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Updated: 09 दिसम्बर, 2017 03:48 PM
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टाइम मैगजीन ने अपने 2017 के पर्सन (लोग) ऑफ द इयर बता दिए हैं. टाइम मैगजीन का कवर हमेशा चर्चा का कारण होता है और इस बार भी वो बहुत खास है. इस बार टाइम मैगजीन के कवर में कुछ खास था.

टाइम पर्सन ऑफ द इयर इस बार उन लोगों को दिया गया जिन्होंने सेक्शुअल हैरेस्मेंट के खिलाफ अपनी आवाज उठाई. "The Silence Breakers" के नाम पर डेडिकेट किया गया ये टाइम कवर पांच दमदार महिलाओं को दिखाता है.

ये कवर #Metoo अभियान से जुड़ी पांच सबसे अहम महिलाओं को सम्मानित किया है इसमें ऐशली जूड, टेलर स्विफ्ट, सुसन फौलर, एडमा इवु और इसाबेल पास्कुएल (बदला हुआ नाम) शामिल हैं.

Time cover, Metooटाइम मैगजीन के इस कवर में छुपा हुआ हाथ कुछ कह रहा है

सम्मान है तो नाम क्यों बदला गया? कारण साफ है.. उनकी पहचान छुपाने के लिए. अगर इस मैगजीन कवर को ध्यान से देखा जाए तो इसके अंदर किसी का दाहिना हाथ दिखेगा. शक्ल नहीं सिर्फ कोहनी...

टाइम के एडिटर इन चीफ एडवर्ड फेलसेन्थल का कहना है कि जिस महिला का चेहरा छुपा हुआ है वो हर उस महिला और पुरुष को दर्शा रही है जो अपनी आवाज या तो अभी तक उठा नहीं पाया है या फिर नतीजों के डर से शांत होकर बैठ गया है.

एडवर्ड ने मैशेबल साइट को दिए अपने एक इंटरव्यू में बताया कि जो फोटो है वो उस महिला की है जिससे टाइम मैगजीन ने बात की थी. एक हॉस्पिटल वर्कर, उसे लगता था कि अगर वो सामने आएगी तो उसके काम पर असर पड़ेगा और उसे डर था कि उसके साथ कुछ गलत होगा.

टाइम के इस कवर में गुमनाम महिला ये दिखाती है कि #Metoo अभियान में न जाने कितनी ही आवाजें हैं जो दबी रह गईं, वो सिलेब्रिटी नहीं थे तो उनकी कहानियों को शेयर नहीं किया गया. हर शहर, गली से आई महिला ने #Metoo का इस्तेमाल किया और अपनी कहानी सोशल मीडिया में शेयर की. फोटो में छुपी वो कोहनी हर उस इंसान को दिखाती है.

वो कोहनी ये भी दिखाती है कि अभी भी न जाने कितने ही लोग ऐसे हैं जो अपनी कहानी बताने के लिए सामने नहीं आ सकते. न जाने कितने ही ऐसे लोग हैं जिन्हें ये लगता है कि सामने आने से जान से लेकर माल तक हर चीज का खतरा हो सकता है.

Time का ये कवर काबिलेतारीफ है. खुद ही सोचिए क्या ये आम जिंदगी को नहीं दिखाता? खुद ही सोचिए वो समय जब आप असहनीय तकलीफ झेलते हैं और सिर्फ इसलिए कुछ बोल नहीं पाते क्योंकि उन्हें किसी तरह का डर होता है.

इस कवर के पीछे की कहानी तो उतनी ही दिलचस्प है, लेकिन बात तो सोचने वाली है कि 2017 में भी इस तरह की समस्या लोगों को हो रही है. अब जब्कि इंसान मंगल पर बसने की बात कर रहा है वहां धरती पर इस तरह लोगों को जीना पड़ रहा है. टाइम का ये कवर तारीफ के काबिल तो है, लेकिन क्या ये समाज की कड़वी सच्चाई नहीं दिखा रहा? बात तो सोचने वाली है कि आज भी अपने हक के लिए लड़ने वाली महिला सम्मान लेने से डर रही है क्योंकि उसे इस सम्मान से खतरा हो सकता है.

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