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 |  5-मिनट में पढ़ें  |   12-10-2018
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दो टूक चेतावनी पंजाब के मुख्‍यमंत्री अमरिंदर सिंह और हरियाणा के मुख्‍यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के लिए. वे सोए हुए हैं, और वहां किसानों ने कटी हुई फसलों को आग के हवाले करना शुरू कर दिया है. यह हर साल की तरह एक रस्‍म बन गया है, जिसे पंजाब-हरियाणा के सियासतदानों ने मान लिया है कि त्‍योहार आने के साथ-साथ धुआं भी आएगा ही. उनको सैटेलाइट से ली गई तस्‍वीर सबूत के तौर पर भेजी जा रही हैं कि किस तरह इन दो राज्‍यों में करोड़ों लोगों की सांसों में जहर घोलने की तैयारी शुरू हो गई है. हर साल की तरह इस साल भी दिल्ली के लोगों के लिए सर्दियों की शुरुआत ऐसी होने वाली है कि उनका दम घुट जाए. भले ही कितने भी नियम बनें या कुछ भी कानून निकाला जाए, लेकिन दिल्ली की ये समस्या कम नहीं होने वाली. दिल्ली स्मॉग की सबसे बड़ी वजह ने एक बार फिर से आकार लेना शुरू कर दिया है.

सैटेलाइट फोटो में पंजाब और हरियाणा से धुआं उठता हुआ दिख रहा है. ये वैसा ही धुआं है जैसा पिछले साल और उसके पिछले साल और पिछले कई सालों से दिल्ली के आस-पास उठता आया है और समस्या पैदा करता आया है.

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने कुछ फोटो जारी की हैं. नासा के एक हफ्ते पहले की फोटो और हालिया फोटो में अंतर साफ देखा जा सकता है.

ये 16 सितंबर की फोटो है जिसमें एक या दो जगह ही लाल निशान यानी गर्मी को देखा जा सकता है. ये दिखाती है कि जालंधर के पास एक या दो जगह ही किसान भूंसी जला रहे हैं.एक महीने पहले जालंधर के आसपास कुछ जगहों पर किसानों ने भूंसी जलाना शुरू किया.नासा की वेबसाइट में एक ग्राफ की मदद से पिछले समय की और अभी की फोटोज को देखा जा सकता है. फोटो साफ दिखाती हैं कि पिछले समय से लेकर अभी तक में 15 दिनों में कितना अंतर आ गया है. सिर्फ 15 दिनों में ही नहीं बल्कि एक हफ्ते के अंतर को भी देखा जा सकता है.

ये 30 सितंबर की फोटो है जिसमें बदलाव देखा जा सकता है. अंबाला और कर्नाल के पास कितनी मात्रा बढ़ गई है30 सितंबर के आसपास पंजाब के अलावा हरियाणा में अंबाला और करनाल के पास और भी खेत आग के हवाले कर दिए गए.

जैसे-जैसे दिवाली नजदीक आती है और ठंड बढ़ती है किसान अपनी फसल काटते हैं और खेत को दूसरी फसल के लिए तैयार करने के लिए बची हुई भूंसी जलाते हैं. वैसे तो ये गैरकानूनी है, लेकिन किसानों के पास इसके अलावा और कोई विकल्प नहीं बचता. सरकार की तरफ से नियम तो बना दिया गया है, लेकिन यहीं किसी भी तरह की मदद की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी है.

ये 10 अक्टूबर की फोटो है जिसे नासा की उसी वेबसाइट से लिया गया है. इस फोटो में साफ दिख रहा है कि खेतों में भूंसी जलाने की संख्या भी बढ़ गई है और पूरे इलाके से धुएं की चादर उठ रही है.10 अक्टूबर की इस ताजा तस्‍वीर में साफ दिख रहा है कि खेतों में भूंसी जलाने की संख्या भी बढ़ गई है और पूरे इलाके से धुएं की चादर उठ रही है.पंजाब-हरियाणा के हुक्‍मरान नासा की इस वेबसाइट पर जाकर धुएं का लाइव मैप देख सकते हैं- 

नासा द्वारा जारी की गई तस्वीरें दिखाती हैं कि वाकई दिल्ली कितने बड़े खतरे में है और धीरे-धीरे न सिर्फ पंजाब और हरयाणा से बल्कि उत्तर प्रदेश से भी किसान अपने खेतों में आग लगाएंगे और दिल्ली की तरफ हवा बहकर धुआं लेकर आएगी. किसानों के लिए ये सबसे सस्ता और आसान तरीका होता है खरपतवार से साथ-साथ फसल के उस हिस्से को हटाने का जिसका वो कोई इस्तेमाल नहीं कर सकते.

गर्मियों में जो एरोसॉल हवा में घुलता है उसकी ऊंचाई 5 से 6 किलोमीटर तक रहती है इसलिए स्मॉग जैसी किसी भी स्थिति से निजाद पाई जा सकती है. उतनी ऊंचाई पर हवा ही धुएं को बहा कर ले जाती है, लेकिन सर्दियों में क्योंकि कोहरा भी होता है इसलिए ये ऊंचाई 1-1.5 किलोमीटर रह जाती है और दिल्ली के आस-पास से कोई हवा बाहर नहीं बहती इसलिए समस्या बढ़ जाती है और दिल्ली में स्मॉग आ जाता है.

ये तो सिर्फ अक्टूबर की ही बात है, लेकिन अगर यहीं हम पिछले साल की बात करें तो पिछले साल 1 महीने के अंदर खेतों में आग लगाने का सिलसिला भी बढ़ा था और धुंध के साथ प्रदूषण ने भी दिल्ली को घेर लिया था. 

नासा, खेत, आग, भूंसी, प्रदूषण, दिल्लीपिछले साल नासा की उसी वेबसाइट पर ये तस्वीरें दी गई थीं. 

जो तस्वीरें आई हैं वो सिर्फ भूंसी जलाने वाले मौसम की शुरुआत दिखा रही हैं और पिछले साल की तरह इस साल भी आने वाले मौसम में समस्या बढ़ने वाली है क्योंकि ज्यादा से ज्यादा किसान अपने खेतों के साथ यही करेंगे. इसके कारण दिल्ली की हवा में PM 2.5 पॉल्यूटेंट की मात्रा बढ़ जाती है. अब देखना ये है कि इस बार सरकार क्या कुछ कर पाती है जिससे किसानों की समस्या भी न बढ़े और दिल्ली वालों की हर सांस प्रदूषित न रहे.

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