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Updated: 29 अप्रिल, 2015 03:50 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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जैसे ही छिछालेदर मची, उस कंपनी ने माफी मांगते हुए वो विज्ञापन वापस ले लिया. उन नेताओं के बयान पर भी शायद ज्यादा ध्यान न दिया गया हो. हद तो तब हो गई जब अस्पताल में उनके माथे पर ही भूकंप लिख दिया गया. नेपाल में आए भूकंप के बाद ऐसी कई अपमानजनक हरकतें लगातार हो रही हैं. भूकंप मचा दो?‘शेक इट ऑफ लाइक द अर्थक्वेक’. भूकंप मचा दो - अंग्रेजी जुमले का हिंदी में यही मतलब होता है. ई-रिटेल कंपनी लेंसकार्ट को नेपाल और भारत में आए विनाशकारी भूकंप में भी बिजनेस सूझी. कंपनी ने ग्राहकों के सामने 3000 रुपये का सनग्लास 500 रुपये में लेने की पेशकश की. इसके लिए हर ग्राहक को 50 मैसेज भेजने को कहा गया जिसमें - 'भूकंप मचा दो' जुमला भी शामिल था. जब सोशल मीडिया पर लोगों ने कंपनी को भला-बुरा कहना शुरू किया तो उसने अपना कैंपेन रोका. कंपनी ने इसे भूल बताया और इसके लिए खेद जताया.माथे पर ही 'भूकंप' लिख दियादरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तो डॉक्टरों ने जरा भी संवेदना नहीं दिखाई. यहां तो भूकंप के कारण जख्मी लोग अस्पताल पहुंचे तो उनके माथे पर 'भूकंप' लिखा स्टिकर ही लगा दिया. मीडिया में इसकी खबर आने के बाद अफसर से लेकर मंत्री तक हरकत में आए - और फिर जांच के आदेश दिए गए. तब जाकर स्टीकर हटाया गया.भूकंप के सियासी कारणजब कभी बयानों की गाथा लिखी जाएगी, साक्षी महाराज और साध्वी प्राची ऑल टाइम टॉपर बने रहेंगे. अभी तक हिंदुओं को कितने बच्चे पैदा करने चाहिए बतानेवाले इन दोनों नेताओं ने भूंकप की भी वजह खोज डाली है.पहले वीएचपी की नेता साध्वी प्राची की बात पर गौर फरमाएं, "राहुल गांधी जब जब उत्तराखंड की यात्रा करते हैं, अपने साथ विनाश लाते हैं. राहुल जब पिछली बार उत्तराखंड गए थे तब भी विनाश हुआ था. अब इन्होंने भूकंप ला खड़ा किया."आखिर साक्षी महाराज कैसे चुप रह जाते. विचार तो उनके मन में भी कुलबुलाते रहते हैं - और छूटते ही बाहर आ जाते हैं. एक अखबार से बातचीत में साक्षी महाराज ने कहा कि राहुल गांधी 'बीफ' खाते हैं और शुद्धिकरण किये बगैर ही वो केदारनाथ दर्शन करने के लिए चले गए. महाराज के मुताबिक इसी वजह से भगवान शिव को गुस्सा आ गया और प्रलय बनकर धरती पर फूटा है. भूकंप की वैज्ञानिक वजह अपनी जगह हो सकती है, लेकिन इस सियासी वजह का कोई सानी नहीं दिखता. बिजनेस करो, सामान बेचो, बयानबाजी करो, सियासत करो - पूरा साल पड़ा है. कुछ ही दिन के लिए कम से कम भूकंप पीड़ितों को तो बख्श दो. प्लीज.

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मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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