होम -> समाज

 |  2-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 22 मई, 2015 08:00 AM
न्यूजफ्लिक्स
न्यूजफ्लिक्स
  @newsflickshindi
  • Total Shares

बाल मजदूरी को लेकर कानून में बदलाव की बात चल रही है. केंद्र की मोदी सरकार अगर बाल मजदूरी कानून में नए संशोधन का प्रस्ताव लाती है तो आखिर क्या होगा देश के लाखों बच्चों का भविष्य? नजर डालिए यहां-

दो कदम पीछे सरकार

1_052215075354.jpg
 

नए संशोधन के मुताबिक स्कूल से पहले या बाद के समय, 14 साल तक के बच्चे अपने परिवार के साथ खेत, जंगल, घर और मनोरजंन के क्षेत्र में हाथ बंटा सकते हैं.

काम में पिसता बचपन

2_052215075407.jpg
 

अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वालों बच्चों के औसत पर अगर नजर डाली जाए तो उनकी तादाद कृ‌षि क्षेत्र में 69.5%, उद्योगों में 17.5% और सेवा क्षेत्र में 13% है. इसमें घरों में काम करने वाले 5 से 14 साल तक के बच्चे भी शामिल हैं.

दांव पर भविष्य

3_052215075419.jpg
 

अभी तक 14 साल तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा पाने का अधिकार है लेकिन इस संशोधन से शिक्षा के अधिकार पर नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा. सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में 63.5% लड़कियां बीच में ही स्कूली पढ़ाई छोड़ देती हैं. लड़कियों के स्कूल छोड़ने के पीछे सबसे बड़ा कारण घरेलू काम होता है.

गरीबी से घिरा भविष्य

4_052215075432.jpg
 

ज़्यादातर बाल मज़दूर बिना किसी कौशल, हाथ का काम सीखते हैं. इसी कारण जवानी तक उन्हें कम मज़दूरी या बेरोजगारी में ज़िंदगी बितानी पड़ती है. 2011 में युवाओं में "गैर-श्रमिकों" का अनुपात करीब 40% था. इनमें से 60.5% गैर श्रमिक घरेलू काम या दूसरों पर आश्रित थे. युवा वर्ग कहें तो इसमें 20 से 34 वर्ष के लोग शामिल हैं.

शोषण की दास्तां

5_052215075445.jpg
 

18 साल से कम उम्र के बच्चे बाल मज़दूरी कानून के तहत नहीं आएंगे तो इसका लाभ उठाकर मालिक, दुर्घटना के समय अपना पल्ला झाड़ सकता है. आमतौर पर मज़दूरी के लिए बच्चे पहली पसंद होते हैं क्योंकि वह सस्ते में उपलब्ध होते हैं. उद्योग क्षेत्र में एक बाल मजदूर 10 रुपए प्रति घंटा कमाता है. इस कानून का फायदा उठाकर कोई भी संस्था बाल "पारिवारिक व्यापार" के नाम पर बाल मज़दूरी को बढ़ावा दे सकती है.

लेखक

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय