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Updated: 31 दिसम्बर, 2016 02:52 PM
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साल 2016. ये वो साल है जिसमें दुनिया के दो बड़े शहर तबाह हो गए. एक है मोसुल और दूसरा एलेप्पो. इराक और सीरिया सहित अरब क्रांति की चपेट में आए ऐसे कई इलाके हैं जहां रहना जहन्नुम की सिटिजनशिप लेने जैसा है. अगर सिर्फ मोसुल और एलेप्पो की बात करें तो वर्ल्ड हैरिटेज साइट की लिस्ट में शामिल ये शहर अब खंडहर बन चुके हैं. जहां बाकी दुनिया नए साल की पार्टी की तैयारी में है वहीं इन इलाकों के लोग अगले दिन कैसे जिंदा रहना है और कैसे अपना पेट भरना है इसके लिए मेहनत कर रहे हैं. क्या आप जानते हैं इन इलाकों में नया साल कैसा है?

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देखते हैं कुछ आंकड़े-

अक्टूबर 2016 से उत्तरी इराक के शहर मोसुल में मिलिट्री ऑपरेशन चल रहा है. इराकी सरकार इस शहर से IS को हटाने की कोशिश में है. मोसुल पिछले काफी समय से IS की दहशत में जी रहा है, लेकिन साल 2016 में जो खून-खराबा देखा गया है वो दिल दहलाने वाला है. बंदूकें, मिसाइल अटैक आदि को आम थे, लेकिन मोसुल की गलियों में अब टैंक घूमते हैं.

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 बच्चों के लिए खाना ढूंढना सबसे बड़ी खुशी होती है

मोसुल में नए साल के पटाखे हैलिकॉप्टर से फेंके जा रहे हैं. फर्क इतना है कि ये फटाके किसी ना किसी की जान लेकर जाते हैं. 2014 में इस्लामिक स्टेट ने मोसुल पर कब्जा किया था और उसके बाद ही करीब 1 लाख से ज्यादा लोग रिफ्यूजी बन गए थे. मोसुल में इसाइयों के सर काटकर क्रिसमस तक मनाया गया. सिर्फ गोला-बारूद से ही नहीं इराकी सरकार ने मोसुल में जरूरी संसाधनों की सप्लाई भी बंद करने का फैसला कर लिया है. अब आलम ये है कि जो भी मोसुल में बचा है उसका नया साल कैसा होगा इसका अंदाजा आप लगा ही सकते हैं.

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 मोसुल में सड़कों पर टैंक चलते हैं

दूसरा शहर है सीरिया का एलेप्पो. ये वो शहर है जिसके लोगों ने जहन्नुम सिर्फ देखा ही नहीं जिया भी है. यहां बच्चे लुका छुपी सिर्फ इसलिए खेलते हैं ताकी वो गोलियों से बच सकें. एलेप्पो की इमर्जेंसी रिस्पॉन्स टीम के कार्यकर्ताओं का कहना है कि बच्चे भी यहां अब अपने अलग खेल खेलते हैं. छोटे बच्चों को उन्होंने 'सत्ता और विद्रोहियों' का खेल खेलते देखा. ये उनके खेल का नाम था.

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 सीरिया में अब चोट लगने पर बच्चे रोते नहीं. वो दहशत में हैं.

यहां वीडियो गेम में नहीं खेले जाते. यहां असल में कार और बिल्डिंग गिरते हुए देखी जाती हैं. लोग मरते हैं. किसी भयानक फिल्म जैसी जिंदगी है लोगों की यहां.

यूनाइटेड नेशन का कहना है कि एलेप्पो बच्चों के लिए दुनिया की सबसे खतरनाक जगह है. यहां तीन में से एक बच्चा ही जिंदा रह पाता है. एलेप्पो में ही अकेले छह सालों में साढ़े चार लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. एलेप्पो के एलन कुर्दी जैसे बच्चे अपना नया साल नहीं मना पाएंगे. जो बचे हैं उन्होंने तो रोना तक छोड़ दिया है. वो आदि हो चुके हैं, वो दहशत में है. उनके लिए नया साल सिर्फ जिंदा रहने का दंगल है.

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 शहर खंडहर बन चुका है

सीरिया में सीजफायर रोकने के लिए सरकार कोशिशें कर रही है. मोसुल में भी सरकार अब शांती बहाल करने की कोशिश कर रही है. इतनी खराब हालत में जहां हम और आप जैसे लोग इसी उधेड़बुन में हैं कि नोटबंदी से कितनी परेशानी हो रही है और हम कैसे नए साल की पार्टी करेंगे, जनवरी में सब ठीक होगा या नहीं वहां अगर एक सवाल किया जाए कि क्या ऐसी जहन्नुम जैसी जगह पर आप नया साल मना सकते हैं क्या तो आपका जवाब क्या होगा?

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ऐसे शहर जहां बच्चों ने तक जीने की उम्मीद छोड़ दी हो वहां के इंतजाम के बारे में आप क्या कहेंगे? चलिए आज एक उम्मीद हम करते हैं कि ये दोनों शहर 2017 में नई उम्मीद के साथ खड़े हों और यहां शांती की पहल हो.

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