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Updated: 22 फरवरी, 2018 06:04 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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इन दिनों कनाडा के पीएम जस्टिन ट्रूडो भारत के दौरे पर हैं. अक्सर जब कोई विदेशी राष्ट्राध्यक्ष भारत आता है तो उसके स्वागत से लेकर उसकी खिदमत तक सब कुछ चर्चा का विषय बन जाता है, लेकिन कनाडा के पीएम के साथ मामला कुछ अलग ही है. जस्टिन ट्रूडो अखबारों की सुर्खियां इसलिए बन गए हैं, क्योंकि उनका स्वागत करने के लिए खुद पीएम मोदी एयरपोर्ट नहीं गए. कनाडा के पीएम भी हवाई जहाज से उतरने से पहले शायद सोच रहे होंगे कि पीएम मोदी उन्हें गले से लगाकर उनका स्वागत करेंगे, लेकिन ऐसा न हुआ. हर देश के राष्ट्राध्यक्ष के स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंच जाने और मिलते ही उन्हें गले लगा लेने वाले पीएम मोदी कनाडा के पीएम से 4 दिन बाद भी नहीं मिले हैं. पीएम मोदी द्वारा जस्टिन ट्रूडो का स्वागत करने एयरपोर्ट न जाने को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं और इसे ट्रूडो का अपमान तक कहा जा रहा है. ऐसे में लोगों का यह भी मानना है कि पीएम मोदी और जस्टिन ट्रूडो के सबंध अच्छे नहीं हैं. आइए जानते हैं क्यों लोगों को लग रहा है ऐसा.

नरेंद्र मोदी, जस्टिन ट्रूडो, कनाडा, मोदी सरकार, खालिस्तान

खालिस्तान मामला हो सकता है वजह

द इंडिपेंडेंट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले कुछ सालों में भारत और कनाडा की सरकार के बीच उत्तरी अमेरिका में स्वतंत्र राष्ट्र खालिस्तान के प्रति समर्थन की वजह से तनाव बढ़ गया है. इस आधार पर यह कहा जा रहा है कि मोदी सरकार और कनाडा सरकार के बीच अच्छे संबंध नहीं है. यह भी एक कारण हो सकता है कि पीएम मोदी खुद कनाडा के प्रधानमंत्री का स्वागत करने एयरपोर्ट नहीं गए. वाशिंगटन पोस्ट की एक खबर के अनुसार कनाडा की कुल आबादी में भारतीय मूल के चार फीसदी लोग हैं और इनमें 15 फीसदी सिख हैं. कनाडा में काफी सारे गुजराती लोग भी हैं. ऐसे में कनाडा के पीएम पंजाब और गुजरात का दौरा करना नहीं भूले हैं, ताकि उन लोगों को खुश रखा जा सके.

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इसे लेकर सोशल मीडिया पर भी खूब तस्वीरें शेयर की जा रही हैं और कहा जा रहा है कि तत्कालीन अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, संयुक्त अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नहयान, बंग्लादेश की पीएम शेख हसीना और जापान के पीएम शिंजो आबे का स्वागत करने के लिए पीएम खुद एयरपोर्ट पर जा पहुंचे, लेकिन कनाडा के पीएम का स्वागत करने के लिए एक जूनियर मंत्री (कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री गजेंद्र एस शेखावत) को भेजा गया.

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सरकार के कुछ सूत्रों से यह भी खबर मिली है कि प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राज्यमंत्री को स्वागत के लिए भेजा गया था. हालांकि, इसे लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन अगर सूत्रों की बात को मानें तो सवाल यह भी उठता है कि अगर पीएम मोदी सबके लिए प्रोटोकॉल तोड़ सकते हैं तो जस्टिन ट्रूडो के लिए क्यों नहीं? खैर, आपको बताते चलें कि पीएम मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत करने भी एयरपोर्ट नहीं गए थे. लेकिन तब भी वह होटल में जिनपिंग का इंतजार कर रहे थे और उनके पहुंचते ही पीएम मोदी ने जिनपिंग से मुलाकात की थी, लेकिन ट्रूडो से पीएम मोदी अब तक नहीं मिले हैं.

टैक्सपेयर्स के पैसे उड़ाने का कनाडा में आरोप

भारत में न तो एयरपोर्ट पर पीएम ने जस्टिन ट्रूडो का स्वागत किया ना ही तब मुलाकात की जब वह गुजरात के साबरमती गए. जस्टिन से तो योगी आदित्यनाथ ने भी हाथ मिलाना मुनासिब नहीं समझा, जब वह यूपी में स्थित ताजमहल घूमने पहुंचे. जहां एक ओर भारत में उनका अपमान किए जाने की बातें हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर कनाडा में एक अलग ही आरोप जस्टिन ट्रूडो के माथे लगा दिया गया है. ओटावा स्थित वकीलों का समूह 'कैनेडियन टैक्सपेयर्स फेडरेशन' ट्रूडो के अपनी पत्नी और तीन बच्चों के साथ भारत दौरे से नाखुश हैं. फेडरेशन के फेडरल डायरेक्टर Aaron Wudrick के अनुसार जस्टिन ट्रूडो कनाडा के टैक्सपेयर्स के पैसे घूमने में बर्बाद कर रहे हैं. उनके अनुसार सात दिन के दौरे में ऑफिशियल बिजनेस के लिए सिर्फ आधे दिन का समय देना और बाकी समय अपने परिवार के साथ घूमना टैक्सपेयर्स के पैसे उड़ाना है. सात दिन तक एक ही देश का दौरा करने को लेकर भी कनाडा में पीएम जस्टिन ट्रूडो पर सवाल उठ रहे हैं.

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ये है जस्टिन ट्रूडो का सात दिवसीय प्लान

लोग इस बात को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं कि पीएम मोदी जस्टिन ट्रूडो से मिलेंगे भी या नहीं? आपको बता दें कि जस्टिन ट्रूडो के शेड्यूल में पीएम मोदी से मुलाकात के लिए भी समय पहले से ही निर्धारित है. वह 23 फरवरी को पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे. आइए जानते हैं उनके 7 दिनों का शेड्यूल.

18 फरवरी- ताजमहल घूमना.

19 फरवरी- गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम जाना.

20 फरवरी- टॉप बिजनेस लीडर्स के साथ मीटिंग और भारतीय सिनेमा की हस्तियों से मुंबई में मुलाकात.

21 फरवरी- अमृतसर के स्वर्ण मंदिर जाना.

22 फरवरी- दिल्ली में जामा मस्जिद और क्रिकेट ग्राउंड का दौरा, उसके बाद कनाडा और भारत के बिजनेस लीडर्स को लेक्चर.

23 फरवरी- पीएम मोदी से मुलाकात कर अहम मुद्दों पर बात.

24 फरवरी- युवाओं के एक कॉन्फ्रेंस में संबोधन.

यानी भले ही पीएम मोदी ने खुद जाकर जस्टिन ट्रूडो का स्वागत न किया हो, लेकिन उनके वापस लौटने से पहले दोनों देशों के पीएम की मुलाकात होगी. इस मुलाकात में रक्षा और आतंकवाद से निपटने के कई मुद्दों पर बात की जाएगी. लेकिन कनाडा में भारत के बहुत सारे सिख लोग हैं, ऐसे में अगर पीएम मोदी हमेशा की तरह इस बार भी खुद एयरपोर्ट पहुंचकर कनाडा के पीएम का स्वागत करते तो शायद रिश्ते और मजबूत हो सकते थे. पीएम द्वारा एयरपोर्ट पहुंचकर कनाडा के पीएम का स्वागत ना करने को एक राजनीतिक नाराजगी तो माना जा रहा है, लेकिन कहीं इसका असर दोनों देशों के आपसी रिश्तों पर न पड़े.

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