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Updated: 31 मई, 2018 01:09 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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अंग्रेजी में 'Whats up' का मतलब होता है 'क्या हाल है?'. संस्कृत में यही होगा 'किम्भो'. बाबा रामदेव ने इस संस्‍कृत शब्‍द को अपने नए एप का नाम दे डाला- Kimbho. हूबहू Whatsapp जैसा एप. लेकिन रामदेव इस एप को बनाने में नकल के बाकी निशान मिटाना भूल गए, और पकड़े गए. यानी बाबा रामदेव की पतंजलि ने एप मास्टर के रूप में पहला कदम बढ़ाया ही था, जो शर्मिंदगी का कारण बन गया.

किम्भो शुरुआत से ही विवादों में फंस गया. ऐसा दावा किया जा रहा है कि पतंजलि का ये एप कॉपी किया गया था. BOLO मैसेंजर एप का डिस्क्रिप्शन और फोटो, यहां तक कि OTP फॉर्मेट भी पतंजलि के किंभो मैसेंजर ने कॉपी कर लिया था. इस एंड्रॉयड एप को गूगल ने अपने Play Store से हटा दिया है.

पतंजलि के प्रवक्ता एसके तिजारावाला ने इस एप के बारे में ट्वीट किया था और बोला था कि इसे सीधे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है. इस एप को लेकर बहुत ज्यादा उत्साहित थे और इसे जोर शोर से प्रचारित कर रहे थे.

पर किस्मत का खेल देखिए कि अब जो भी इस एप को डाउनलोड करना चाह रहा है वो नहीं कर पा रहा.

प्ले स्टोर पर नहीं है ये एप..

गूगल प्ले स्टोर से अचानक इस एप को हटा लिया गया है. अब जो भी लोग इसे सर्च करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें गूगल प्ले स्टोर पर कुछ नहीं मिल रहा. इसे शुरुआती दौर में डाउनलोड करने वालों का कहना है कि इस बीटा वर्जन वाले एप से फोन हैंग हो रहा था.

एक और दिलचस्प बात ये है कि इसे शुरुआती दौर में डाउनलोड करने वालों का डेटा बिना किसी परमीशन मांगे ही एप ने ले लिया. यहां तक कि सिक्योरिटी में खामियां इतनी कि एक यूजर कई यूजर्स के मैसेज देख पा रहा था.

आखिर क्यों डिलीट किया गया ये एप इसके पीछे सोशल मीडिया पर कई थ्योरी चल रही हैं.

पहली थ्योरी...

ये सिक्योरिटी के मामले में कितना सही है इसी बात से पता चलता है कि यहां बिना किसी खास परमीशन के यूजर का सारा डेटा भी जा रहा था और तो और दूसरे यूजर्स की जानकारी भी एक्सेस की जा रही थी.

शुरुआती दौर में किंभो एप को जिस एप से कॉपी किया गया था उसका ओटीपी टेक्स्ट भी बोलो नाम से ही आ रहा था. ये बोलो एप था जिसका डिस्क्रिप्शन भी गूगल प्ले स्टोर पर कॉपी किया गया था. bolomessenger.com के नाम से सभी रिक्वेस्ट आ रही थीं.

किम्भो, वॉट्सएप, सोशल मीडिया, पतंजलि, सोशल मीडियाये ओटीपी टेक्स्ट किम्भो एप की तरफ से आया था

ओटीपी में भी बोलो मैसेंजर एप आ रहा था. हालांकि, बाद में इस खामी को तो सही कर लिया, लेकिन फिर भी कॉपी हुआ गूगल की नजर में पड़ ही गया. इस एप को अब गूगल प्ले स्टोर से हटा दिया गया है. पूरा एक दिन भी ये एप नहीं चल पाया और गूगल ने इस डुप्लिकेट को प्ले स्टोर से बाहर कर दिया.

मज़े की बात ये है कि सिर्फ ओटीपी फॉर्मेट ही नहीं बल्कि गूगल प्ले स्टोर पर लगाई गई फोटोज भी किंभो एप ने कॉपी कर ली थी.

किम्भो, वॉट्सएप, सोशल मीडिया, पतंजलि, सोशल मीडियाडिस्क्रिप्शन के साथ-साथ एप स्टोर पर फोटोज भी कॉपी की हुई थीं.

इस एप को यही कहकर लॉन्च किया गया था कि ये वॉट्सएप का स्वदेशी विरोधी है और इसी तरह के बेहतर फीचर्स देता है. ग्राफिक्स, टेक्स्ट, वीडियो आदि शेयर किए जा सकते हैं. इसी के साथ, ये भी कहा गया था कि किंभो सुपर फास्ट एप है और रियल टाइम मैसेजिंग के लिए बेस्ट है. इसी के साथ, बताया गया था कि इस एप में घोस्ट चैटिंग, मैसेज ऑटो डिलीट जैसे फीचर्स भी हैं. पर अगर गौर करें तो ये साफ हो जाएगा कि ये पूरा डिस्क्रिप्शन बोलो मैसेंजर एप का है.

दूसरी थ्योरी...

दूसरी थ्योरी जो सोशल मीडिया पर चल रही है वो ये है कि इस एप की वजह से फोन हैंग हो रहा था और डेवलपमेंट टीम इस पूरे मामले को फिक्स करने की कोशिश कर रही है. इसी वजह से एपल स्टोर और गूगल प्ले दोनों से ही इस एप को हटा दिया गया है. हालांकि, आईफोन वाले ये बोलो मैसेंजर वाली थ्योरी को भी सपोर्ट कर रहे हैं.

तीसरी थ्योरी...

तीसरी थ्योरी थोड़ी दिलचस्प है. एक ट्विटर अकाउंट से ट्वीट की गई है कि इस एप में पाकिस्तानी एक्ट्रेस की फोटो लगाई गई थी और इसके कारण ही इस एप को डिलीट किया गया है.

किम्भो, वॉट्सएप, सोशल मीडिया, पतंजलि, सोशल मीडियादेसी नहीं बल्कि पाकिस्तानी एक्ट्रेस की फोटो लगाई गई

हालांकि, मामला जो भी हो, लेकिन मुद्दा तो यही है कि बाबा रामदेव का ये एप डिलीट किया जा चुका है.

अब बाबा रामदेव के लिए क्या ही कहा जाए. पहले मैगी नूडल्स में दिक्कत हुई तो वो अपनी मैगी लेकर आ गए. तेल, मसाले, कॉस्मैटिक आदि तो न जाने कब से चल ही रहे हैं. दो दिन से बीएसएनएल के साथ पार्टनरशिप वाली सिम की बात चर्चा में थी और अब कुछ दिन से फेसबुक और वॉट्सएप को लेकर चर्चा चल रही थी और डेटा चोरी के आरोप लग रहे थे तो बाबा रामदेव ने वॉट्सएप का विरोधी लॉन्च कर दिया. शायद जल्दी ही फेसबुक का विरोधी भी लॉन्च कर दें और अपने पतंजलि परिवार के साथ मिलकर सोशल नेटवर्किंग साइट का प्रचार प्रसार करें. ईकॉमर्स में तो बाबा रामदेव पहले ही आ चुके हैं. खेती, रियल एस्टेट, ईकॉमर्स, फार्मा, आईटी, सर्विस प्रोवाइडर, एडवर्टाइजिंग, मार्केटिंग, फाइनेंस, रिटेल, सेल्स आदि कई सेक्टर से तो बाबा रामदेव जुड़ ही चुके हैं. हो सकता है वो दिन दूर नहीं कि पतंजलि ब्रांड की फिल्में भी आएं और एमएसजी के बाद रामदेव दूसरे बाबा बनें फिल्म बनाने वाले.

बहरहाल, भविष्य में जो भी हो फिलहाल तो बाबा रामदेव का ये एप शुरुआती दौर में औंधे मुंह गिर पड़ा है और ये कहना गलत नहीं होगा कि इस एप का भी नूडल ही बन चुका है.

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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