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Updated: 31 अक्टूबर, 2015 06:47 PM
अभिषेक पाण्डेय
अभिषेक पाण्डेय
  @Abhishek.Journo
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1. संता: यार उठ भूकंप आ रहा है, सारा घर हिल रहा है.

बंता: सो जा, सो जा, घर गिरेगा, तो मकान मालिक का, हम तो किराएदार हैं..

2. संता अपनी गर्लफ्रेंड के साथ पहली डेट परः ये मेरी पहली डेट है डार्लिंग! अगर कोई गलती हो जाए या कमी रह जाए तो छोटा भाई समझ के माफ कर देना.

3. सरदारः यार ये 'सेंट मैसेज' क्या होता है?

दूसरा सरदारः घोंचू, बेवकूफ, तूने ही सरदारों का नाम खराब किया है, सेंट मैसेज मतलब 'खुशबू वाले मैसेज.'

इन जोक्स को पढ़कर आप हंसे होंगे, निश्चित ही यह भी सोचा होगा कि संता-बंता कितने मूर्ख हैं. आपत्तिजनक उनका मूर्ख होना नहीं, उनका किरदार सिख होना है. और इसीलिए इन जोक्स को सिख भावनाओं को आहत करने वाला बताया गया है.

वर्षों से लोगों को हंसाते आए संता-बंता के जोक्स के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में इन्हें बंद करने के लिए सिख वकील हरविंदर चौधरी ने एक याचिका दायर की है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि अब बहुत हुआ और संता-बंता के जोक्स के नाम पर सिख समुदाय का मजाक उड़ाने और उनकी भावनाओं को आहत करना बंद किया जाना चाहिए.

कोर्ट ने उनकी याचिका सुनवाई के लिए स्वीकार कर ली है. हरविंदर ने कहा कि इन जोक्स की वजह से उन्हें विदेश में अपमानित होना पड़ा. उनका कहना था कि इन जोक्स के जरिए सिख समुदाय का मजाक उड़ाया जाता है और यह नागरिकों के समानता के अधिकारों का उल्लंघन हैं.

हालांकि कोर्ट ने हरविंदर से कहा कि कई लोग ऐसे जोक्स को मजाक के तौर पर ही लेतें हैं और इसका बुरा नहीं मानते. अक्सर इन जोक्स को अपमान के लिए नहीं बल्कि मनोरंजन के लिए मजाकिया तौर पर प्रयोग किया जाता है. आप चाहती हैं कि ऐसे सभी जोक्स पर रोक लगनी चाहिए लेकिन हो सकता है कि सिख खुद ही इसका विरोध करें.

क्या जोक्स या मजाक उड़ाने की सीमा होनी चाहिए. ऐसे कई जोक्स हैं या मजाक धर्म, जाति या वर्ग विशेष की भावनाएं आहत करने वाले साबित होते हैं. न सिर्फ संता-बंता बल्कि, पति-पत्नी, टीचर-स्टूडेंट और इस तरह से किसी भी जाति या वर्ग विशेष को निशाना बनाने वाले जोक्स पर गौर कीजिए कहीं न कहीं किसी न किसी की भावना आहत हो ही रही होगी.

यकीन न आए तो कुछ ऐसे ही जोक्स के उदाहरण देखिए और खुद फैसला कीजिए कि इन पर आप हंसेगें या आपकी भावनाएं आहत होंगी?

पति-पत्नी के जोक्सः

1. पत्नीः आखिर औरत क्या-क्या संभाले? तुम को संभाले, तुम्हारे बच्चों को संभाले, तुम्हारे मां-बाप को संभाले, या तुम्हारा घर संभाले!

पतिः (बड़े सुकून से जवाब देता है) औरत सिर्फ अपनी जुबान संभाले बाकी सब अपने आप संभल जाएगा.

2. चाय की पत्ती और पति में क्या समानता होती है?

दोनों के नसीब में जलना और उबलना लिखा है और वो भी औरतों के हाथों.

(क्या पहले जोक में पत्नियों या महिलाओं की गरिमा को ठेस नहीं पहुंचाई गई हैं? और दूसरे जोक में पतियों के बारे में जो टिप्पणी है, क्या वह सामान्य मानी जा सकती है?)

टीचर-स्टूडेंट जोकः

1. टीचरः जो दूसरों को अपनी बात न समझा सके वो गधा होता है.

स्टूडेंटः सर, क्या मतलब मैं समझा नहीं...?

2. टीचरः तुम बड़े मुर्ख बालक हो, मै तुम्हारी उम्र मे अच्छी तरह किताब पढ़ लेता था.

स्टूडेंटः सर, आपको अच्छा टीचर मिल गया होगा?

(एक ऐसी संस्कृति और ऐसे देश में जहां शिक्षक को पूज्य माना गया है, क्या उस पर ऐसे हास्य को स्वीकार किया जा सकता है?)

पंडित पर जोक्सः

1. दो पंडितों में लड़ाई हो रही थी, उन्हें लड़ते बहुत देर हो गई,

तीसरा पंडितः क्या हुआ क्यों लड़ाई कर रहे हो?

एक पंडित बोलाः जब मैं लहसुन, प्याज नहीं खाता, तो इसने चिकन में डलवाया क्यों?

(यहां तो पंडितों के शाकाहार को ही सवालों के कठघरे में ला दिया गया है.)

सिंधी और मारवाड़ी जोक्सः

1. मारवाड़ी 14वीं मंजिल से नीचे गिरा. गिरते वक्त उसने अपने घर की खिड़की से देखा कि वीबी खाना बना रही है.

मारवाड़ी चिल्लायाः मेरी रोटी मत पकाना !

2. एक मारवाड़ी का एक्सीडेंट हो गया.

डॉक्टर बोला: टांके लगाने पड़ेंगे.

मारवाड़ी: कितने पैसे लगेंगे?

डॉक्टर: 2000 रुपया लगेगा.

मारवाड़ी: अरे! भैया ....टांका लगाना है...एम्ब्रोडरी थोड़ी न करनी है.

(मारवाड़ियों को हर जोक्स में कंजूस क्यों बता दिया जाता है?)

मुस्लिमों पर जोकः

लड़की: अरे ओ भाईजान! जरा सुनिए तो मेरी बात...

लड़का: पहले तय करो मैं भाई हूं या जान?

(जिस अदब को मुस्लिमों की पहचान माना जाता है, उसका भी मजाक?)

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लेखक

अभिषेक पाण्डेय अभिषेक पाण्डेय @abhishek.journo

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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