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Updated: 16 नवम्बर, 2017 06:04 PM
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कुछ ही संगीन जुर्म ऐसे होते हैं जिन्हें अदालतें 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' कैटेगरी की मानती हैं - और फिर कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दी जाती है. अगर हत्यारों को माफी देने के हिसाब से सोचें तो राजीव गांधी हत्याकांड अब ऐसी ही किसी विशेष श्रेणी का हकदार लगने लगा है.

हाल ही में पता चला कि कैसे एक सीबीआई अफसर ने इस केस में सजा पाये एक हत्यारे के बयान का वो हिस्सा छुपा लिया जिसकी मदद से वो बच भी सकता था. अब एक जज ने इन्हीं खामियों के आधार पर हत्यारों के लिए माफी की गुजारिश की है. ये जज कोई और नहीं बल्कि हत्यारों को मौत की सजा सुनाने वाले जस्टिस केटी थॉमस ही हैं. जस्टिस थॉमस सजा सुनाने वाली बेंच के सीनियर जज थे जो अब रिटायर हो चुके हैं.

जस्टिस थॉमस ने एक पत्र लिख कर सोनिया गांधी से हत्यारों के प्रति दया की गुजारिश की है. इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में जस्टिस थॉमस ने अपनी बातों के सपोर्ट में तर्क भी दिये हैं और महात्मा गांधी की हत्या के केस का हवाला भी. लेकिन क्या ये सब इतना आसान है? क्या बात सिर्फ इतनी ही है?

पहले सजा-ए-मौत लिखी, अब दया की अपील

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जस्टिस थॉमस ने लिखा है, “अगर आप और राहुलजी (अगर संभव हो तो प्रियंका भी) राष्ट्रपति से सजा कम करने का अनुरोध करें तो शायद वो मान जाएं. मुझे ये मामला मानवीय संवेदना का लगता है जिसमें केवल आप ही मदद कर सकती हैं. केस में फैसला सुनाने वाला न्यायाधीश होने के नाते मुझे महसूस होता है कि मुझे आपको ये पत्र लिखना चाहिए ताकि आप इस मामले में उदारता से पेश आ सकें.”

ahmed patel, sonia gandhi, rahul gandhiराजीव गांधी को श्रद्धांजलि देते राहुल और सोनिया गांधी

जस्टिस थॉमस ने इस मामले में सीबीआई की जांच में खामियों का हवाला दिया है. खासकर 40 लाख रुपये नकद की बरामदगी को लेकर. दरअसल, जांच एजेंसी नहीं बता पायी थी कि इतनी बड़ी रकम का स्रोत क्या था?

हाल ही में इस केस की जांच करने वाले सीबीआई के एक पूर्व अफसर का बयान बेहद चौंकाने वाला रहा. अफसर के मुताबिक हत्या की सजा पाये एजी पेरारिवलन को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की साजिश के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. अफसर के बयान से मालूम होता है कि अगर साजिश की जानकारी न होने का जिक्र होता तो बचाव पक्ष को फायदा मिल सकता था - क्योंकि अदालत में ऐसे बयान महत्वपूर्ण माने जाते हैं.

perarivalan हत्या का दोषी पेरारिवलन

खामियों को लेकर जस्टिस थॉमस ने खुद के अपसेट होने तक की बात इंडियन एक्सप्रेस से शेयर की है. बेंच के साथी जजों का रवैया भी जस्टिस थॉमस को ठीक नहीं लगा क्योंकि वे इस केस में सीबीआई की आलोचना के पक्ष में नहीं थे. फिर तय हुआ कि फैसले में सीबीआई की न तारीफ की जाएगी और न ही खिंचाई. जस्टिस थॉमस ने बताया है कि उस वक्त वो भौंचक्के रह गये जब उनके एक साथी ने सीबीआई अफसर की तारीफ में कसीदे लिख डाले.

जस्टिस थॉमस ने हत्यारों को माफी देने को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का भी उल्लेख किया है. महात्मा गांधी की हत्या में गोपाल गोडसे साजिश के दोषी पाये गये थे जिन्हें 14 साल की सजा के बाद अक्टूबर, 1964 में रिहा कर दिया गया, नेहरू के निधन के पांच महीने बाद. इसी साल जून में हत्याकांड के दोषियों में से एक श्रीलंकाई नागरिक रॉबर्ट पायस ने तमिलनाडु सरकार को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग जाहिर की. तमिलनाडु के मुख्यमंत्री को भेजे एक भावुक पत्र में पायस ने लिखा, ‘मुझे दया के आधार पर मौत दे देनी चाहिए और शव को मेरे परिवार को सौंप दिया जाए.’

राजीव गांधी की हत्या के दोषी रॉबर्ट पायस के साथ साथ संथन, मुरूगन, पेरारिवलन, नलिनी, जयकुमार और रविचंद्रन 1991 से जेल में सजा काट रहे हैं. असल में, इस हत्याकांड में दो मामले दर्ज किए गए थे. एक में मुरगन, नलिनी, पेरारीवलन सहित सात लोग अभी उम्रकैद की सजा काट रहे हैं. दूसरे केस में लिट्टे चीफ प्रभाकरण, अकीला और पुट्टूअम्मन समेत 11 लोगों को साजिश का आरोपी बनाया गया था, हालांकि, इन सबकी अब मौत हो चुकी है. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 21 मई, 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरुंबदूर में एक चुनावी सभा में आत्मघाती हमले में मौत हो गई थी.

महात्मा गांधी का एक प्रसंग इस केस में सजा पायी नलिनी से भी जुड़ा है, जिससे जेल जाकर प्रियंका गांधी ने मुलाकात की थी.

हत्यारे से मुलाकात - और माफी की बात!

नलिनी की मां चेन्नई के एक अस्पताल में नर्स थीं और बताते हैं कि उनका नाम महात्मा गांधी ने ही रखा था - पद्मावती. मुरगन उसकी जिंदगी में उस वक्त आया जब वो किराये पर रहने के लिए घर खोज रही थी. नलिनी ने अपनी आत्मकथा में प्रियंका गांधी से मुलाकात का विस्तार से जिक्र किया है.प्रियंका ने 19 मार्च, 2008 को नलिनी से जेल में मुलाकात की थी. दोनों की 90 मिनट की इस मुलाकात की मीडिया में भी खूब चर्चा रही.

naliniहत्या की दोषी नलिनी

प्रियंका जानना चाहती थीं कि एक अच्छे इंसान को क्यों मार डाला गया? नलिनी ने अपनी आत्मकथा में लिखा कि उसके जवाब से वो संतुष्ट नहीं हुईं और दूसरे हत्यारों का नाम सुन कर उन्हें गुस्सा आ गया था.

हत्यारों को माफी देने का तमिलनाडु सरकार का फैसला पूरी तरह राजनीतिक होगा, ये कहने की जरूरत नहीं. प्रियंका गांधी का जेल जाकर नलिनी से मिलना भी अपनेआप में भी एक दुर्लभ वाकया रहा. सोनिया गांधी जस्टिस थॉमस के पत्र पर क्या फैसला लेती हैं ये भी उनका निहायत ही निजी मामला है. लेकिन इन सब बातों से स्वाभाविक तौर पर कई सवाल उठने लगे हैं. न्याय का नैसर्गिक सिद्धांत कहता है कि भले ही गुनहगार छूट जाये लेकिन किसी बेगुनाह को सजा नहीं होनी चाहिये. यहां तो जांच में भी खामियां दिख रही हैं और जस्टिस थॉमस के पत्र में प्रायश्चित का भी कोई भाव छिपा हुआ लगता है. जिस एजेंसी से जांच कराने के लिए लोग हर दरवाजा खटखटा डालते हैं वहां भी अफसर मनमाने तरीके अपनाते हैं? सबसे बड़ा सवाल ये है कि जांच की खामियों के लिए आखिर कौन जिम्मेदार है? और अगर कोई जिम्मेदार है तो उसकी जवाबदेही क्या बनती है?

एक पूर्व प्रधानमंत्री का परिवार जो अब तक सोचता रहा होगा कि हत्यारों को सजा मिल चुकी है, अब उसे मालूम हो रहा है कि जांच में ही खामियां ही खामियां रहीं. जांच में खामियों का मतलब तो यही हुआ कि जिन्हें सजा हुई उन्हें संदेह का लाभ भी मिल सकता था क्योंकि सबूत पूरी तरह उनके खिलाफ नहीं थे. ऐसे तो जो सबूत पेश किये गये वे पूरी तरह पुख्ता तो नहीं ही लगते. फैसला सुनाने वाले को तब भी ये इत्मीनान नहीं रहा कि जांच एजेंसी ने अपना काम ठीक से किया - और अब भी नहीं. ऐसे में जबकि एजेंसी का ही एक अफसर खुद ही बयान रिकॉर्ड न करने की बात कर रहा है, फिर क्या समझा जाये? फिर तो ये संदेह भी जताया जा सकता है कि असली हत्यारे जांच एजेंसी की पहुंच से दूर ही रहे!

जस्टिस थॉमस ने आखिर में लिखा है, "मैं ये भी मानता हूं कि उन कैदियों के प्रति दया दिखाने से ईश्वर भी खुश होगा. मुझे माफ कीजिएगा अगर मैंने ये गुजारिश करके कुछ गलत किया हो." किसी भी कैदी के लिए दया की ऐसी अपील 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' ही है.

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