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Updated: 27 फरवरी, 2018 02:47 PM
पीयूष द्विवेदी
पीयूष द्विवेदी
  @piyush.dwiwedi
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होली का मौसम है, तो ऐसे में जरूरी हो जाता है यह जानना कि हमारे राजनेता होली के लिए क्या-क्या तैयारी कर रहे हैं और होली मनाने के लिए उनकी क्या योजना है. भई लोकतंत्र हैं, हक़ है देश की जनता को यह जानने का! लेकिन, ये नेता लोग खुद से तो कुछ बताएंगे नहीं, इसलिए हमने इनसे बात करने की कोशिश की और बात करने पर जो 'बात' निकलकर सामने आई, उसे आपके सामने भी रख रहे हैं. अब भली लगे या बुरी, हम तो कहेंगे पूरी. मोदी जी के मन की बात..

मोदी जी से तो बात होना ही सबसे बड़ी बात है. चालीस दिन की कोशिश में - साहब, दौरे पर हैं - चार सौ चौवालिस बार सुनने को मिला, तब जाके एक रोज मोदीजी मिले. लेकिन, जब मिले तो बस वे ही बोले, हम तो लोकसभा चुनाव 2014 की किसी रैली में बैठे श्रोता बने रहे. बोले कि होली पर हमारी सरकार 'डिजिटल होली' योजना लाने जा रही है, जिसमें रजिस्टर करके आप रजाई में बैठे-बैठे शाहरुख़, सलमान, कटरीना, करीना, प्रियंका से लेकर प्रिया प्रकाश तक किसीके भी साथ रंग, गुलाल, कीचड़ आदि जैसी चाहें वैसी होली का आनंद ले सकेंगे. इससे मेरे प्यारे सवा सौ करोड़ देशवासियों की होली का मजा दुगुना हो जाएगा और गंदगी नहीं होगी, तो स्वच्छ भारत अभियान भी बचा रहेगा. हमारा लक्ष्य है कि 2022 तक कलरलेस होली पूरी तरह से शुरू हो जाए. बस इसके लिए जेटली जी के जीएसटी सहित नीरव सेस, ललित सेस, माल्या सेस जैसे कुछेक और सेस जोड़कर एक मामूली-सा रजिस्ट्रेशन चार्ज देना होगा. आखिर राष्ट्र-निर्माण में इतना योगदान तो बनता ही है.

होली, राहुल गांधी, नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल

राहुल-राग...

राहुल जी तो जैसे भरे बैठे थे, होली का नाम आते ही बरस पड़े. बोले - होली का तो नाम ही मत लीजिये! यहाँ चुनाव के धक्के खाने के बाद न जीत मिली और न ज्ञान लेने (आँख मारते हुए) विदेश ही जा सका. पिछली बार की होली में चार जगह हारकर इन्होने बर्बाद कर दी, अबकी भी उसी तैयारी में हैं सब. मैं क्या कोई सुपरमैन हूँ, जो इन निकम्मों को जीत दिला दूंगा. अध्यक्ष नहीं था, तो इतना तो बढ़िया था कि हार के बाद ज्ञान लेने चला जाता था, अब तो हारो या जीतो यहीं पड़े रहना है. मुआ चुनाव आयोग भी क्या कम दुश्मन है! एक ख़त्म होता नहीं कि दूसरा लेकर आ जाता है. ऊपर से ये मोदी जी की सरकार नाक में अलग दम किए हुए है. डिजिटल होली करवाने जा रही. इससे क्या होगा, रंग कारोबारियों के पेट पर लात मारने वाली योजना है ये. हमारी सरकार होती तो दिखाते कि होली कैसे होती है - होली खेलने वाली फैक्ट्री लगा देते (जरा जोश में आते हुए). इधर से आदमी डालो उधर से वो रंगा हुआ बाहर आ जाता. साल में नहीं, हर महीने होली खेलने का क़ानून लाते जिससे हमारे रंग कारोबारी भाइयों के जीवन में खुशहाली आती. पर इस सरकार के पास तो जनता की भलाई की सोच ही नहीं है.

केजरी-कथा...

केजरीवाल साहब ने जो कहा, वो उन्ही के शब्दों में कुछ यूँ था - 'देखिये जी, काहे कि होली ? आम आदमी के लिए कोई होली-वोली नहीं होती, ये सब इन बड़े लोगों के चोचले हैं. मैं तो कहता हूँ जी कि ये होली भी कांग्रेस और बीजेपी वालों का बड़ा स्कैम है, स्कैम! बड़े-बड़े रंग कारोबारियों को मुनाफा पहुंचाने का प्रपंच सब. मोदीजी डिजिटल होली ला रहे, ऊपर-ऊपर से ठीक लग रहा है, पर इसमें भी बहुत बड़ा स्कैम है! रंग कारोबारी अब डिजिटल में इन्वेस्ट करेंगे और उससे वसूली होगी. रंग की कालाबाजारी तो होगी ही. फिर जहाँ-जहां कांग्रेस है, वहाँ ये योजना नहीं चलेगी तो रंग बिकेंगे ही, वो 'बारहमासी होली' की योजना भी शुरू कर देगी, रंग कारोबारियों की मौज हो जाएगी.'

केजरीवाल जी की ये बातें हमारे ऊपर से निकल गयीं तो हमने विषयांतर के लिए पूछा - अच्छा ये सब तो ठीक है, आपकी क्या योजना है होली में? केजरीवाल जी बोले - देखिये जी, हम दिल्ली में एक ईमानदार, स्वच्छ और आम आदमी वाली होली करवाएंगे, इसके लिए हमारे बड़े से (थोड़ा खांसते हुए). मतलब कि बड़े ही आम से आदमी गुप्ता भाइयों के नेतृत्व में एक 'होलीपाल' क़ानून का मसौदा तैयार हो रहा है, इसे लागू किया जाएगा. होलीपाल देखेगा कि कहीं भी कोई होली खेलने में बेईमानी तो नहीं कर रहा, मतलब कि कोई किसी पर ज्यादा रंग (फिर खांसते हुए). रंग नहीं, ज्यादा देश की मिट्टी तो नहीं डाल रहा और खुद डलवाने से बच तो नहीं रहा. होलिपाल सबको बराबर ढंग से होली खेलने को तैयार करेगा. रंग की नहीं, देश की मिट्टी से होली खेलने का नियम लागू करेगा होलीपाल. इतना सुनते ही हमने केजरीवाल जी को नमस्कार कह फोन रखा. ये भी पढ़ें-

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लेखक

पीयूष द्विवेदी पीयूष द्विवेदी @piyush.dwiwedi

लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं

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