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Updated: 25 सितम्बर, 2020 04:35 PM
ओम प्रकाश धीरज
ओम प्रकाश धीरज
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गुप्तेश्वर पांडे... बिहार के पूर्व डीजीपी. जी हां, पूर्व डीजीपी इसलिए कहा गया, क्योंकि जनाब ने 2 दिन पहले ही बिहार पुलिस महानिदेशक के पद से समय पूर्व रिटायरमेंट यानी वीआरएस की घोषणा कर दी है. हालांकि, इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जिनमें एक कारण ये भी है कि गुप्तेश्वर पांडे अब राजनीति की पिच पर नई पारी शुरू करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल गुप्तेश्वर पांडे बिग बॉस फेम सिंगर दीपक ठाकुर के साथ ‘रॉबिनहुड बिहार के’ गाने में अपने चुलबुल पांडे अवतार की वहज से खासे चर्चित हो रहे हैं और साथ ही विवादों की फेहरिस्त भी लंबी कर रहे हैं, जहां एक पुलिस संगठन ही उनके फिल्मी स्टंट पर सवाल उठा रहा है और कह रहा है कि क्या डीजीपी जैसे सबसे बड़े पद पर रहने वाला आईपीएस अपनी अगली पीढ़ी को यही संदेश दे रहा है कि वह दबंग दिखे और पुलिसकर्मियों का ऐसा चेहरा समाज के सामने प्रस्तुत करे, जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है?

फिलहाल जिस मुद्दे पर हम बात करने जा रहे हैं, वो ये है कि बीते 3 महीने के दौरान सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में बिहार के किसी शख्स ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जगत पर नाम-बदनाम होते हुए सुर्खियां बटोरी हैं तो वह बेशक गुप्तेश्वर पांडे हैं. सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में विवादित बयानबाजी को लेकर हो या सीबीआई जांच की मांग को लेकर या रिया चक्रवर्ती को औकात दिखाने की बात करने से लेकर मुंबई पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाने को लेकर, गुप्तेश्वर पांडे ने हर मोर्चे पर चौका-छक्का जड़ने की सफल-असफल कोशिशें कीं और लगातार मीडिया में छाए रहे. इस मुद्दे को उन्होंने बिहारी अस्मिता से जोड़ने के साथ ही कथित रूप से व्यक्तिगत लाभ के लिए भी खूब उठाया. एक के बाद एक बयान ने तो जैसे ये साबित कर दिया कि गुप्तेश्वर पांडे डीजीपी की बजाय किसी पार्टी के प्रवक्ता की तरह बात कर रहे हैं. हालांकि, गुप्तेश्वर पांडे ने हमेशा इन बात से इनकार किया और खुद को ऐसे पेश किया, जैसे वह सुशांत सिंह राजपूत की मौत के खासे आहत हैं और बिहार के इस लाल के लिए न्याय की मांग कर रहे हों.

रिटायरमेंट की घोषणा के साथ ही दुनिया को दिखाया दबंग अंदाज

बीते 22 सितंबर को गुप्तेश्वर पांडे के जीवन की दो बड़ी घटनाएं घटीं. एक तो पांडे जी ने रिटायरमेंट की घोषणा की, वहीं दूसरी तरफ उनका गाना ‘रॉबिनहुड बिहार के’ भी रिलीज कर दिया. गैंग्स ऑफ वासेपुर और मुक्काबाज फिल्म के सिंगर और बिग बॉस में नजर आए दीपक ठाकुर की आवाज में गाये इस गाने में गुप्तेश्वर पांडे बिल्कुल चुलबुल पांडे के अंदाज में दिख रहे थे. पूरा गाना गुप्तेश्वर पांडे के महिमामंडन पर आधारित था, जिसमें उन्हें जनता का हीरो बताया गया. इस गाने ने एक तरह से गुप्तेश्वर पांडे के राजनीतिक जीवन में पदार्पण की भूमिका तैयार की और पांडे जी ने भी जनता को ये बताने की कोशिश की कि जीवन में पुलिसकर्मी की भूमिका तो उन्होंने अच्छी तरह निभाई और जनता की सेवा की, अब वह राजनीति में आकर लोगों की दूसरे तरीके से सेवा करना चाहते हैं. पांडे ने पूर्वनियोजित तरीसे से अपने राजनीतिक जीवन का टीजर रॉबिनहुड बिहार के गाने से दिखा दिया, जिसका क्या हश्र हुआ, ये बखूबी आप जान गए होंगे. फिलहाल तो हम पांडे जी के मंसूबों की बात करते हैं.

पांडे जी का निरहुआ जैसा हाल न हो जाए!

गुप्तेश्वर पांडे ने जिस तरह से वीआरएस लेकर राजनीति में आने के संकेत दिए हैं, उससे भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव निरहुआ की याद आती है. निरहुआ ने भी खास अंदाज में राजनीति के पिच पर जलवा बिखेरने की कोशिश की थी और फिर बीजेपी टिकट पर अखिलेश यादव के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने जिस तरह की बयानबाजी की थी और नाच नौटंकी के बल पर लोकसभा चुनाव जीतने की कोशिश में अपनी भद पिटवाई थी, अब गुप्तेश्वर पांडे के रूप में वही छवि फिर से सामने आ गई है, खासकर जिस तरह से उन्होंने दीपक ठाकुर के गाने में खुद को पेश किया है. गुप्तेश्वर पांडे को शायद ये लगता है कि वह भी नाच नौटंकी और चुलबुल पांडे अंदाज दिखाकर बिहार की जनता का दिल जीत सकते हैं और इससे फायदा उठा सकते हैं. लेकिन वह भूल गए हैं कि यह सोशल मीडिया की जनता है, जिसे सबकुछ पता चलता रहता है कि कौन किस मकसद से क्या कर रहा है और इसका अंजाम क्या होगा? ऐसे में गुप्तेश्वर पांडे को सोचना होगा कि जनता का दिल कैसे जीतें.

लोगों को गुप्तेश्वर पांडे के मंसूबे पता हैं...

गुप्तेश्वर पांडे ने जब बीते 22 तारीख को वीआरएस की घोषणा की तो लोगों ने सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना की और कहा कि वह राजनीति में जाने के लिए अपनी नौकरी छोड़ रहे हैं. साथ ही उनपर ये आरोप भी लगे कि पांडे जी तो तो मातम में भी अवसर ढूंढ लिया. दरअसल, लोगों ने आरोप लगाए कि वह सुशांत सिंह राजपूत की न्याय की मांग करते हुए अपना हित साध रहे थे. बिहार की कानून-व्यवस्था को लेकर भी गुप्तेश्वर पांडे पर काफी आरोप लगे कि खुद को बिहार का रॉबिनहुड बताने वाले पांडे जी के राज्य में कानून व्यवस्था की धज्जी उड़ी हुई है और वह खुद को जनता का हीरो बता रहे हैं. आलोचनाओं से आहत बिहार के पूर्व डीजीपी ने बीते बुधवार यानी 23 सितंबर को फेसबुक लाइव कर अपने बारे में पूरी कहानी बताई और कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में उनपर किसी तरह का आरोप न लगे कि उन्होंने इस पार्टी का पक्ष लिया या उस पार्टी का पक्ष लिया, इसलिए मैंने स्वेच्छा से रिटायर होने का फैसला किया. गुप्तेश्वर पांडे ने राजनीति में आने की बात करने या किसी पार्टी को जॉइन करने के अटकलों पर कहा कि मैंने फिलहाल किसी पार्टी को जॉइन नहीं किया है, लेकिन अगर जनता चाहेगी तो मैं जरूर राजनीति में आऊंगा और लोगों की सेवा करूंगा. पांडे जी ने अपने इलाके बक्सर का विशेष रूप से जिक्र किया और कहा कि आने वाले समय में वह बक्सर से ही अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत करूंगा.

क्या वाकई रॉबिनहुड पांडे हैं?

यहां एक बात का जिक्र करना चाहूंगा, जो कि गुप्तेश्वर पांडे कई मौकों पर बोल चुके हैं और अपने व्यवहार में भी दिखाते हैं कि उन्हें जनता के बीच रहना पसंद है और बीते 33 साल के सर्विस के दौरान वह बिहार के 25 से ज्यादा जिलों में विभिन्न-विभिन्न पदों पर रह चुके हैं. 1990 के दशक में गुप्तेश्वर पांडे करीब 4 साल के लिए बेगूसराय के एसपी बनाए गए थे और इस दौरान वह अक्सर गांव जाकर लोगों से मिलते थे और उनका हाल चाल जानते थे. गांव में वह छठ पर्व के मौके पर जाते थे और गरीबों को कंबल समेत अन्य जरूरी चीजें देते थे, जिसकी वजह से वह जनता के दिलों में अपनी जगह बनाते थे. बिहार के ज्यादातर जिलों के कुछ खास इलाकों में गुप्तेश्वर पांडे की यह छवि है और अब पांडे जी इसका फायदा उठाने की कोशिश में हैं और माना जा रहा है कि इस विधानसभा चुनाव में वह जेडीयू या बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं. बाकी अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने से पहले पांडे जी ने अपने म्यूजिक वीडियो के जरिये भूमिका तो बांध ही दी है. बाकी जनता फैसला करे कि उन्हें गुप्तेश्वर पांडे पर कितना भरोसा करना चाहिए.

राजनीति में एंट्री के लिए ये स्टंट जरूरी?

इन सबके बीच ये बताना जरूरी है कि डीजीपी जैसे अहम पद पर रहने वाले गुप्तेश्वर पांडे के हालिया स्टंट, चाहे वह सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर बयानबाजी हो, वीआरएस लेना हो या रॉबिनहुड बिहार के जैसे गाने में दबंग पुलिस अधिकारी की छवि दिखाना, ने उनकी साख पर सवालिया निशान लगा दिया है और ये भी बता दिया है कि खुद को दबंग पांडे बताने के चक्कर में उन्होंने अपनी बनी बनाई छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की है और अब जनता को भी लगने लगा है कि भले डीजीपी के रूप में हो या अन्य अहम पदों पर आसीन पांडे जी बेहतर हों, लेकिन वह राजनेता के रूप में कितने अच्छे होंगे, इसपर संशय है. वह अपने म्यूजिक वीडियो के जरिये आखिरकार साबित क्या करना चाहते हैं? क्या उन्हें ये लगता है कि बिहार की जनता इससे खुश हो जाएगी? उल्लेखनीय है कि यह दूसरी बार है जब गुप्तेश्वर पांडे अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति करते दिख रहे हैं. इससे पहले उन्होंने साल 2009 में भी वीआरएस लेकर लोकसभा चुनाव लड़ने वाले थे, लेकिन उस साल बात नहीं बनी थी. अब फिर से गुप्तेश्वर पांडे राजनीति की पिच पर जलवा बिखेरने की कोशिश करते दिख रहे हैं.

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लेखक

ओम प्रकाश धीरज ओम प्रकाश धीरज @om.dheeraj.7

लेखक पत्रकार हैं, जिन्हें सिनेमा, टेक्नॉलजी और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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