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Updated: 21 अगस्त, 2019 12:47 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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एक जहरीले नाग को कितना भी दूध पिला लो, उसके जहर को अमृत नहीं बना सकते. उसका काम ही है डसना, वो डसेगा ही.

जाकिर नाइक (Zakir Naik) के ऊपर ये लाइन बिल्कुल सटीक बैठती है. वो भी किसी जहरीले नाग से कम तो नहीं है. आए दिन उपदेश के नाम पर जहर उगलना ही उसकी फितरत है, जिसे भारत तो पहचान गया, लेकिन मलेशिया (Malaysia) नहीं पहचान पाया. बांग्लादेश के ढाका में हुए हमले के बाद जब ये बात सामने आई कि उसी के जहरीले भड़काऊ भाषणों को सुनने के बाद आतंकियों ने हमले को अंजाम दिया था, तो भारत ने सख्त कदम उठाए. सबसे पहले तो जाकिर नाइक के पीस टीवी पर बैन लगाया और फिर जाकिर नाइक को गिरफ्तार करने की कवायद शुरू हुई. उस दौरान वह भारत से बाहर था और वापस आने के बजाय वह मलेशिया में ही रुक गया.

जहां एक ओर भारत की एजेंसियां जाकिर नाइक को गिरफ्तार करने की कोशिशें कर रही हैं, वहीं मलेशिया उसे बचाने वाला मसीहा बन रहा था. जब भारत ने उसके प्रत्यर्पण की गुजारिश की थी, तो भी मलेशिया ने अपने मुस्लिम वोटबैंक को बचाए रखने के लिए प्रत्यर्पण से मना कर दिया था. यहां आपको बता दें कि मलेशिया की करीब 60 फीसदी आबादी मुस्लिम ही है. खैर, मलेशिया ने एक बार जहरीले नाग को दूध पिलाकर सोचा कि वो उसे तो नहीं डसेगा, लेकिन अब फिर से जाकिर नाइक ने अपना जहर उगलना शुरू कर दिया है. वैसे भी, जाकिर नाइक जैसे लोगों की जिंदगी का मसकद ही जहर उगलना और दूसरों को भड़काना होता है. अब आप ही सोचिए, ऐसा इंसान जहर नहीं उगलेगा तो करेगा क्या?

जाकिर नाइक, मलेशिया, भाषणजाकिर नाइक ने मलेशिया में भी जहर उगलना शुरू कर दिया है तो सरकार की आंखें खुली हैं.

मलेशिया में जाकिर नाइक के भाषणों पर बैन

कुछ दिन पहले ही जाकिर नाइक ने भारतीयों और चीनी लोगों को लेकर एक विवादित बयान दिया था. उसने कहा था कि ये लोग मेहमान हैं और उन्हें मलेशिया से चले जाना चाहिए. मलेशिया में अल्पसंख्यकों के खिलाफ दिए उसके बयान के बाद अब तक जाकिर नाइक के खिलाफ करीब 115 पुलिस रिपोर्ट दर्ज हो चुकी हैं. मलेशिया की सरकार को भी ये समझ आ गया है जाकिर नाइक को पालकर सिर्फ अपना ही नुकसान होगा. आखिरकार, उसने मंगलवार को जाकिर नाइक के भाषणों पर रोक लगा दी है. वैसे मलेशिया की सरकार ने तो जाकिर नाइक के भाषणों पर मंगलवार को रोक लगाई, लेकिन वहां के 7 राज्यों ने सोमवार को ही जाकिर नाइक के किसी भी सार्वजनिक सभा या भाषण में भाग लेने पर रोक लगा दी थी.

खुद को घिरता देख माफी मांगी

जाकिर नाइक ये अच्छे से समझता है कि मलेशिया अगर उससे नाराज हो गया, तो वह भारत को उसका प्रत्यर्पण भी कर सकता है. वैसे भी भारत, कनाडा, यूनाइटेड किंगडम और बांग्लादेश ने पहले ही जाकिर नाइक को बैन किया हुआ है. ऐसे में जाकिर नाइक ने अपने बयान के लिए माफी मांग ली है. उसने खुद को शांतिदूत बताते हुए कहा है- 'मैं शांति में विश्वास रखता हूं, क्योंकि कुरान भी इसी पर आधारित है. मेरा मकसद दुनियाभर में शांति फैलाना है, लेकिन दुर्भाग्यवश मुझे आलोचकों का भी सामना करना पड़ता है, जो मुझे मेरा मिशन पूरा करने से रोकते हैं. मेरे विरोधी कुछ खास शब्दों का इस्तेमाल कर मेरे बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं.' वैसे अगर कोई इस फर्जी शांतिदूत के भाषण सुन ले, तो उसके दिलो-दिमाग में जहर भरना तय ही समझिए.

जाकिर नाइक के भाषणों पर रोक की वजह राजनीतिक भी है

ऐसा नहीं है कि सिर्फ लोगों का गुस्सा या जाकिर नाइक के बयान से मलेशिया सरकार चिंतित है. मलेशिया सरकार को चिंता ये भी है कि जाकिर नाइक की वजह से भारत और चीन से उसके राजनीतिक और व्यापारिक रिश्ते खराब हो सकते हैं. आपको बता दें कि मलेशिया में कारोबार से लेकर राजनीति तक में हिंदू समुदाय का अच्छा-खासा दखल है. ऐसे में मलेशिया सरकार उस जाकिर नाइक को बचाने के चक्कर में बिल्कुल नहीं है, जो उसके ऊपर बोझ बनता जा रहा है.

ओसामा जैसा बोझ बन गया है जाकिर नाइक

जिस तरह कभी ओसामा बिन लादेन अफगानिस्तान पर बोझ बन गया था, कुछ वैसा ही हाल जाकिर नाइक का हो रहा है. वह भी अब मलेशिया पर बोझ बनता जा रहा है. अफगानिस्तान में तो तब भी तालिबान और शरिया जैसी चीजों के चलते ओसामा को पनाह मिल गई थी, लेकिन मलेशिया में ऐसा कुछ नहीं है. मलेशिया सरकार के सिर पर बोझ जैसे ही अधिक बढ़ा, वह उसे नीचे उतार फेंकेगी

पहले पीएम, फिर डिप्टी सीएम की आंखें खुलीं !

कुछ समय पहले जब भारत ने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण की मांग की थी, तो मलेशिया के प्रधानमंत्री महाथिर बिन मोहम्मद ने प्रत्यर्पण से मना कर दिया था. हालांकि, कुछ दिन पहले ही उन्होंने जाकिर नाइक की हरकतें देखते हुए ये कह दिया था कि अगर जाकिर नाइक की गतिविधियां देश के खिलाफ हुईं तो उसकी स्थाई नागरिकता खत्म कर दी जाए. देर से ही सही, कम से कम पीएम की आंखें तो खुलीं. मलेशिया के पीनांग के डिप्टी सीएम पी रामासामी ने ये तक कह दिया है कि जाकिर नाइक नफरत फैला रहा है, इसे वापस भेजने की जरूरत है. अब तो आप समझ ही गए होंगे कि क्यों जाकिर नाइक ने माफी मांगने की सोची. उसे डर है कि कहीं मलेशिया उसे भारत को सुपुर्द ना कर दे.

मलेशिया की तरह सऊदी अरब भी पछताएगा !

अगर मलेशिया भी जाकिर नाइक की नागरिकता रद्द कर देता है, तो भी जाकिर नाइक के पास सऊदी अरब का विकल्प बचेगा. उसके पास सऊदी अरब की भी नागरिकता है. भारत से भागे जाकिर नाइक को मलेशिया ने पहले तो पनाह देकर अपना राजनीतिक हित साध लिया था, लेकिन अब वो भी समझ चुका है कि जाकिर नाइक आस्तीन का सांप है. अब अगर उसकी मलेशिया की नागरिकता रद्द होने पर जाकिर नाइक सऊदी अरब भाग जाता है तो हो सकता है कि कुछ समय बाद सऊदी अरब भी पछताए.

ढाका से श्रीलंका तक जाकिर नाइक का आतंक

बांग्लादेश के ढाका में होली आर्टिसन बेकरी पर हुआ आतंकी हमला तो सभी को याद ही है. वही हमला, जिसमें 5 हमलावर लोगों से उनके नाम पूछ-पूछ कर उन्हें मार रहे थे. कुरान की आयतें पूछ रहे थे, ताकि ये कंफर्म किया जा सके कि वह शख्स मुस्लिम है. 1 जुलाई 2016 को हुई इस गोलीबारी में 22 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी, जिसमें 17 विदेशी थे. इस हमले को अंजाम देने वाले गरीब घर के नहीं थे, बल्कि ये आतंकी ऐसे परिवारों से थे जो बड़ी-बड़ी गाड़ियों में चलते थे. छानबीन के बाद पता चला था कि वो इस्लाम पर भाषण देने वाले जाकिर नाइक से प्रभावित थे.

श्रीलंका सीरियल ब्लास्ट के तार भी जाकिर नाइक से जुड़े हुए पाए गए. श्रीलंका में हुए सिलसिलेवार धमाकों के बाद छानबीन से पता चला कि शांग्री ला होटल में हमला करने वाला आत्मघाती हमलावर एक इस्लामिक आतंकी मौलवी जहरान हाशिम था. यह इमाम नेशनल तौहीद जमात का लेक्चरर था. हाशिम इस्लाम को ही सर्वोपरि मानता था और अन्य धर्म के लोगों के प्रति नफरत दिखाता था. सालों तक वह यूट्यूब वीडियोज के जरिए लोगों को बहकाता रहा. यूट्यूब पर उसने बहुत सारे ऐसे वीडियो डाले, जिससे इस्लाम के नाम पर लोगों को भड़काया जा सके. यहां तक कि वह पूछता था कि श्रीलंका के मुस्लिम डॉक्टर जाकिर नाइक के लिए क्या कर सकते हैं. आखिरकार श्रीलंका के कुछ मुस्लिमों को उसने बरगला लिया और उनके साथ मिलकर इतने बड़े हमले को अंजाम दे दिया.

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