ड्राइव या डिवाइस होती है जिसे ऑफलाइन रखा जाता था ताकि इसे हैक न किया जा सके. इसे करंसी की सेफ्टी के लिए इस तरह से रखा जाता था.

इसके पहले भी कई फर्म्स ऐसी रही हैं जिन्होंने निवेशकों के पैसे डुबाए हैं, लेकिन ये पहली बार हुआ है जब निवेशकों के पैसे निकाले ही नहीं जा सकते हैं और पूरे पैसे निकाले ही नहीं जा सकते हैं.

पासवर्ड, तकनीक, क्रिप्टोकरंसी, सुरक्षापासवर्ड की सुरक्षा के लिए बहुत से तरीके बताए जाते हैं, लेकिन पासवर्ड की वसीयत के बारे में कोई चर्चा नहीं करता.

पासवर्ड खोने का ये मामला भले ही विवादित लग रहा हो, लेकिन सच तो ये है कि अपने पासवर्ड्स की सुरक्षा के लिए हम भी कुछ ऐसा ही करते हैं.

इंटरनेट पर एक गूगल सर्च कीजिए और ऐसे कई लिंक खुल जाएंगे जो ये बताते हों कि आप कैसे अच्छा पासवर्ड बनाएं जो हैकर की नजरों से बचा रहे-

1. पासवर्ड में शब्द, स्पेशल कैरेक्टर आदि सब लिखें

2. पासवर्ड ऐसा लिखें जो आसानी से पता नहीं लगाया जा सके.

3. पासवर्ड ऐसा बनाएं जो किसी अन्य अकाउंट से मेल नहीं खाता हो.

4. पासवर्ड बनाकर कहीं सेव न करें.

5. पासवर्ड और रिकवरी Key कहीं भी साथ न रखें.

6. पासवर्ड लंबा रखें.

वगैराह-वगैराह. जहां अमेजन, फ्लिपकार्ट, फेसबुक आदि का पासवर्ड रिकवर करना आसान होता है वहीं अगर बात करें फाइनेंशियल लॉकर या नेटबैंकिंग या म्यूचुअल फंड अकाउंट आदि की तो पासवर्ड रिकवरी बिलकुल आसान नहीं होती है. अगर क्रेडिट कार्ड का पिन तक खो जाए तो लेने के देने पड़ जाते हैं. ऐसे में वाकई मृत्यु के बाद कितना मुश्किल हो जाएगा किसी व्यक्ति के पासवर्ड का पता लगाना.

कॉटन वाला केस तो बेहद अजीब है क्योंकि वहां पासवर्ड की रिकवरी बहुत ही मुश्किल है और ऐसा हो सकता है कि कभी उनका पासवर्ड किसी को मिले ही नहीं, लेकिन ऐसे में ये सवाल कि पासवर्ड की वसीयत जरूरी है या नहीं ये अहम हो जाता है. अगर बहुत जरूरी पासवर्ड है तो वो अपने किसी विश्वस्नीय को बताना गलत नहीं होगा. कम से कम इससे आगे चलकर इन सब मामलों में परेशानी से तो बच जाएंगे.

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