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Updated: 21 जनवरी, 2018 12:34 PM
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युवा उद्घोष कार्यक्रम को बीजेपी 2019 की राह में मील के पत्थर के तौर पर देख रही है. इसीलिए तैयारी भी खूब जोर शोर से की जा रही है. शुरुआत के लिए खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को चुना गया - और उद्घाटन करने खुद अमित शाह पहुंचे, फिर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तो मौजूद रहना ही था.

तमाम ताम झाम के बावजूद शुरुआत फीकी रही - और कुर्सियां भी खाली नजर आयीं. ऐसे में बात वहीं आकर अटक गयी - योगी आदित्यनाथ और अमित शाह की मौजूदगी के बावजूद जब ये हाल रहा तो 'युवा उद्घोष' की गूंज आगे कहां तक पहुंच पायेगी?

न्यू इंडिया के वोटर!

2017 के आखिरी मन की बात कार्यक्रम के जरिये प्रधानमंत्री मोदी ने उन सभी युवाओं का विशेष रूप से स्वागत किया जो अगले आम चुनाव में पहली बार वोट डालेंगे. मन की बात में मोदी बोले, "एक जनवरी, 2018 का दिन मेरी दृष्टि से एक स्पेशल दिन है... जो लोग वर्ष 2000 या उसके बाद जन्मे हैं यानी 21वीं सदी में जिन्होंने जन्म लिया है, वे एक जनवरी, 2018 से मान्य वोटर बनना शुरू हो जाएंगे. भारतीय लोकतंत्र, 21वीं सदी के वोटर्स का न्यू इंडिया वोटर्स का स्वागत करता है."

मोदी देश के उन 14 करोड़ युवाओं को संबोधित कर रहे थे जो इस साल 18 साल के हो जाएंगे और 2019 में पहली बार मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे. 2014 में 15 करोड़ नये वोटर जुड़े थे - और इस तरह देखें तो 2019 में 18 से 23 साल के युवा मतदाताओं की तादाद 29 करोड़ पहुंच जाएगी. भले ही कोई धर्म के नाम पर वोट मांगे या कोई जाति के नाम पर, लेकिन सभी पार्टियों की नजर इन्हीं युवाओं पर है. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी प्रधानमंत्री मोदी से युवाओं के रोजगार देने को लेकर जो सवाल पूछ रहे हैं, तो उनकी नजर भी इन्हीं युवा मतदाताओं पर बनी हुई है.

बीजेपी ने ऐसे युवा मतदाताओं को रिझाने के लिए युवा उद्घोष कार्यक्रम तैयार किया है. युवा उद्घोष कार्यक्रम के उद्घाटन के लिए अमित शाह खुद वाराणसी पहुंचे थे - और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे. कार्यक्रम का आयोजन महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ परिसर में किया गया था. ताज्जुब की बात ये रही कि बनारस जैसे शहर में जो बरसों से बीजेपी का गढ़ रहा है, जहां का सांसद, विधायक और मेयर भी बीजेपी का ही, उस शहर में पार्टी के इतने महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कुर्सियां खाली कैसे रह गयीं?

empty chairsयुवा उद्घोष की गूंज कहां तक? [फोटो, सौजन्य : अपनी काशी]

कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस का विरोध

शांति भंग की आशंका से कार्यक्रम में काला कपड़ा पहन कर जाने पर पाबंदी लगा दी गयी थी. कुछ दिन पहले बलिया में हुए योगी के एक कार्यक्रम में एक मुस्लिम बीजेपी समर्थक का पुलिसवालों ने बुर्का उतरवा दिया था. बनारस में इस पाबंदी के शिकार मीडिया के मीडिया के लोग भी हुए.

ये कार्यक्रम शनिवार को रखा गया था - और अक्सर देखने को मिलता है कि शनिवार को बहुत सारे लोग काले रंग के कपड़े पहनते हैं. इसके पीछे मान्यता है कि ऐसा करने से शनि को खुश करने की कोशिश होती है - और इस तरह शनि के प्रकोप से बचने का उपाय भी माना जाता है. हो सकता है बीजेपी के समर्थक चाह कर भी काले वस्त्र पहने होने के चलते नहीं जा पाये हों - और कुर्सियां खाली रह गयी हों. नेताओं और कार्यकर्ताओें की तो मजबूरी है, बीजेपी का हर समर्थक भगवा कैसे धारण कर सकता है?

congress workersकांग्रेस का विरोध [फोटो, सौजन्य : अपनी काशी]

एक दिलचस्प बात ये भी रही कि युवा उद्घोष कार्यक्रम से पहले एहतियात के तौर पर पुलिस ने यूनिवर्सिटी के 25 छात्रों को हिरासत में ले लिया था - और उन्हें शहर के कैंट थाने में रखा गया था.

बीजेपी के इस कार्यक्रम के खिलाफ कांग्रेस के स्थानीय नेताओं ने जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया. इसमें मोदी के खिलाफ 2014 में कांग्रेस उम्मीदवार रहे अजय राय और पूर्व सांसद राजेश मिश्रा सहित 40 नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने गिरफ्तार किया. कांग्रेस नेताओं की ओर से लहुराबीर से मार्च निकाला गया था - और कुछ कार्यकर्ता सिगरा में पर्चा बांट रहे थे जिसमें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को जस्टिस लोया का हत्यारा और गुजरात से तड़ीपार बताया गया था.

एक कहावत है जिसमें अच्छी शुरुआत को किसी भी काम में आधा हो जाना समझा जाता है. इस हिसाब से देखें तो बीजेपी के युवा उद्घोष कार्यक्रम को मंजिल तक पहुंचने के लिए अभी मीलों का सफर तय करना होगा. राजनीतिक रैलियों में खाली पड़ी कुर्सियों को लेकर सोशल मीडिया पर इन दिनों कटाक्ष किया जा रहा है - दरअसल, जरूरत से ज्यादा कुर्सियां मंगा ली गयी थीं. बनारस में बीजेपी के युवा उद्घोष कार्यक्रम का उद्घाटन इस टिप्पणी से ऑटो कनेक्ट हो जा रहा है.

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