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Updated: 01 सितम्बर, 2018 05:46 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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सहकर्मियों के साथ प्रतिस्पर्धा तक तो बात ठीक थी. मगर परेशानी तब बढ़ गयी जब ये सुनने में आए कि सेक्सी सेल्फी लेकर आर्थिक असमानता की बात को चुनौती दी जा सकती है. बात कन्फ्यूज करने वाली है और कन्फ्यूजन दूर करने के लिए हमें परत दर परत खबर समझनी होगी. नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज (पीएनएएस) की पत्रिका में एक अजीब सा शोध प्रकाशित हुआ है. शोध महिलाओं द्वारा सेल्फी पोस्ट करने को लेकर है. शोध के मुताबिक- महिलाएं अपने सहकर्मियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने और सामाजिक रूप से आगे बढ़ने के लिए आकर्षक सेल्फी लेती हैं. इस निष्कर्ष में कहा गया कि जिन महिलाओं का उनके जेंडर की वजह से दमन किया जाता है वह ज्यादा सेक्सी सेल्फी पोस्ट करती हैं.

सेल्फी, महिलाएं, शोध, आर्थिक असमानता  आर्थिक असमानता में सेल्फी की भूमिका को लेकर किये गए शोध में हमें कई विरोधाभास दिखते हैं

आपको बताते चलें कि इस अनोखी स्टडी में टीम ने 113 देशों के दस हजार सोशल मीडिया पोस्ट का विश्लेषण किया. टीम द्वारा इस विश्लेषण में उन पोस्ट को ट्रैक किया गया जिनमें लोगों ने सुन्दर या फिर सेक्सी सेल्फी ली थी. टीम ने उन लोगों को भी नोट किया जिनकी सेल्फी पर सेक्सी, हॉट से मिलते जुलते शब्द टैग्ड थे.

ऑस्ट्रेलिया स्थित सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स (यूएनएसडब्लयू) में पढ़ाने वाली और ऑथर खांडिस ब्लेक ने इस शोध का गहनता से अध्ययन किया है और पाया है कि आर्थिक असमानता को चुनौती देने वाले तर्क उस समय जन्म लेते हैं जब हम लिंग-निर्धारण करते हैं या फिर उसकी बातें करते हैं. शोध पर ब्लेक का कहना है, 'हमने पाया कि महिलाओं को उन जगहों पर ऑनलाइन सेक्सी सेल्फियां पोस्ट करने की संभावना ज्यादा है जहां आर्थिक असमानता बढ़ रही है, लेकिन उन जगहों पर ऐसा नहीं है जहां पुरुषों के हाथ में शक्ति है और लिंग असमानता बहुत ज्यादा है.'

ब्लेक की ये बात विचलित करने वाली हो सकती है. मगर जब हम इसे अपने आस पास रखकर देखें तो मिलता है कि इस शोध में कही बातें और ब्लेक का अनुमान दोनों विरोधाभासी है. बतौर उदाहरण हम फिलिपीन, ज़ाम्बिया, ईरान, होंडुरास, चीन, बोत्सवाना, नामीबिया जैसे देशों का रुख कर सकते हैं. इंटरनेट पर यदि हम इन देशों की लड़कियों/ महिलाओं की सेल्फियों को सर्च करें तो मिलता है आर्थिक असमानता होने के बावजूद इन देशों की लड़कियों में सेल्फी पोस्ट करने के मामले में गजब का आत्मविश्वास तो है मगर ये आर्थिक रूप से बिल्कुल भी संपन्न नहीं हैं. वहीं अगर हम आर्थिक रूप से संपन्न देशों की महिलाओं को देखें तो वो इन महिलाओं से कई मामलों में काफी अलग हैं.

रिसर्च करने वाली टीम ने ये कहकर इस बात को साफ कर दिया है कि इस शोध के जरिये उन्होंने पाया है कि यदि आय में असमानता हो तो ऐसे में लोगों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है. टीम का ये भी मानना है कि जब आय में असमानता हो तब ये बात लोगों को ज्यादा परेशान करती है और उनके लिए चिंता की अहम वजह बनती है. उस स्थिति में जब आदमी के पास कुछ होता नहीं है तो वो दूसरों के सामने अपने आप को प्रभावशाली और दूसरों से बेहतर दिखाने का प्रयास करता है. इस बात के बाद और वर्तमान परिदृश्य को देखकर हमारे लिए ये कहना गलत नहीं है कि आज के समय में दूसरों से कुछ बेहतर करने का सबसे अच्छा माध्यम सेल्फियां लेना है.

सेल्फी, महिलाएं, शोध, आर्थिक असमानता  इस बात से हम सहमत हैं कि सेल्फी प्रतिस्पर्धा की भावना की जनक होती हैं

लोग तरह तरह की सेल्फियां लेते हैं और न सिर्फ़ उनको देखकर बल्कि दूसरों को दिखाकर भी एक अजीब सी संतुष्टि हासिल करते हैं. शोध को देखकर ब्लेक ने भी इस बात पर अपनी सहमती दर्ज की है कि बात अगर महिलाओं के बीच सेल्फी की भूमिका पर हो तो सेक्सी सेल्फियां महिलाओं के बीच सामाजिक बढ़त का प्रतीक हैं.

ब्लेक कहती हैं कि अब ये कितना सही है या गलत इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता मगर सेक्सी दिखना किसी भी महिला को आपको सामाजिक, आर्थिक और निजी तौर पर लाभ पहुंचा सकता है. ब्लेक यह भी कहती हैं कि अगर कोई महिला फोन के सामने उत्तेजक ढंग से अपनी बिकनी को दर्शाते हुए सेल्फी ले रही है तो उसे दयनीय नहीं मानना चाहिए बल्कि ये सोचना चाहिए कि उसे परिस्थितियां संभालना आता है और वो महिला सोशल मीडिया की एक माहिर खिलाड़ी है जिसका उद्देश्य किसी भी सूरत में जीतना है.

बहरहाल, इस रिसर्च और ब्लेक की बातों में काफी विरोधाभास दिखता है. ऐसा इसलिए क्योंकि जहां एक तरह इस बात से हम पूरी तरह सहमत हैं कि सेल्फियां प्रतिस्पर्धा की जनक होती हैं या फिर उनको बढ़ावा देती हैं. वहीं हम इस बात से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं कि इनके माध्यम से आर्थिक असमानता की बात को चुनौती दी जा सकती है. हम ऊपर उदाहरण में फिलिपीन, ज़ाम्बिया, ईरान, होंडुरास, चीन, बोत्सवाना, नामीबिया जैसे देशों का जिक्र कर चुके हैं और ये बता चुके हैं कि आज इंटरनेट पर इन देशों की महिलाओं की सेल्फियों की बाढ़ आई है मगर जब हम इनकी आर्थिक स्थिति को देखें तो मिलता है कि इन देशों की महिलाएं अपना जीवन तंगहाली में व्यतीत कर रही हैं.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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