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Updated: 02 अक्टूबर, 2020 10:14 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
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उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के हाथरस (Hathras) में दबंगों द्वारा जो कुछ भी वाल्मीकि समाज की 20 साल की लड़की के साथ किया गया और फिर जिस तरह उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) ने सच छुपाने की नीयत से लड़की का अंतिम संस्कार किया. उससे पूरा देश क्षुब्ध है. जगह जगह धरना और प्रदर्शन हो रहे हैं. मांग की जा रही है कि या तो सरकार घटना में शामिल चारों अभियुक्तों को फांसी दे नहीं तो ये कह दे कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा झूठा है. घटना ने देश की राजनीति में भी भूचाल ला दिया है. कांग्रेस (Congress) से लेकर आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) और तृणमूल कांग्रेस (Trinmool Congress) तक लगभग सभी दल उत्तर प्रदेश की योगी सरकार (Yogi Government) के विरोध में मुखर होकर सामने आ गए हैं. आरोप लग रहे हैं कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार बेटियों को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम है. घटना को लेकर देश भर में उबाल है ऐसे में अपने एक बयान से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज रह चुके मार्कंडेय काटजू (Markandey Katju) ने एक नई बहस को आयाम दे दिए हैं. काटजू ने हाथरस गैंगरेप (Hathras Gangrape) घटना के लिए बेरोजगारी (Unemployment) को जिम्मेदार ठहराया है. काटजू ने घटना की निंदा तो की लेकिन ये कहकर विवाद खड़ा कर दिया कि ये अपराध सिर्फ बेरोजगारी के कारण हुआ है.

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ध्यान रहे कि समसामयिक विषयों पर अक्सर ही अपने बयानों के चलते सुर्खियां बटोरने वाले पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने जाने अनजाने ऐसा बहुत कुछ कह दिया है जो न सिर्फ विवादास्पद है बल्कि बेहूदा और मानवता को शर्मसार करने वाला है.

तो क्या कह दिया काटजू ने

हाथरस में जो कुछ भी 20 साल की दलित महिला के साथ हुआ उसपर अपने मन की बात करते हुए काटजू ने अपने फेसबुक पर एक लंबा लेख लिखा है. अपने लेख में काटजू ने कहा है कि यदि रेप के मामलों को कम करना है तो फिर लोगों को रोजगार देना होगा.

काटजू द्वारा लिखी गयी इस फेसबुक पोस्ट का यदि अवलोकन किया जाए तो काटजू लिखते हैं कि, बलात्कार के मामलों में वृद्धि के पीछे देश में बढ़ती बेरोजगारी एक कारण है. उन्होंने लिखा है कि , हाथरस गैंगरेप की कड़ी निंदा करता हूं और दोषियों को सख्त से सख्त सजा की मांग करता हूं. इससे जुड़ा एक और नजरिया है, जिसपर विचार करने की जरूरत है. भारत जैसे रूढि़वादी देश में सेक्स शादी के बाद ही किया जा सकता है. लेकिन जब बड़े पैमाने पर बेरोजगारी है तो बड़ी संख्या में युवाओं की शादी नहीं होगी. क्योंकि कोई लड़की बेरोजगारी से शादी नहीं करेगी.

मामला तूल पकड़ने के बाद काटजू ने अपनी सफाई दी गया और कहा है कि वह रेप को ठीक नहीं ठहरा रहे बल्कि इसकी निंदा करते हैं.

काटजू की पोस्ट के बाद इस बात की पुष्टि हो जाती है कि इस नाजुक मौके पर उनकी ये छिछली बातें लोगों को बिल्कुल भी अच्छी नहीं लगी हैं. लोगों का यही तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट का एक रिटायर जज आखिर कैसे ऐसी बेबुनियाद और सतही बातें कर सकता है. काटजू का ये फेसबुक पोस्ट इंटरनेट पर वायरल हुआ है और जैसे रिएक्शन्स काटजू की बातों पर आए हैं उन्होंने तसदीख कर दी है कि इन वाहियात बातों के मद्देनजर लोग उनके साथ बिल्कुल भी नहीं हैं.

@jikookssii नाम की यूजर ने ट्वीट किया है कि यानी इंसान एक ऐसा जानवर है जो अपनी 'इच्छाओं' पर काबू नहीं रख सकता. इन्हें संतुष्ट रखने की जरूरत है वरना ये किसी को भी अपना निशाना बना सकते हैं.

लोगों को तर्क है कि उन्होंने इससे ज्यादा वाहियात चीज शायद ही कभी पढ़ी हो.

लोगों का कहना है कि काटजू रेप को बेरोजगारी से जोड़कर कहीं न कहीं बलात्कार जैसे घिनौने कृत्य का समर्थन कर रहे हैं.

काटजू ने भले ही सही उद्देश्य को लेकर अपनी बातें कही हों लेकिन जैसा रुख जनता का उनके प्रति सोशल मीडिया पर है साफ़ है की एक जज के रूप में काटजू ने अपनी थू थू स्वयं कराई है और अब प्रतिक्रियाओं के रूप में वो उसी का खामियाजा भुगत रहे हैं.

बहरहाल अब जबकि काटजू की किरकिरी हो चुकी है. कई बातें साफ़ हो गयी हैं. कहीं न कहीं हमें ये भी पता चल चुका है कि आज भी लोग इस देश में रेप जैसी चीज को कैसे देखते हैं और उसे किस बेशर्मी से जस्टिफाई करते हैं.

कोई जाहिल गंवार होता तो एक बार उसकी बातों को इग्नोर किया जा सकता था. काटजू देश की सर्वोच्च अदालत में जज रह चुके हैं. तमाम फैसले उनकी कलम लिख चुकी होगी। उसके बाद अब जब वो ऐसी बातें करते हैं तो उनकी काबिलियत पर शक होना लाजमी है. अंत में बस इतना ही कि इतने संवेदनशील विषय पर बोलते हुए काटजू ने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं बल्कि कुल्हाड़ी पर पैर मारा है जो हुआ उसके पूर्ण रूप से जिम्मेदार वो खुद हैं.

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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