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Updated: 08 जून, 2022 10:19 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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भले ही 'आईएएस अफसरों' की संख्या को आधार बनाकर बिहार देश के अन्य राज्यों के सामने कॉलर चौड़ा करके घूमे. लेकिन राज्य में शिक्षा वो भी प्राथमिक शिक्षा की जो स्थिति है, हर दूसरे दिन कोई न कोई ऐसी खबर आ जाती है जिसका खामियाजा बिहार के किसी आम नागरिक को भुगतना पड़ता है. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि बिहारी इस बात से अवगत नहीं हैं. समय समय पर इसकी शिकायत भी होती रही है. जिक्र अगर हाल फ़िलहाल का हो तो जिस तरह 11 साल के सोनू कुमार ने शिक्षा के अधिकार के तहत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 'शिक्षा' मांगी. यकीन हो गया था कि बिहार में बच्चों का पढ़ना आसान तो किसी सूरत में नहीं है. सवाल होगा कि इसका जिम्मेदार कौन है? सिस्टम, टीचर या फिर खुद मां बाप? जवाब हमें उस वक़्त मिल जाता है जब हम बेतिया जिले के उस वायरल वीडियो को देखते हैं जिसमें सोती हुई महिला टीचर साफ़ तौर पर प्राथमिक शिक्षा का मखौल उड़ाती नजर आ रही है. 

Education, Bihar, School, Viral Video, Nitish Kumar, Chief Minister, Education, Education Systemबिहार के बेतिया में क्लास रूम में सोती महिला टीचर और उसे पंखा झलती छात्रा

वीडियो में दिख रहा है सरकारी स्कूल की महिला टीचर बच्चों से भरे क्लासरूम में आराम से कुर्सी पर टांगे पसारकर सो रही है. मामले में दिलचस्प ये कि, क्लासरूम में जहां एक तरफ और बच्चे पढ़ाई के नाम पर आपस में बातें कर रहे हैं. तो वहीं एक बच्ची ऐसी भी है. जो मैडम जी को हाथ का पंखा झल रही है. ताकि मैडम जी को गर्मी न लगे और अच्छी नींद आए.

मामला सामने आने के बाद ये कहना हमारे लिए अतिश्योक्ति न होगा कि इंटरनेट पर वायरल बेतिया का ये वीडियो सिर्फ बेतिया का ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार की शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को बयां कर रहा है. वायरल वीडियो इसका भी पुख्ता प्रमाण दे रहा है कि प्राथमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों का ये शिक्षा के प्रति ढीला ढाला रवैया ही वो कारण है जिसके चलते बिहार में समय समय पर छात्रों के साथ साथ प्राथमिक शिक्षा पर सवालिया निशान लगे हैं.

वीडियो सामने आने के बाद प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गयी है. चाहे वो सिस्टम हो या फिर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनकी नीतियां दोषी तमाम चीजों को ठहराया जा रहा है. लेकिन क्या शिक्षा के इस स्वरुप के लिए वाक़ई मुख्यमंत्री और राज्य सरकार जिम्मेदार हैं? शायद नहीं. क्यों? कारण बस ये है कि क्या बतौर मुख्यमंत्री कभी नीतीश कुमार ये चाहेंगे कि उनकी बदनामी एक ऐसी चीज (शिक्षा) के लिए हो जिसके लिए वो खुद व्यक्तिगत रूप से गम्भीर हैं. 

साफ़ है कि ऐसे मामलों में दोषी सरकारें नहीं बल्कि स्वयं शिक्षक हैं. लेकिन चूंकि सरकार पर इस अव्यवस्था का ठीकरा फोड़ना है तो इतना जरूर कहा जाएगा कि जब तक राज्य सरकारें ऐसे दोषी शिक्षकों पर नर्म रुख रखेंगी तब तक ऐसी तस्वीरें या ये कहें कि वीडियो हमारे सामने आते रहेंगे. 

बाकी क्लासरूम में आराम फरमाती प्राइमरी टीचर और उस टीचर को हाथों से पंखा झलती स्टूडेंट को देखकर हैरत में आने वाले लोग पता नहीं उस वक़्त हैरत में आए या नहीं? जब अभी बीते दिनों बिहार के कटिहार से शिक्षा से जुड़ा एक वीडियो आया था.

वो वीडियो भी इंटरनेट पर खूब वायरल हुआ था. वीडियो में एक ही क्लासरूम में, एक ही समय पर एक ही ब्लैकबोर्ड पर दो अलग भाषाएं हिंदी और उर्दू पढ़ाई जा रही थीं. 

यदि इस वीडियो को भी ध्यान से देखें तो मिलता यही है कि इसमें कटिहार का आदर्श मिडिल स्कूल बच्चों से, बच्चों के भविष्य और मां बाप के अलावा खुद स्कूल के शिक्षकों से धोखा कर रहा था. इस वीडियो पर भी खूब प्रतिक्रियाएं आई थीं और कहने वालों ने कहा था कि ऐसा सिर्फ बिहार में ही संभव है. 

हम फिर अपनी बात को दोहराना चाहेंगे कि राज्य सरकार को कोसने से कोई फायदा नहीं है. भविष्य में जब भी ऐसी तस्वीरें और वीडियो आएं दोषी टीचर्स पर एक्शन के लिए लोगों को आवाज उठानी चाहिए. बात तो तब है जब ऐसे निर्लज्ज शिक्षकों को शर्मिंदगी का एहसास हो वरना सोशल मीडिया पर बनाए ट्रेंड और हैश टैग फ़साने से ज्यादा और कुछ नहीं हैं. 

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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