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Updated: 26 मार्च, 2015 07:22 AM
विक्रम किलपडी
विक्रम किलपडी
  @vikram.kilpady
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हरियाणा में गायों के लिए यह ज्यादा अच्छा नहीं. अलावा इसके कि अब उनकी बलि नहीं ली जा रही. अब उन्हें नंदिनी, बसंती, धन्नो और लक्ष्मी जैसे नामों से छुटकारा मिल जाएगा. अब उनकी पहचान एक शानदार 12 अंकों वाला नम्बर होगा. जी हां, एक अनोखा आईडी नंबर. सरकार इंसानों के लिए यूआईडी पाने की कोशिश कर रही थी, लेकिन अदालत ने इस कोशिश को तरजीह नहीं दी इसलिए अब गाय की बारी है.

ग्वालों या गाय पालने वालों को अपनी गाय का नम्बर मन में याद रखना होगा. उदाहरण के लिए, यातायात पुलिस गाड़ी चलाने वाले से उसके वाहन का नंबर पूछने पर जोर देती है. अधिकतर लोगों को यह सही याद रहता है. लेकिन जब आप नम्बर भूल जाते हैं तो पुलिस आपके प्रोफाइल के आधार पर आप के साथ सौदेबाजी करती है और आपको तनाव में होते हुए भी मुस्कान के साथ जुर्माना भरना पड़ता है. गाय पालने वालों को 12 अंकों वाला नम्बर याद रखना होगा.

ज्यादा विरोध नहीं था. लेकिन हरियाणा सरकार ने गोमांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया और शुरू में इस काम शामिल आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या के मामले मं लगने वाली धारा) लगाने की धमकी दी गई थी. लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी. अब वे तीन से दस साल की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने पर संतुष्ट हो गए हैं.

गाय हमारे देश में एक पवित्र जानवर मानी जाती है. लेकिन इतिहासकार डीएन झा ने वैदिक काल के दौरान गोमांस खाने की प्रथा पर बड़े पैमाने पर लिखा था. लेकिन झा का शोध कार्य इस मामले में सम्मान का हकदार नहीं क्योंकि उन पर सेक्यूलर और कौमी होने का तमगा लगा हुआ था. कुछ लोगों को स्लाटर हॉउस पर प्रतिबंध लगाने का मकसद अल्पसंख्यकों पर चोट करना लगता है. हो सकता है कि इसमें कुछ सच्चाई हो.

महाराष्ट्र में पहली बार अच्छे नम्बर हासिल करने के बाद हरियाणा में गोहत्या विरोधी बिल लाया गया. इसी साल इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस से पूछा गया कि विदर्भ में किसानों के आत्महत्या करने के बावजूद वे क्यों अरब सागर में शिवाजी की एक प्रतिमा लगाने के लिए 500 करोड़ रुपये ज्यादा की बड़ी राशि खर्च करने को तैयार हैं? फडनवीस ने सवाल का जवाब अजीब तरीके से दिया और कहा कि इन दोनों मामलों को जोड़ा नहीं जा सकता है. मूर्ति गर्व की बात है. इसे देखने के लिए बहुत पर्यटक आएंगे और इसे देखने के लिए पैसा खर्च करेंगे. आत्महत्याएं अपनी जगह हैं लेकिन हमारा गौरव ज्यादा महत्वपूर्ण है.

गोमांस पर प्रतिबंध लगाने का ताल्लुक इतिहास या पौराणिक कथाओं से नहीं है. यह केवल एक सोची-समझी चाल है सस्ते प्रोटीन को हटाने की जिसे लोग आसानी से खरीद सकते थे. इन लोगों के लिए न तो मटन होता है और न चिकन. और अंडा भी नहीं. अब इन लोगों को अनाज और दूध पर ज्यादा निर्भर रहना होगा. इन दोनों के ही दाम बीजेपी सरकार में इतनी बुरी तरह से बढ़ें हैं जैसे यूपीए सरकार के समय में पेट्रोलियम ईंधन की कीमतों में इजाफा हुआ था. आजकल सउदी अरब ने कच्चे तेल की कीमतों को कम कर रखा है. तेल कारोबारियों के लिए अच्छे दिन!

कुछ वर्षों में महाराष्ट्र और हरियाणा बिना नाम और 12 अंकों वाली यूआईडी संख्या वाली बुढ़ी गायों से भर जाएंगे.

, गाय, बैन, हरियाणा

लेखक

विक्रम किलपडी विक्रम किलपडी @vikram.kilpady

लेखक एक पत्रकार हैं.

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