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Updated: 10 जुलाई, 2019 05:10 PM
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एड्स के प्रति जागरुक होने के लिए सरकार अपनी ओर से काफी प्रयास कर रही है. और इसी कड़ी में गोव राज्य में एक अच्छी शुरुआत होने की उम्मीद की जा रही है. गोवा के स्वास्थ मंत्री विश्वजीत राणे का कहना है कि गोवा में शादी के रजिस्ट्रेशन से पहले एचआईवी टेस्ट करवाना अनिवार्य किया जाएगा. हालांकि ये टेस्ट करवाना अभी जरूरी नहीं है लेकिन इस योजना को कानूनी मान्यता मिलते ही गोवा में शादी से पहले HIV test करवाना अनिवार्य हो जाएगा.

ये सब करना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि दुनिया में भारत तीसरा देश है जहां एचआईवी पीड़ितों की संख्या सबसे ज्यादा है. देश में लगभग 2.1 मिलियन वयस्क और बच्चे कथित तौर पर एचआईवी के साथ जी रहे हैं. इसलिए ये बहुत जरूरी है कि स्वास्थ्य से जुड़ी ये जरूरी जांच शादी से पहले ही करवा ली जाएं.

हमारे यहां शादी से पहले जन्म कुंडली मिलाने का रिवाज होता है. लड़का लड़की की ग्रह दषाएं देखकर सुखद भविष्य की उम्मीद की जाती है. ये देखा जाता है कि लड़का-लड़की के गुण कितने मिलते हैं, कोई दोष तो नहीं. और दोष मिल भी जाता है तो उसके पहले ही उपाए कर लिए जाते हैं. जैसे मांगलिक है तो शादी पेड़ से करवा दी जाती है. या कोई ग्रह भारी है या लड़का गुस्से वाला है तो मोती पहना दिया जाता है. ऐसे तमाम उपाए कर लिए जाते हैं.

marriageकुंडली मिलाने से भी ज्यादा जरूरी है स्वास्थ्य जांच

अब इसे समझने की जरूरत है. पौराणिक समय में लोग सिर्फ ज्योतिष पर ही निर्भर थे इसीलिए कुंडली मिलान किया जाता था. जबकि ये उस दौर का टेस्ट होता था जब विज्ञान ने इतनी तरक्की नहीं की थी. पर अब मेडिकल साइंस इतनी तरक्की कर चुका है कि आने वाले समय में स्वास्थ्य संबंधित बीमारियों के बारे में कुछ टेस्ट के जरिए पता चल सकता है. जैसे पति-पत्नी का ब्लड टेस्ट बता देता है कि होने वाले बच्चे को कोई समस्या तो नहीं होगी, बुढापे में होने वाले रोगों का पता चल जाता है. आदि और अगर ये बातें पहले ही पता लग जाएं तो इनका निवारण भी पहले ही हो जाए.

सिर्फ एचआईवी की जांच ही जरूरी नहीं है, इसके अलावा बहुत से ऐसे टेस्ट हैं जिन्हें डॉक्टर शादी से पहले लड़का और लड़की दोनों को करवाने की सलाह देते हैं. आज उन जरूरी मेडिकल टेस्ट के बारे में जानते हैं जो शादी से पहले करवा लेने चाहिए.

1. HIV और अन्य यौन संचारित रोग(STDs) की जांच

एचआईवी एड्स, Syphilis, Gonorrhoea, Herpes, Chancroid, hepatitis C आदि STD रोग यानी यौन संचारित रोग कहे जाते हैं. और यौन संबंधों की वजह से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक आसानी से पहुंच सकते हैं. एड्स तो जानलेवा है. इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि आपका होने वाला साथी पहले से ही इससे संक्रमित तो नहीं. ये वो जानकारी है जिसे छिपाया नहीं जाना चाहिए ताकि बाद में कोई समस्या न हो. ये भी हो सकता है कि एक व्यक्ति को इस तरह का रोग हो और उसका साथी उसके साथ रहना चाहता हो, तो ऐसे में वो पीड़ित की देखभाल कर सकता है बशर्ते कि उसे अंधेरे में न रखा गया हो.

hiv testदुनिया में भारत तीसरा देश है जहां एचआईवी पीड़ितों की संख्या सबसे ज्यादा है

2. खून की जांच (Rh factor test)

आपको अपना ब्लड ग्रुप तो पता ही होता है लेकिन शादी से पहले अपने पार्टनर का ब्लाड ग्रुप जानना भी उतना ही जरूरी है. पहले बात तो इससे ये भी पता चलता है कि जरूरत पड़ने पर आप और आपका साथी एकदूसरे को ब्लाड डोनेट कर सकते हैं कि नहीं. और दूसरी सबसे जरूरी बात ये है कि दोनों का ब्लाड ग्रुप आने वाले बच्चे के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है. इसके लिए Rhesus factor test या Rh factor test जरूरी होता है. व्यक्ति का Rh + होना आम है लेकिन Rh- कम ही लोगों में होता है. Rh निगेटिव होना कोई बीमारी नहीं है लेकिन अगर गर्भवती महिला Rh निगेटिव और पिता Rh पॉजिटिव तो ये बच्चे के लिए खतरनाक साबित होता है. ऐसे में विशेष देखभाल की जरूरत होती है. अगर ये बातें पहले से पता होती हैं तो इसका उपाय पहले से ही कर लिया जाता है.

3. फर्टिलिटी जांच

आम तौर पर शादी होती है उसके कुछ समय बाद बच्चा प्लान किया जाता है. सही समय पर शादी हो तो कोई समस्या नहीं आती लेकिन अगर शादी देर से की गई हो तो गर्भधारण करने में परेशानी आती है. इसलिए लड़का और लड़की दोनों का fertility test करवाना जरूरी है. कई मामलों में समय पर शादी होती है फिर भी लोग माता-पिता नहीं बन पाते और कारण दोनों में से किसी एक की यही समस्या हो सकती है. इसलिए पहले ये टेस्ट करवा लिया जाए, जिससे आगे चलकर किसी तरह की नाराजगी न रहे. हालांकि हमारे समाज में इस टेस्ट का होना कई लोगों के आत्मसम्मान का सवाल होता है. अच्छाई से ज्यादा बुराई दे जाता है. लेकिन बाद में मिलने वाले शॉक से बेहतर है कि पहले ही सब चीजें साफ हों. ये टेस्ट बहुत आसानी से हो जाता है. महिलाओं के लिए आम तौर पर एक ब्लड टेस्ट या बहुत हुआ तो अल्ट्रासाउंड होता है और पुरुषों को अपने सीमन की जांच करवानी होती है.

4. जेनेटिक टेस्ट /Chronic medical conditions

अगर आप स्वास्थ के मामले में सतर्क रहते हैं तो आपको अपने होने वाले साथी की फैमिली मेडिकल हिस्ट्री भी पता होनी चाहिए. क्योंकि कई बीमारियां एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जाती हैं. चाहे वो डायबिटीज़ हो, हाइपरटेंशन हो, दिल, किडनी या लिवर की बीमारी हो, ब्रेस्ट कैंसर, Cystic Fibrosis, किसी भी तरह का कैंसर हो यहां तक कि गंजापन भी. इसलिए शादी के कुछ सालों के बाद होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में शादी से पहले ही जान लेने में कोई बुराई नहीं है. क्योंकि इसके लिए पहले से ही बचाव किए जा सकते हैं. इसके लिए सामान्य ब्लड टेस्ट से काम नहीं चलेगा बल्कि पूरा चेकअप करवाना होगा.   

5. थैलेसीमिया टेस्ट

Thalassemia एक अनुवांशिक रक्त रोग है. इस रोग के कारण रक्त/हीमोग्लोबिन निर्माण के कार्य में गड़बड़ी होने के कारण रोगी को बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता है. भारत में हर साल 7 से 10 हजार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित पैदा होते हैं. इसलिए बेतर तो यही है कि शादी से पहले ही इस टेस्ट को करवा लिया जाए जिससे आने वाले बच्चे को समस्या न हो. थैलेसीमिया का पता पूर्ण रक्त गणना (CBC) टेस्ट से पता चल जाता है. यह टेस्ट ये पता लगाने में मदद करता है कि आपको थैलेसीमिया माइनर है या नहीं. थैलेसीमिया माइनर होना कोई समस्या नहीं है, लेकिन जब थैलेसीमिया  माइनर वाले दो लोग शादी करते हैं तो उनके होने वाले बच्चे में थैलेसीमिया मेजर हो सकता है जो चिंता का विषय होता है.

blood testहर साल 7 से 10 हजार बच्चे थैलेसीमिया से पीड़ित पैदा होते हैं

6. मानसिक स्वास्थ्य की जांच

भारत में तो व्यक्ति का Mental health status जानना बहुत जरूरी है. क्योंकि यज्यादातर अरेंज्ड मैरिज होती हैं जहां लड़का लड़की की तस्वीरें देखकर रिश्ता पसंद या नापसंद किया जाता है. लेकिन तस्वीर देखकर यहां तक कि दो बार मिल लेने पर भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य का पता नहीं चल पाता. आप किसी को एक बार देखकर ये नहीं पता कर सकते कि उसे डिप्रेशन, schizophrenia या कोई personality disorder तो नहीं है. व्यक्ति का बहुत गुस्सैल होना भी उसके मानसिक स्वास्थ्य से ही जुड़ा है. आजकल मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरुकता बड़ी है इसलिए ये बहतर है कि रिश्ता जो़ड़ने से पहले ही एक बार मनोवैज्ञानिक टेस्ट भी करवा लिया जाए. इस टेस्ट को psychometric test कहा जाता है और एक या दो दिन का समय लगता है. मनोवैज्ञानिक आपसे कुछ सवाल पूछकर और तस्वीरें दिखकार ये टेस्ट कर लेते हैं.

तो जो बंधन प्यार का हो और उम्र भर का हो उसे जोड़ने से पहले क्या ये जरूरी नहीं कि इन बातों का भी ध्यान रखा जाए. हम ये नहीं कहते कि कुंडली दिखाना पुरानी बात हो गई. अपने संतोष के लिए कुंडली भी मिलाएं लेकिन कुंडली के साथ साथ लड़के और लड़की के ये मेडिकल टेस्ट भी करवाएं. क्योंकि दो लोगों का भविष्य सिर्फ गुण मिलने से ही नहीं उनके स्वस्थ होने पर भी निर्भर करता है.

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