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Updated: 03 नवम्बर, 2018 06:13 PM
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
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दुनिया में एक महिला होना जितना मुश्किल है, उतना ही महंगा भी है. महंगाई कितनी है वो तो आप जानते ही हैं, लेकिन महिला होना अपने आप में महंगा सौदा है. कैसे? पत्नियों के पार्लर जाने से लेकर उनके मेकअप, जूलरी, कपड़ों पर आप जो खर्च करते हैं क्या वो काफी नहीं है? खैर, यहां कपड़ों और जूलरी को अगर विलासिता की श्रेणी में रखा जाए तो भी महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी देखभाल से जुड़े उत्पाद हों या उनके सौंदर्य से जुड़े, यहां तक कि उनके गर्भनिरोधक भी पुरुषों की तुलना में काफी महंगे हैं.

देखा जाए तो ये एक सामान्य सच है, लेकिन एक शोध ने इस सच को और भी पुख्ता कर दिया है. स्वास्थ्य और सौंदर्य प्रसाधन बनाने वाली एक कंपनी Currentbody द्वारा किया गया शोध बताता है कि दुनिया के किस देश में महिलाएं इन जरूरी चीजों पर कितना खर्च कर रही हैं. साथ ही ये भी पता चलता है कि एक ही चीज के दामों में देशों में कितना फर्क है. इस शोध में 22 देशों को शामिल किया गया और इस बात का ध्यान रखा गया कि इनमें ज्यादा से ज्यादा संस्कृतियां सम्मलित हों.

womanमहिलाओं के खर्चे कम नहीं हैं

पहले बात उसकी जिसे महिलाओं का अधिकार कहा गया है-

गर्भनिरोधक-

लोग भले ही ये सोचते हों कि गर्भनिरोधक इस्तेमाल करना महिलाओं का अधिकार है, लेकिन कई देशों में ऐसा प्रतीत ही नहीं होता जबकि कई देश में महिलाओं के लिए गर्भनिरोधक मुफ्त दिए जाते हैं. 41 प्रतिशत देश अभी भी महिलाओं से इसके लिए हर महीने 23.10 पाउंड (करीब 2100 रुपए) प्रति माह तक वसूल रहे हैं. रूस में दिए जाने वाले गर्भनिरोधक सबसे ज्यादा महंगे हैं. जबकि अर्जेंटीना, कनाडा, चीन, क्रोएशिया, डोमिनिकन गणराज्य, भारत, इंडोनेशिया और यूके इसके लिए पैसे नहीं लेते.

dataआंकड़ों से महंगाई का अंदाजा लगाइए

सेनिटरी उत्पाद-

महिलाओं के सैनिटरी उत्पाद जो उनका मूलभूत अधिकार है, उसके लिए भी पैसा वसूला जाता है. कई देश जहां इसके लिए महिलाओं को मुफ्त सैनिटरी पैड्स उपलब्ध कराते हैं वहीं कई देशों में अब भी इसके लिए अच्छा खासा पैसा देना पड़ता है. अगर महिला जापानी है तो उसके पीरियड उसे काफी महंगे पड़ते हैं. वहां सैनिटरी प्रोडक्ट्स की कीमत 10.88 पाउंड (करीब 1000 रुपए) है, जो पीरियड के लिहाज से उसे बेहद महंगा देश बनाती है. और इस लिहाज से भारत सबसे सस्ता है क्योंकि यहां सैनिटरी पैड्स का एक सामान्य पैकेट भी 70 रुपए में मिल जाता है.

dataशोध के नतीजे इस प्रकार हैं

अब बात सौंदर्य की-

आम तौर पर एक महिला महीने में एक बार पार्लर चली ही जाती है क्योंकि पार्लर जाना अब लग्जरी नहीं जरूरत है. बहुत बड़ा खर्च न भी करें तो फेशियल, क्लीनिंग, वैक्सिंग, हेयर कट तो सामान्य जरूरत है.

- वैक्सिंग भले ही दर्दभरी हो, लेकिन ज्यादातर महिलाएं करवाती हैं. फिनलैंड में वैक्सिंग सबसे ज्यादा महंगी है. यहां इसके लिए करीब 73 पाउंड (करीब 6900 रुपए) खर्च करने होते हैं, जबकि भारत में ये सबसे सस्ती है जिसके लिए करीब 300 रुपए खर्चने होते हैं.

- यूएई में जहां महिलाओं को बाल कटवाने के लिए 88 पाउंड (करीब 8200 रुपए) खर्च करने होते हैं, वहीं फिलीपीन्स में इसके लिए केवल 8 पाउंड (करीब 750 रुपए) देने होते हैं. भारत में पुरुष भले ही 60 रुपए में अपने बाल कटवा लेते हों लेकिन महिलाओं के हेयरकट के लिए कम से कम 250 रुपए देने होते हैं.

अगर पार्लर जाने को भी आप लग्जरी कहें तो भी घर पर जो महिलाएं अच्छे ब्रांड के फेसवॉश, क्लेंज़र, टोनर आदि उत्पादों का इस्तेमाल करती हैं, उनकी कीमतें भी पुरुषों के उत्पादों की तुलना में अच्छी खासी महंगी होती हैं. और यहां खास बात ये है कि इस शोध में सिर्फ उन चीजों पर बात की गई है जो ज्यादातर महिलाओं की जरूरत है. यहां महिलाओं के मेकअप, जूलरी और कपड़ों को तो सम्मलित ही नहीं किया गया है.

womanपार्लर जाना भी महिलाओं की जरूरत है

इन आंकड़ों को देखकर आप भले ही खुश हो रहे हों कि भारत में ये सब काफी सस्ता है. कम खर्चीला है, लेकिन महिलाओं के पास खर्च करने के लिए जितना पैसा होता है उसके मुकाबले यह महंगा ही है. गौरतलब है कि भारत में केवल 27% महिलाएं ही नौकरी करती हैं और खुद पर खर्च कर सकती हैं. लेकिन महिलाओं की एक बड़ी संख्या खुद पर इतना भी खर्च नहीं कर पाती, क्योंकि वो कमाती नहीं है. आप सब छोड़कर सिर्फ सैनिटरी नैप्किन ही ले लीजिए, वो तो एक महिला की वो जरूरत है जिसे हर महीने आना ही आना है, उसके लिए वो राख, कपड़ा, अखबार, लकड़ी का बुरादा जैसी अनहाइजीनिक चीजें इस्तेमाल करने को मजबूर हैं क्योंकि सैनिटरी पैड्स भारत में थोड़े महंगे हैं और महिलाओं की जेबें खाली हैं.

भारत में ये सब भले ही सस्ता लग रहा हो लेकिन फिरभी महंगा है. खूबसूरत लगना किसे अच्छा नहीं लगता, लेकिन क्या घर पर आने वाली मेड पार्लर जाकर वैक्सिंग, फेशियल या हेयरकट करवाती है? ऐसी कितनी ही महिलाएं है जिनके लिए भारत में इन चीजों का सस्ता होना भी कोई मायने नहीं रखता, क्योंकि सस्ती होकर भी ये उनके बजट में नहीं हैं. तो अब आप क्या कहेंगे- एक महिला होना आपकी तुलना में कितना महंगा है?

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Women, Inflation, Healthcare

लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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