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Updated: 12 अगस्त, 2022 09:01 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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2020 में दुनिया की दहलीज पर दस्तक देने वाले कोरोना का खौफ अभी लोगों के दिलों से कम भी नहीं हुआ है. ऐसे में दो वायरस और सिर आ खड़े हुए हैं. एक इंसानों के लिए खतरा है. जबकि दूसरा गौवंश को तड़प कर मरने पर मजबूर कर रहा है. पहले जिक्र उस वायरस का जो चीन से ही निकला है और जिसके सामने  पुनः इंसान बेबस और लाचार नजर आ रहा है. जी हां हम बात कर रहे हैं हेनिपावायरस या लांग्या वायरस की. कोरोना की ही तर्ज पर जानवरों से इंसान में फैले इस वायरस से चीन जैसा शक्तिशाली राष्ट्र भी दहशत में है. वायरस को लेकर यदि चीनी मीडिया की मानें तो इस वायरस के चलते चीन के शेडोंग और हेनान प्रांत में अब तक 35 लोग संक्रमित हो चुके हैं. यूं तो इस वायरस से अभी तक किसी की मौत की खबर नहीं है. मगर डॉक्टर्स इसे एक खतरनाक वायरस की संज्ञा दे रहे हैं. तर्क दिए जा रहे हैं कि यदि वायरस बिगड़ गया तो इंसान को मौत के घाट उतार सकता है.

Langya Virus, Lumpy Virus, Corona Virus, Covid, Disease, China, Animals, Cow, Deathचाहे  लांग्या हो या लंपी दो अलग-अलग वायरस ने भारतीयों को चिंता में डाल दिया है

वायरस पूर्वी चीन में ज्वर के रोगियों के गले के स्वाब के नमूनों में पाया गया है. रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि वायरस के शुरुआती रोगी मुख्य रूप से किसान हैं, जिन्होंने थकान, खांसी, भूख न लगना और दर्द की सूचना दी है. वहीं कुछ मामलों में रक्त-कोशिका में असमानता के साथ साथ लिवर और किडनी डैमेज भी देखा गया है.

आखिर क्या है लांग्या वायरस ?

ज़ूनोसिस नामक एक प्रक्रिया में पुष्टि हुई है कि वायरस जानवरों से इंसानों में आया है. वैज्ञानिकों ने 200 से अधिक छछूंदरों के LayV viral RNA में पाया कि जानवर ही इनका प्राकृतिक भंडार हैं. वहीं द गार्जियन की मानें तो 2 प्रतिशत घरेलू बकरियों और 5 प्रतिशत कुत्तों में भी वायरस का पता चला है. 

गुजरे हुए हफ्ते में वैज्ञानिकों ने एक पेपर में उल्लेख किया था कि,'चीन में जांचकर्ताओं ने एक ज्वरनाशक मानव बीमारी से जुड़े एक नए हेनिपावायरस की पहचान की है. यह वायरस छछूंदरों में भी पाया गया था.  पेपर न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (एनईजेएम) में प्रकाशित हुआ है. वायरस को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है और एक बार फिर लोगों के बीच दहशत फैल गयी है.

वायरस को लेकर शोधकर्ताओं  का कहना है कि वायरस जानवरों और मनुष्यों में गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है जिसमें मृत्यु दर  40-75 प्रतिशत के आसपास है. वायरस खतरनाक है और इससे भी कोरोना की ही तर्ज पर सावधान रहने की जरूरत है. 

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ इंसानों को ही वायरस से सावधान रहना है. क्योंकि अलग अलग वायरस से इंसानों से ज्यादा खतरा जानवरों के लिए है हमें उन्हें भी बचाना है. जानवरों में खतरे का लेवल क्या है? इसे हम उन गौवंशों की मौत से समझ सकते हैं जो खौफनाक 'लंपी' वायरस की भेंट चढ़े हैं. मंकी पॉक्स के बाद पाकिस्तान की तरफ से भारत पहुंचे  'लंपी' वायरस' ने भारतीयों के सामने इस मुश्किल वक़्त में चुनौतियों का पहाड़ खड़ा कर दिया है. चाहे वो पंजाब और राजस्थान हों या फिर गुजरात और उत्तर प्रदेश वायरस तेजी से अपने पैर पसार रहा है और गौवंशों को अपनी चपेट में ले रहा है.  

'लंपी' वायरस को लेकर जो जानकारी अब तक सामने आई है, उसके अनुसार देश भर में अब तक 4000 से ऊपर जानवर अपनी जान गंवा चुके हैं. सिर्फ गुजरात और राजस्थान में 3000 गौवंशों की मौत लंपी से हुई है जबकि 400 गाय और भैंस पंजाब में इस बीमारी की चपेट में आने के कारण मरे हैं.  

मॉनसून इस बीमारी की एक बड़ी वजह बना है और एक्सपर्ट्स इस बात को लेकर एकमत हैं कि इस बीमारी से जानवरों को तभी बचाया जा सकता है जब उनका सामूहिक टीकाकरण कराया जाए. क्योंकि इस वायरस के प्रसार के लिए मच्छरों को जिम्मेदार माना जा रहा है इसलिए किसानों को सुझाव यही दिया जा रहा है कि उनकी तरफ से हरसंभव प्रयास अपने जानवरों को मच्छरों की पहुंच से दूर रखना है. 

उपरोक्त बातों के बाद इस बीमारी के लक्षणों पर सवाल हो सकता है. बता दें कि लंपी की चपेट में आने वाले मवेशियों को बुखार आता है. मवेशी के पूरे शरीर में गांठ, नरम छाले पड़ जाते जाते हैं. मुंह से लार निकलती है और आंख-नाक से भी स्राव होता है. पशु चिकित्सकों के मुताबिक दुग्ध उत्पादन में कमी आना, मवेशी का ठीक से भोजन नहीं कर पाना भी इस बीमारी के लक्षण हैं. इस बीमारी की चपेट में आने पर मवेशी के लंगड़ापन, निमोनिया, गर्भपात और बांझपन का शिकार होने का खतरा बढ़ जाता है.

संक्रमण चूंकि मच्छर-मक्खी और चारे के साथ ही संक्रमित मवेशी के संपर्क में आने से होता है इसलिए कहा यही जा रहा है कि किसान अपने मवेशियों को आइसोलेट करें. बीमारी से बचाव के लिए जरूरी है कि साफ-सफाई का खास ध्यान रखा जाए और मवेशियों को किसी संक्रमित मवेशी के संपर्क में आने से बचाया जाए. फ़िलहाल बीमारी का कोई टीका उपलब्ध नहीं है इसलिए जानवरों को तभी बचाया जा सकता है जब छोटी छोटी बातों का ख्याल रखा जाए. 

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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