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Updated: 12 अगस्त, 2015 12:46 PM
प्रियम तिवारी
प्रियम तिवारी
  @koshchanmark
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कहानी मैनपुरी के लड़के की है. जो दिल्ली जैसे महानगर में बतौर एक थर्ड पार्टी पेरोल डिलीवरी बॉय, औसतन सात से बारह हजार के वेतन पर दस से बारह घंटे की ड्यूटी बजा रहा है. उसे कैसे भी करके तय समय सीमा में रोज करीब चालीस से पैंतालीस पार्सल निर्धारित जगह तक पहुंचाने होते हैं. और तो और वक्त रहते न पहुंच सकने की सूरत में उसकी पगार से ही कंपनी जुर्माना वसूलती है.

तय समय सीमा पर पहुंचते-पहुंचते वो लड़का ट्रैफिक में अपनी जान जोखिम में डाल देता होगा.यह सब इन ऑनलाइन कंपनियों को सोचने पर मजबूर क्यों नहीं करता? जिनकी पहली तिमाही की विकास दर औसतन पंद्रह से बीस फीसदी रही.  क्या यह शोषण के अंतर्गत आने के लिए काफी है? या उसके कुछ और भी सख्त पैमाने होने चाहिए? संभव है प्रधानमंत्री जी अपने पंद्रह अगस्त के भाषण में युवाओं को रोजगार और सर्विस सेक्टर में बढ़ोतरी जैसी बातें रखेंगे. उन्हें इन डिलीवरी बॉयज पर भी तो सोचना होगा. कंपनियां उन्हें डायरेक्ट पेरोल पर क्यों नहीं लेतीं?

क्या सरकार से उनके लिए एक न्यूनतम वेतन दर लागू करने की उम्मीद की जा सकती है?क्या वे भी श्रम सुरक्षा कानून के अंतर्गत आ सकते हैं?और क्या तय समय सीमा में ही पहुंचने अन्यथा वेतन काटने जैसे अमानवीय कानून जड़ से क्यों नहीं उखाड़ फेंकने चाहिए?

मुझे मालूम है कि इसका जिक्र उनके भाषण में कहीं नहीं मिलेगा. एक डिलीवरी बॉय का उल्लेख भला प्रधानमंत्री के भाषण में रहकर क्या करेगा? अभी पंद्रह अगस्त के आसपास ये ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियां अपना डेड स्टॉक महासेल और महालूट शीर्षक से बेचने को आतुर हैं. छूट ज्यादा होगी, तो माल खूब बिकेगा. माल खूब बिकने से डिलीवरी बढ़ेगी और साथ ही बढ़ेगी डिलीवरी बॉय की आपाधापी भी. और वो रोजाना पैंतालीस की बजाय सौ-सवा सौ पार्सल आपके दरवाजों तक उसी 'तय समय सीमा' पर ही पहुंचाएगा.  

ऐसी कंपनियों से क्या उम्मीद की जाए? ये शहर ऐसी असंख्य रिटेल दुकानों और शोरूम्स से पटा पड़ा है, जहां चमचमाती सफेद शर्ट पहने और मंद मुस्कान भरे हुए सेल्सपर्सन आपका स्वागत करता है. आपके लिए साइज ढूंढकर लाता है. उस मुड़े कपड़े को दोबारा तहियाता भी है. बिलिंग काउंटर तक लेकर भी जाता है. फिर और मुस्कुराता है क्योंकि आपको अपने मन माफिक चीज जो मिल रही होती है. और उसे उस पर कमीशन.

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लेखक

प्रियम तिवारी प्रियम तिवारी @koshchanmark

लेखक युवा स्तंभकार और मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं.

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