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Updated: 04 जनवरी, 2016 11:03 AM
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क्रिकेट के मैदान पर भले ही असली मैच खिलाड़ी खेलते हों लेकिन मैदान के बाहर भारतीय क्रिकेट को चलाने वाली संस्था बीसीसीआई का खेल देश के जाने-माने राजनीतिज्ञ और बिजनेसमैन खेलते हैं. बीसीसीआई के कुल 27 सदस्यों में से आधे से ज्यादा की कमान किसी न किसी ताकतवर पॉलिटिशन के हाथों में हैं.

ऐसा नहीं है कि ऐसा सिर्फ सोने का अंडा देने वाले खेल क्रिकेट के साथ है बल्कि हॉकी, फुटबॉल, जूडो, बॉक्सिंग, बैडमिंटन जैसे खेलों में भी दिग्गज और घाघ पॉलिटिशन ने लंबे समय से अपना वर्चस्व कायम कर रखा है. इन पॉलिटिशियन की लंबे समय से मौजूदगी की वजह से ही भले ही भारत इन खेलों में बहुत अच्छा प्रदर्शन न कर रहा हो और इन खेलों की हालत लगातार खराब होती चली गई हो लेकिन इनकों चलाने वाली संस्थाओं में इनका रुतबा और ताकत कायम रही है.

ऐसे में जस्टिस लोढ़ा कमिटी क्रिकेट प्रशासन में सुधार के लिए सुप्रीम कोर्ट से जो सिफारिश करने जा रही है उससे देश में क्रिकेट को चलाने वाली संस्था बीसीसीआई में आमूल-चूल बदलाव होने की उम्मीदें जगी हैं. दरअसल लोढ़ा कमिटी ने बोर्ड के कामकाज से क्रिकेट न खेलने वाले लोगों को अलग करने और इसकी बागडोर पूर्व क्रिकेटरों को सौंपे जाने की सिफारिश की है. इससे न सिर्फ बीसीसीआई लंबे समय से कब्जा जमाकर बैठे पॉलिटिशयन की जकड़ से मुक्त होगा बल्कि खिलाड़ियों के हाथों में बोर्ड की बागडोर आने से क्रिकेट की कहीं ज्यादा भलाई भी हो सकेगी. क्यों लोढ़ा कमिटी की सिफारिशों को न सिर्फ बीसीसीआई में बल्कि देश के बाकी खेल संस्थानों में भी लागू किए जाने की जरूरत है, आइए जानें.

बीसीसीआई की पिच पर नेताओं की बैटिंग क्यों:

इस देश में क्रिकेट प्रशासन की देखरेख और क्रिकेट के भविष्य का जिम्मा उन लोगों के हाथों में हैं जिन्होंने खुद कभी हाथ में बैट तक नहीं पकड़ा. यानी बहुत संभव है कि भारत में क्रिकेट बोर्ड के प्रमुख के पदों पर बैठे वे नेता टीम और खिलाड़ियों का भविष्य तय करते हैं जिन्हें खेल के बारे में खुद कुछ पता नहीं होता. न सिर्फ बीसीसीआई बल्कि देश भर के क्रिकेट बोर्डों के शीर्ष पद पर नेताओं का कब्जा है. खास बात ये है कि खेल प्रशासक बनने में बीजेपी हो या कांग्रेस या कोई अन्य पार्टी सभी के नेता आगे नजर आते हैं. आइए देखें.

1. अमित शाहः बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह जून 2014 में नरेंद्र मोदी के पीएम बनने के बाद गुजरात क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष बने थे. इससे पहले 2009 से लेकर पीएम बनने तक यह कमान खुद मोदी के हाथों में थी.

2. शरद पवार: एनसीपी प्रमुख शरद पवार बीसीसीआई और आईसीसी के भी अध्यक्ष रह चुके हैं और इस साल जून में वह फिर से मुंबई क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष पद पर काबिज हुए हैं.

3.फारूख अब्दुल्ला: जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारूख अब्दुल्ला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के अध्यक्ष हैं.

4. ज्योतिरादित्य सिंधियाः कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य को मध्य प्रदेश क्रिकेट असोसिएशन के चेयरमैन हैं. उन्हें यह कमान विरासत में मिली हैं, उनसे पहले उनके पिता माधवराव सिंधिया भी इस असोसिएशन के चेयरमैन रह चुके हैं. इतना ही नहीं ज्योतिरादित्य बीसीसीआई की वित्त कमेटी के प्रमुख भी हैं.

5. राजीव शुक्ला: राजीव शुक्ला ने राजनीति से ज्यादा झंडे क्रिकेट प्रशासक के तौर पर गाड़े हैं. वह तीन बार बीसीसीआई के उपाध्यक्ष रह चुके हैं, आईपीएल के चेयरमैन हैं और साथ ही उत्तर प्रदेश क्रिकेट असोसिएशन के सचिव भी हैं.

6. अरुण जेटली: डीडीसीए में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप झेल रहे जेटली 1999 से 2013 तक डीडीसीए के अध्यक्ष रहे हैं.

7. अनुराग ठाकुर: बीजेपी की यूथ विंग के अध्यक्ष और सांसद अनुराग ठाकुर हिमाचल प्रदेश क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष होने के साथ-साथ बीसीसीआई के सचिव भी हैं.

8. अमिताभ चौधरी: पूर्व आईपीएस ऑफिसर और 2014 में बीजेपी से जुड़ने वाले अमिताभ चौधरी के हाथों में झारखंड क्रिकेट असोसिएशन की कमान है. वह पिछला लोकसभा चुनाव हार चुके हैं.

9. अमीन पठान: आरसीए की सत्ता बीजेपी के राज्य अल्पसंख्य आयोग के प्रमुख अमीन पठान और आईपीएल के पूर्व चेयरमैन रहे ललित मोदी के गुटों के बीच बंटी रही है. फिलहाल ललित मोदी आरसीए चीफ हैं.

10. रंजीब बिस्वाल: बिस्वाल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद हैं और दिवंगत कांग्रेस नेता बसंत बिस्वाल के बेटे हैं.

11.समरजितसिन गायकवाड़ः वडोदरा के महाराजा समरजित बड़ौदा क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष हैं, उन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त है.

12. शेकर सालकर: इस वर्ष तक गोवा क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष रहे सालकर को रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर का करीबी माना जाता है.

13. गोकाराजू गंगा राजू: बीजेपी सासंद गोकाराजू आंध्र प्रदेश क्रिकेट असोसिएशन के सचिव हैं.

14. अनिरुद्ध चौधरीः हरियाणा क्रिकेट असोसिशएन की कमान अनिरुद्ध के हाथों में हैं. वह राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री बंसी लाल के पोते और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष रनबीर महिंद्रा के बेटे हैं.

15. लालू प्रसाद यादवः बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव पिछले 15 वर्षों से बिहार क्रिकेट असोसिएशन के अध्यक्ष हैं. हालांकि बिहार बीसीसीआई का असोसिएट सदस्य है, पूर्ण सदस्य नहीं और राज्य की अपनी रणजी टीम तक नहीं है.

देश के बाकी खेल संघों पर भी हावी रहे हैं नेताः

1. विजय कुमार मल्होत्रा (बीजेपी नेता): 42 वर्षों से आर्चरी असोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष.

2. प्रिय रंजन दासुमंशी (कांग्रेस): 20 वर्षों तक ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन के अध्यक्ष. 2008 में कोमा में जाने के बाद एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कमान संभाली.

3. जगदीश टाइटलर (कांग्रेस): 27 वर्षों तक जूडो फेडरेशन ऑफ इंडिया की कमान संभाली.

4. सुरेश कलमाड़ी (कांग्रेस): 16 वर्षों तक भारतीय ओलिंपिक असोसिएशन की कमान संभालने वाले कलमाड़ी 2010 के कॉमनवेल्थ घोटालों के कारण जेल जा चुके हैं.

5. अजय और अभय सिंह चौटाला (इंडियन नेशनल लोकदल): ये दोनों कई खेल संघों के प्रमुख रहे हैं. अभय चौटाला इंडियन बॉक्सिंग असोसिएशन के चीफ रहे हैं. इसकी कमान अब उनके ही रिश्तेदार और बीजेपी सांसद अभिषेक मटोरिया के हाथों में हैं. वहीं उनके बड़े भाई अजय चौटाला टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष हैं.

6. यशवंत सिन्हा (बीजेपी): यशवंत सिन्हा 12 वर्षों तक ऑल इंडिया टेनिस असोसिएशन के अध्यक्ष रहे हैं.

7. विद्या स्टोक्स (कांग्रेस): वह 1984 से लेकर 2010 तक 26 वर्षों तक महिला हॉकी संघ की अध्यक्ष थीं. 2010 में तो वह हॉकी इंडिया की भी अध्यक्ष बनी थीं.

8. एन रामचंद्रन (एमडीएमके): वह भारतीय ओलिंपिक असोसिएशन और वर्ल्ड स्क्वॉश फेडरेशन के अध्यक्ष, भारतीय ट्राइथलॉन फेडरेशन के उपाध्यक्ष (उनकी पत्नी इसकी अध्यक्ष हैं), तमिलनाडु साइक्लिंग असोसिएशन के अध्यक्ष, तमिलनाडु स्कवॉश रैक्ट्स असोसिएशन के अध्यक्ष और तमिलनाडु ओलिंपिक असोसिएशन के उपाध्यक्ष हैं. अब ये भी जान लीजिए कि वह आईपीएल विवादों में घिरे रहे बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन के छोटे भाई हैं.

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