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Updated: 14 अक्टूबर, 2018 12:21 PM
अरिंदम डे
अरिंदम डे
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भारत में इन दिनों तनुश्री दत्ता के खुलासे के बाद #Metoo मूवमेंट जोरों पर है. हर तरफ से हर फील्ड से महिलाएं सामने आ रही हैं और अपने साथ हुई घटनाओं की जानकारी दे रही हैं. राजनीति से लेकर बॉलीवुड और फैशन इंडस्ट्री से लेकर मीडिया तक सभी जगहों पर दरिंदों की करतूतों को सामने लाया जा रहा है और इसे हिंदुस्तान के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पर क्या वाकई ये बदलाव है? भारत में मी टू मूवमेंट से जुड़ी एक भी आधिकारिक गिरफ्तारी नहीं हुई है. जिन भी महिलाओं ने सामने आकर हिम्मत दिखाई है और अपने साथ हुई हरकत के बारे में बताया है उनपर सवाल उठाए जा रहे हैं. इसे हिंदुस्तान की बदकिस्मती ही कहेंगे कि जैसे ही भारतीय महिलाओं ने सदियों के शोषण के बाद अपनी बात बतानी शुरू की और अपनी आवाज़ उठाई वैसे ही लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि हमें अपने पुरुषों को फेक #Metoo से बचाने की जरूरत है. मतलब महिलाओं के खिलाफ क्राइम के मामले में भले ही भारत अव्वल आ जाए, लेकिन सोशल मीडिया पर चल रहे इस मूवमेंट से पुरुषों को दिक्कत होने लगी और उन्हें बचाने की जरूरत पड़ने लगी.

भारत में तो मी टू मूवमेंट बहुत बाद में आया है और सही मायने में इसकी शुरुआत 2017 में ही हुई है जब हॉलीवुड में हार्वी विंस्टन का मामला सामने आया. उसके बाद ही भारत में भी ये शुरू हुआ था और पूरे देश की महिलाओं ने सोशल मीडिया पर #Metoo लिखना शुरू कर दिया था. लेकिन उसके बाद भी कुछ नहीं हुआ फिर लॉ स्टूडेंट राया सरकार ने सोशल मीडिया पर एक लिस्ट बनाई जिसमें उन लोगों के नाम लिखे हुए थे जो एजुकेशन फील्ड से जुड़े थे और प्रोफेसर होने के बाद भी यौन शोषण करते थे. ये मामला भी उठा और ठंडा पड़ गया.

Metoo, सोशल मीडिया, यौन शोषण, कानून, अमेरिका, ट्विटरभारत में जहां आवाज़ उठाने वाली महिलाओं पर सवाल उठाए जा रहे हैं वहीं यौन शोषण के आरोपियों को बचाने की कोशिश भी हो रही है

भारत में #Metoo मूवमेंट कथित तौर पर तो चल रहा है, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकल रहा. अगर इसके अमेरिकी वर्जन को देखा जाए तो ये वहां बिलकुल अलग ही दिखेगा और वहां इसके नतीजों को लेकर भी कुछ अलग ही तस्वीर सामने आएगी.

कहां से शुरू हुआ..

#metoo मूवमेंट की शुरुआत असल में तराना बर्क (Tarana burke) नाम की एक महिला से मानी जाती है जिसने ब्लैक वुमन यानी उन महिलाओं के सेक्शुअल हैरेस्मेंट को लेकर काम करना शुरू किया जो न सिर्फ शोषण का बल्कि रंग भेद का भी शिकार होती रही हैं.

ये मामला तो उस समय बहुत ज्यादा मीडिया में नहीं आया, लेकिन अक्टूबर 15, 2017 में एक बार फिर इस हैशटैग ने ट्विटर पर तेज़ी पकड़ी. तब हॉलीवुड एक्ट्रेस एलिसा मिलानो ने इसे लेकर ट्वीट किया था. 24 घंटे के अंदर 47 लाख लोगों ने इस हैशटैग का इस्तेमाल किया और ट्विटर पर 1.2 करोड़ पोस्ट आई. ग्वेन्स पैलट्रो, एश्ली जड, कर्टनी लव, जैनिफर लॉरेंस, ऊमा थर्मेन जैसी कई एक्ट्रेस ने इस हैशटैग का इस्तेमाल कर अपनी बात कही. न सिर्फ महिलाओं ने बल्कि कई पुरुष एक्टर्स जैसे टैरी क्रिऊ, जेम्स वैनडर बीक आदि ने भी इस हैशटैग का इस्तेमाल कर अपने शोषण की बात बताई और फिर #HowIWillChange हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड हुआ. धीरे-धीरे करके साइंस, एजुकेशन, पॉलिटिक्स, म्यूजिक इंडस्ट्री आदि सभी में इस हैशटैग का इस्तेमाल होने लगा

हॉलीवुड डायरेक्टर हार्वी विंस्टन का नाम सबसे ज्यादा बार लिया गया. मैघन टूहे और जोडी कांटर जैसी एक्ट्रेस ने न्यूयॉर्क टाइम्स में हार्वी के खिलाफ बोला. इसके बाद अक्टूबर 2017 तक 80 से ज्यादा महिलाओं ने हार्वी विंस्टन के बारे में बताया. जर्नलिस्ट रोनन फैरो ने भी लूसिया इवान्स (एक्ट्रेस) और 12 अन्य महिलाओं के साथ हुए यौन शोषण की बात बताई. मई 2018 में #metoo ने अपना रंग दिखाया और हार्वी विंस्टन को गिरफ्तार कर लिया गया.

अमेरिका में 1 साल में #Metoo के विरोध में लिए गए एक्शन...

भारत में 1 साल से ऊपर हो गया है इस मूवमेंट को आए और कई लोगों का असली चेहरा सामने आ चुका है. सोशल मीडिया पर कई महिलाओं ने तो सबूत भी दिए. भारत में सिर्फ AIB ने एक्शन लिया है जिसके अधिकतर स्टैंडअप कॉमेडियन के ऊपर आरोप लग चुके हैं. सिर्फ AIB ने ही अपने शो कैंसिल किए हैं. इसके अलावा, अक्षय कुमार ने अपना शूट कैंसिल कर दिया. ये शूट हाउसफुल 4 का था जिसके डायरेक्टर साजिद खान और एक्टर नाना पाटेकर के खिलाफ मी टू मूवमेंट के तहत आरोप लग चुका है. मीडिया में एक दो लोग रिजाइन कर चुके हैं और साजिद खान अपने हाउसफुल 4 के डायरेक्टर के पद से इस्तीफा दे चुके हैं. पर अगर कानूनी तौर पर देखें तो इसके लिए कुछ नहीं हुआ. यहां तक कि सत्ताधीन पार्टी भाजपा के नेता के फंसने के बाद भी इसको लेकर कुछ नहीं किया गया. न ही कोई गिरफ्तारी हुई न ही किसी के खिलाफ कोई केस फाइल हुआ. इसका एक कारण ये भी हो सकता है कि भारत में अभी भी महिलाओं ने एफआईआर नहीं लिखवाई है ऐसे दरिंदों के खिलाफ और जिनके खिलाफ लिखवाई भी गई है उनके बारे में कोई एक्शन नहीं लिया गया.

metoo_651_101218044644.jpgअमेरिका में 414 लोगों पर आरोप लगा और सिर्फ 69 ऐसे बचे जिनपर कार्यवाही नहीं हुई. भारत में अभी ही ये संख्या बहुत बड़ी है.

पर अमेरिका में ऐसा नहीं हुआ. अमेरिका में इसको लेकर कुछ अलग ही कार्यवाही हुई और 18 महीनों में 414 सेलेब और बड़े लोग जिनका नाम हमेशा न्यूज में आता है उनके खिलाफ शिकायत हो चुकी थी और महिलाएं बोल चुकी थीं. इसमें सेलेब्स जैसे बिल कॉस्बी, लुई सीके जैसे लोगों के साथ साथ बिजनेसमैन जैसे इंटल कंपनी के सीईओ ब्रायन क्रजानिक भी शामिल थे. ब्रायन से इस्तीफा ले लिया गया.

यहां तक तो ठीक, लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि इन 414 लोगों में से 190 को नौकरियों से निकाल दिया गया था. अन्य 122 को अनिश्चित कालीन छुट्टी दे दी या सस्पेंड कर दिया गया था और उनके खिलाफ कार्यवाही की गई. कई को गिरफ्तार कर लिया गया था और सिर्फ 69 ऐसे थे जिनपर कोई कार्यवाही नहीं हुई. क्योंकि कुछ लोगों को सिर्फ सोशल मीडिया पर ही दोषी माना गया था.

हॉलीवुड, अमेरिकी मीडिया और बिजनेस के बेहद बड़े नाम जिनपर #Metoo मूवमेंट के जरिए आरोप लगाया गया..

लेस मून्व्स अमेरिकी सीबीएस कॉर्पोरेशन के सीईओ हैं और इनपर 6 महिलाओं ने आरोप लगाया था और सीबीएस ने बाद में विज्ञप्ती जारी की थी कि जिसमें ये लिखा था कि वो रिजाइन कर रहे हैं और सीबीएस से अलग होने के बाद मून्व्स को मिलने वाली रकम में से 20 मिलियन तुंरत ही ऐसी संस्थाओं को दिया जाएगा जो #Metoo के लिए काम करती हैं.

अमेरिकी रैम्बो यानी सिल्वेस्टर स्टैलन पर केस चल रहा है. उनपर जो आरोप है वो 1990 के दौर का है और 2018 में उनपर केस चलना शुरू हुआ है. इसी तरह कॉमेडियन जेमी फॉक्स पर भी 2002 में किए गए शोषण का केस चल रहा है. 2018 में ही रैपर रिफ रैफ पर भी रेप का आरोप लगा है. घटना 2013 की थी, रैपर ने सभी आरोपों का खंडन किया. अमेरिकी एक्टर और एकेडमी अवॉर्ड विनर मॉर्गन फ्रीमैन पर भी आठ अलग-अलग महिलाओं ने शोषण का आरोप लगाया था. मॉर्गन फ्रीमैन एक क्रेडिट कार्ड विज्ञापन में दिख रहे थे आरोपों के बाद उनसे जुड़ा कोई विज्ञापन नहीं दिखाया जाएगा और 13 जून 2018 को फ्रीमैन की लीगल टीम ने भी उनके साथ केस लड़ने से मना कर दिया.

बाएं से अमेरिकी एक्टर मॉर्गन फ्रीमैन, डायरेक्टर हार्वी विंस्टन, रैम्बो एक्टर सिल्वेस्टर स्टैलन और अमेरिकी क्रांग्रेस नेता ब्लेक फैरन्टहोल्डबाएं से अमेरिकी एक्टर मॉर्गन फ्रीमैन, डायरेक्टर हार्वी विंस्टन, रैम्बो एक्टर सिल्वेस्टर स्टैलन और अमेरिकी क्रांग्रेस नेता ब्लेक फैरन्टहोल्ड. इन सभी पर यौन शोषण के आरोप लगे.

इसके बाद R&B बिजनेसमैन आर कैली पर मई 2018 में दो महिलाओं ने आरोप लगाया. उसपर नाबालिगों के साथ शोषण और सेक्स टेप बनाने का आरोप लगा. केली ने सभी आरोपों का खंडन किया, लेकिन उनपर केस चल रहा है. इसी के साथ, कांग्रेस नेता ब्लेक फैरन्टहोल्ड पर भी दिसंबर 2017 में आरोप लगा था. आरोप ये भी था कि 84000 डॉलर अमेरिकी सरकार के ब्लेक ने अपने खिलाफ हुए मुकदमे को लड़ने के लिए लगा दिए और उन्हें तत्कालीन तौर पर निकाल दिया गया.

मोशन आर्ट्स एंड साइंस अकादमी के प्रेसिडेंट जॉन बेली पर भी आरोप लगे. ऑस्कर के एंकर के तौर पर केसी अफ्लिक को जॉन बेली की जगह लाया गया. हालांकि, वो अभी भी मोशन पिक्चर्स के साथ जुड़े हुए हैं. इसी तरह सेव चिड्रेन फाउंडेशन के जस्टिन फॉर्सेथ जिन्हें UNICEF के डेप्यूटी अधिकारी के रूप में इस्तीफा देना पड़ा था. जादूगर डेविड कॉपरफील्ड जिन्होंने आरोपों का खंडन किया. एक्टर माइकल डगलस आदि पर केस चला और उनपर ज्यादा कार्यवाही नहीं हुई.

'Time's Up' संगठन का निर्माण..

जहां अभी भी #Metoo भारत में अपनी पहचान बनाने के लिए जंग लड़ रहा है और अमेरिका में न सिर्फ महज 18 महीने के अंदर इतने सारे बड़े-बड़े लोगों पर कार्यवाही हो गई बल्कि 1 जनवरी 2018 यानी 6 महीने के अंगर ही विंस्टन के खिलाफ हॉलीवुड सेलेब्स के रिस्पॉन्स के बाद 'Time's Up' नाम की एक संस्था बनाई गई और इस संस्था को 22 मिलियन डॉलर की फंडिंग भी मिल गई. इसमें 500 से ज्यादा वकीलों ने स्वेच्छा से जुड़ने की घोषणा की.

ये संस्था शोषण, प्रेग्नेंसी हैरेस्मेंट, कार्यस्थल पर शोषण और भेदभाव, लिंग भेद, रंग भेद आदि के विक्टिम्स के लिए काम करती है. ये पैसा सीधे नैशनल वुमेन लॉ सेंटर को गया जिसने 3500 शिकायतों पर कार्यवाही की और अभी भी 50 से ज्यादा लोग इस काम में लगे हैं. ये संस्था हर तरह के शोषण पर काम करती है. 5 अक्टूबर 2018 को ही वुमेंस बास्केटबॉल असोसिएशन की प्रेसिडेंट लीजा बॉर्डर्स को 'Time's Up' के लीगल डिफेंस फंड का सीईओ बनाया गया है.

#HowWillIChange से मिला #Metoo को सपोर्ट-

मी टू मूवमेंट के साथ ही ऑस्ट्रेलियन राइटर बेंजामिन लॉ ने #HowWillIChange मूवमेंट शुरू किया और इस बारे में ध्यान दिया कि अब लोगों की जिंदगी कैसे बदली जाए. ये पुरुषों में बदलाव लाने के लिए थी. बेनजमिन लॉ के इस हैशटैग के साथ बहुत से पुरुष जुड़े और महिलाओं के लिए बदलाव की बात की.

एक तरफ विदेश है जहां एक मूवमेंट ने इतना बड़ा बदलाव ला दिया और थोड़े से रिकॉर्ड समय में इतना सब कुछ बदल गया और दूसरी तरफ भारत जहां इस मूवमेंट को ही सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट बताया जा रहा है. जरा सोचिए कितना बदलाव आ सकता है अगर सिर्फ भारतीय सीरियस हो गए तो.

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अरिंदम डे अरिंदम डे @arindam.de.54

लेखक आजतक में पत्रकार हैं

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