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Updated: 12 फरवरी, 2021 05:46 PM
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भारत में 16 जनवरी से कोरोना के खिलाफ टीकाकरण अभियान (Coronavirus Vaccination) की शुरुआत हुई. इस दौरान करीब 6 मिलियन से अधिक लोगों को टीका (Covid-19 Vaccine) लगाया जा चुका है. इस तरह अमेरिका और ब्रिटेन के बाद कोविड वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccine) के मामले में भारत तीसरे नंबर पर है. हालांकि साइड इफेक्ट (Coronavirus Vaccination side effect) के डर की वजह से अभी भी कई लोग टीका नहीं लगवा रहे हैं. इसे ध्यान में रखते हुए मेदांता अस्पताल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन (Medanta Hospital Chairman Dr. Naresh Trehan) ने पांच बातें बताई हैं, जो साइड इफेक्ट के डर को खत्म कर देती हैं. डॉ. नरेश ने बताया कि क्या साइड इफेक्ट को लेकर किसी को टेंशन लेनी चाहिए या नहीं. साथ ही उन लोगों को क्या करना चाहिए जो इस वजह से चिंतित हैं.

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1- अगर टीका लगने के कुछ घंटों बाद हल्का बुखार हो या सिर दर्द हो तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. आमतौर पर सभी वैक्सीन के साइड-इफेक्ट होते हैं. इसका मतलब यह नहीं है कि सभी नुकसानदायक होते हैं. इसके लिए पेरासिटामोल लिया जा सकता है. हां अगर बुखार का तापमान 102 डिग्री से ज्यादा हो तब संबंधित अधिकारी और डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी होता है.

2- कुछ लोगों को इंजेक्शन लगने के आधे घंटे के अंदर स्ट्रांग एलर्जी हो सकती है. हालांकि यह काफी दुर्लभ है और उन लोगों में होता है जो पहले से किसी तरह की एलर्जी की संभावना से पीड़ित होते हैं. ज्यादातर टीकाकरण केंद्रों पर एहतियात बरता जाता है और सही देखभाल व दवाई के जरिए इलाज किया जाता है. अभी तक भारत में वैक्सीनेशन से संबंधित कोई मौत नहीं हुई है. टीकाकरण के बाद कुछ लोगों की मौत की जानकारी मिली लेकिन टीके को सीधे तौर पर मौत के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है.

3- कई लोग टीका लगवाने के बाद दूसरी खुराक लेने में लापरवाही कर देते हैं. याद रखें समय पर दूसरी खुराक लेना बहुत जरूरी है. साथ ही वैक्सीनेशन के बाद डॉक्टर और नर्सों की सलाह का पालन करना न भूलें. पहली बार अगर कोई मामूली साइड इफेक्ट हुआ हो तो भी दूसरी खुराक लेना न छोड़ें. जब तक साइड इफेक्ट हानिकारक ना हों तब तक खुद को दूसरे शॉट लेने से न रोकें.  

4- सबसे जरूरी बात अफवाहों से बचें. अभी तक ऐसा कोई डेटा नहीं है जिसके आधार पर यह कहा जा सके कि वैक्सीनेशन से प्रजनन क्षमता कम होती है. दिल का दौरा पड़ सकता है या यह बुजुर्गों के लिए खतरनाक है. यह सब सोशल मीडिया की देन है. इसलिए इनका शिकार होने से बचें. दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाने वाले सभी टीकों को परखा जाता है. यूके में कोविल्ड पहले ही बुजुर्गों को सफल रूप से दिया जा चुका है. अगर आप नार्वे में फाइजर के साथ जो हुआ उससे घबरा रहे हैं तो चिंता छोड़ दीजिए, क्योंकि ये दोनों अलग-अलग टीके हैं. 

5- हमारे पास जो डेटा मौजूद हैं उसपर भरोसा रखें. देश में लगभग 6 मिलियन लोगों को टीका लगाया जा चुका है. जिनमें साइड इफेक्ट दर काफी कम हैं. वहीं यह टीका विश्व स्तर पर लगाया जा रहा है. इसलिए हम एक-दूसरे के अनुभव से काफी कुछ सीख सकते हैं. कई देशों में बुजुर्गों को टीके लगाए हैं उन्हें सकारात्मक परिणाम मिले हैं.

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