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Updated: 13 जनवरी, 2021 06:45 PM
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राह चलते कोई आदमी अगर आपकी तरफ अपना हाथ बढ़ा दे तो, आप क्या करेंगे. वहीं, मोहल्ले की आंटियां दूसरों के घरों में चल रहे किसी भी छोटे-मोटे घरेलू विवाद पर चटखारे लेती हैं. इनके बीच अगर सोशल मीडिया की बात करें तो, इस पर लोगों को अपनी हद का भान भी नहीं रहा है. आज के दौर में इंसान अपने मानवीय स्वभावों से दूर होता जा रहा है. तकरीबन दो साल पहले एक बच्चे की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी. इस बच्चे ने एक चूजे पर गलती से साइकिल चढ़ा दी थी. जिसके बाद बच्चा तुरंत चूजे को उठाकर अस्पताल पहुंचा और डॉक्टर को उसे ठीक करने के लिए पैसे भी दिए. बच्चों के अंदर दयालुता का ये भाव साधारणतया दिख ही जाता है. लेकिन क्या आज बड़ों के अंदर इस तरह के गुण पाए जाते हैं. सड़क पर हुए एक्सीडेंट को देखने के लिए रुक तो सैकड़ों लोग जाते हैं. लेकिन, घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए कुछ ही हाथ आगे बढ़ते हैं. हमारे लिए ऐसी घटनाओं में एक बड़ा इमोशनल सबक छिपा रहता है.

इंसानों से ज्यादा जानवर नजर आते हैं मानवतावादी

इन दिनों सोशल मीडिया (Social Media) पर जानवरों के दो वीडियो काफी वायरल हो रहे हैं. लोग इन वीडियोज को धड़ाधड़ शेयर कर रहे हैं. इनमें से एक वीडियो महाराष्ट्र (Maharashtra) के अहमदनगर जिले में स्थित सिद्धिविनायक मंदिर (Siddhivinayak Temple) का है. वीडियो में मंदिर के बाहर एक चबूतरे पर बैठा एक डॉग (Dog) लोगों से हाथ मिलाता और आशीर्वाद देता दिख रहा है. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया. डॉग के इस अंदाज को देखकर लोगों को सहजता से हंसी आ गई और मेरा सवाल इसी सहजता और हंसी पर टिका हुआ है. 

अगर आपसे कोई यूं ही हाथ मिलाना चाहे, तो क्या आप इतनी ही सहजता और हंसी के साथ उसे स्वीकार कर लेंगे. खुद को सांत्वना देने के लिए हमारा जवाब 'हां' में हो सकता है. लेकिन, अधिकतर लोग अपने दिल से पूछें तो, यह ना ही होगा. आपके पास आकर अगर कोई हाथ बढ़ाएगा, तो आप अनायास ही चौंक जाएंगे. यहां मैं शहरों के बारे में बातकर रहा हूं क्योंकि, गांव से अपना रिश्ता केवल नाममात्र का रहा है.

हम इनसे सीखना क्यों नही चाहते?

ऐसा ही एक दूसरा वीडियो तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के श्रीरंगम में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर (Sri Ranganathaswamy temple) का है. अंडाल (Andal) नाम की एक हथिनी लोगों द्वारा फोटो खींचने पर शर्मा जाती है और अपने महावत से जाकर इसकी शिकायत करती है. हथिनी की बात को समझते हुए महावत उसकी सूंड को सहलाकर प्यार करता नजर आ रहा है. इस वीडियो पर लोगों ने खूब प्यार लुटाया. भाषा की सीमाओं से परे जाकर हुई बातचीत हमें बहुत कुछ समझाती है. अगर हम इसे समझना चाहें तो. लोगों का फोटो खींचना हथिनी को अच्छा नहीं लगा. यहां मेरी सूई किसी की निजता या प्राइवेसी पर आकर टंग गई. 

क्या अपने सामाजिक जीवन में हम और आप ऐसा ही बर्ताव सबके साथ करते हैं. अगर कोई व्यक्ति चाहे वो आम इंसान हो या सेलिब्रिटी, थोड़ी सी भी प्राइवेसी चाहता है, तो ये आज के समय में मिलना मुश्किल है. मोहल्ले की आंटियों से लेकर वे आदमी भी, जो किसी के घर में चल रहे मामलों में अपनी नाक और टांग घुसाने लगते हैं. उन्हें लोगों की निजता से कोई लेना-देना नहीं रहता है. अच्छा, यहां मैंने आदमियों को इसलिए जोड़ लिया ताकि मुझे नारीविरोधी ना मान लिया जाए.

इंसान भूलता जा रहा है मानवता का सिद्धांत

वैसे आजकल लोगों की याददाश्त बहुत कमजोर हो गई है. कई सालों से ऐसे वीडियोज हमारे सामने आते हैं. हम उन्हें देखते हैं और अन्य लोगों से शेयर भी करते हैं. कुछ समय बाद हम इन्हें भूल जाते हैं. सवाल ये उठता है कि क्या कभी ऐसे वीडियोज से हम कुछ सीखने की कोशिश करते हैं. आप लोग ये मत सोचिएगा कि मैं ज्ञानी बाबा बनकर आपको सलाह देने आ गया हूं. मुझमे भी कई कमियां हैं. लेकिन, मैं उन्हें दूर करने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता हूं. प्रोफेशनल होते जा रहे लोगों को आज के समय में इंसान बनने की जरूरत है. मैं भले एक अच्छा पत्रकार बन जाऊं, आप भले एक अच्छे वकील या डॉक्टर व अन्य कुछ भी बन जाएं. लेकिन, हमें एक अदद जरूरत केवल इंसान बनने की है. एक अच्छा इंसान वो होता है, जो अपने सामाजिक कर्तव्यों को बिना किसी लाग-लपेट के निभाए. मानवीय गुणों से दूर होते जा रहे लोग इंसान बनकर ही इन गुणों को पा सकते हैं.

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