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Updated: 19 नवम्बर, 2018 03:56 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कहीं महिलाओं को तोहफे दिए जाते हैं तो कहीं महिलाओं को इस दिन की ढेर सारी शुभकामनाएं दी जाती हैं. लेकिन पुरुषों का क्या? क्या महिला दिवस की तरह कोई पुरुष दिवस भी होता है? जी हां, बिल्कुल होता है और लोग इसे मनाते भी हैं. फर्क सिर्फ इतना है कि इसकी लोकप्रियता महिला दिवस जितनी नहीं है. तो चलिए जानते हैं पुरुष दिवस के बारे में कि ये कब, क्यों और किस लिए मनाया जाता है?

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इस बार पुरुष दिवस की क्या है थीम?

अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस हर साल 19 नवंबर को मनाया जाता है. पुरुष दिवस का फोकस पुरुषों और बच्चों के स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और आदर्श पुरुषों के बारे में दुनिया को बताना होता है. पुरुष दिवस 1960 के दशक से ही मनाया जा रहा है. इस दिन पुरुषों की उपलब्धियों का उत्सव मनाया जाता है और साथ ही समाज, परिवार, विवाह और बच्चों की देखभाल में पुरुषों के सहयोग पर भी बात होती है. 19 नवंबर 2018 को मनाए जाने वाले पुरुष दिवस का थीम Positive Male Role Models है. अतंरराष्ट्रीय पुरुष दिवस की लेकर एक आधिकारिक वेबसाइट भी है और फेसबुक पेज भी बना हुआ है. इनके जरिए डोनेशन ली जाती है.

पुरुष दिवस मनाना भी है जरूरी

भले ही आपको ऐसा लगे कि भारत पुरुष प्रधान देश है और यहां महिलाओं को ध्यान में रखते हुए महिला दिवस जैसे उत्सव मनाने जरूरी हैं. लेकिन यकीन मानिए, पुरुष भी कम बेचारे नहीं हैं. पुरुषों की भी अपनी ऐसी समस्याएं हैं, जिनसे उन्हें जूझना पड़ता है. यकीन न हो तो कुछ आंकड़े आपका ध्यान इस ओर खींचने में मदद कर सकते हैं. 76 फीसदी आत्महत्याएं पुरुष करते हैं, 85 फीसदी बेघर लोग पुरुष हैं, 70 फीसदी हत्याएं पुरुषों की हुई हैं, घरेलू हिंसा के शिकारों में भी 40 फीसदी पुरुष हैं. तो अगर महिला और पुरुष को समानता के पैमाने पर रखना है तो महिला दिवस के साथ-साथ पुरुष दिवस भी मनाना जरूरी है. इन्हीं सब कारणों के चलते पुरुष दिवस को भी मनाया जाता है.

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महिला दिवस क्यों मनाया जाता है?

8 मार्च को मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का उद्देश्य महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता, महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी उपलब्धियों को दुनिया के सामने लाना होता है. इस दिन उन महिलाओं के प्रति खास सम्मान व्यक्ति किया जाता है, जिन्होंने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र में अहम योगदान दिया है. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि घरेलू महिलाओं को भूल जाया जाता है, उन्हें भी सम्मान दिया जाता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सभी महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर बहस भी होती है. महिला दिवस का मुख्य उद्देश्य महिलाओं में इस भावना को जगाना है कि वह किसी भी मामले में पुरुषों से कमतर नहीं हैं. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 1909 में हुई थी.

आखिर जो लोग सोशल मीडिया पर ये पूछते हैं कि पुरुष दिवस कब होता है या फिर यह शिकायत करते हैं कि पुरुष दिवस भी महिला दिवस की तरह क्यों नहीं मनाया जाता है, उनकी बात एक हद तक सही भी है. महिला दिवस मनाने का मुख्य मुद्देश्य उन्हें सम्मान देना है और यह दिखाना है कि वह किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं, लेकिन पुरुष दिवस को नजरअंदाज कर देने से समानता की बात करने वाले लोगों पर एक सवालिया चिन्ह जरूर लगता है. इसकी वजह से कुछ हद तक पुरुषों को दुख जरूर पहुंचाता है.

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