charcha me| 

होम -> सियासत

बड़ा आर्टिकल  |  
Updated: 06 मई, 2022 07:57 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
  @msTalkiesHindi
  • Total Shares

तेजिंदर पाल सिंह बग्गा की गिरफ्तारी कोई अलहदा मामला जैसा नहीं लग रहा है. अभी अभी नवनीत राणा और रवि राणा जेल से ऐसे ही मामले में छूट कर बाहर आये हैं - और ट्विटर पर अस्पताल में विधायक पति के सामने एक सांसद पत्नी की सिसकियां साफ सुनाई दे रही हैं.

बताये जाने की बात ये है कि कानून हर मामले में अपना काम कर रहा है. और अंदर की बात है कि ये काम चुन चुन कर हो रहा है. और भेदभाव के साथ हो रहा है. नवनीत राणा की धमकी तो राज ठाकरे के आगे बहुत ही छोटी थी, लेकिन पति-पत्नी को जेल की हवा खानी पड़ी - और राज ठाकरे के खिलाफ मामूली धाराओं में कुछ केस दर्ज कर रस्म अदायगी निभा ली गयी.

जैसे उद्धव ठाकरे चिढ़े हुए थे, वैसे ही अरविंद केजरीवाल भी जैसे तैसे क्रोध पर काबू पाने की अरसे से कोशिश कर रहे होंगे - पंजाब पुलिस ने ट्रेलर तो कुमार विश्वास के मामले में भी दिखाया था, लेकिन तेजिंदर पाल सिंह बग्गा को सुबह सुबह उठा ही ले गयी. लपेटे में तो अलका लांबा भी आ चुकी हैं, लेकिन अभी दिल्ली में बैठे बैठे ही पंजाब पुलिस के माध्यम से अरविंद केजरीवाल को ललकार रही हैं.

लेकिन सत्ता के दुरुपयोग के इस खेल में अलग ही लड़ाई शुरू हो गयी. पंजाब पुलिस के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने जनकपुरी थाने में अपहरण का केस दर्ज कर लिया - और कुरुक्षेत्र में पंजाब पुलिस की गाड़ी को रोक लिया गया. वही गाड़ी जिससे पंजाब पुलिस बग्गा को मोहाली ले जा रही थी.

अब इससे भी दिलचस्प कोई खेल हो सकता है क्या? बग्गा बेकसूर हैं या नहीं ये तय करना अदालत का काम है. गिरफ्तारी किन हालात में हुई है, ये भी अलग ही मामला है. लेकिन बग्गा फिलहाल एक आरोपी हैं जिनके खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है. ऐसे आरोपी को गिरफ्तार कर पंजाब पुलिस अपनी ड्यूटी कर रही है. अब ये ड्यूटी किन इशारों पर हो रही है, ये बहस का अलग मुद्दा हो सकता है.

दिल्ली पुलिस के इत्तला करने पर पंजाब पुलिस टीम को रोक कर हरियाणा पुलिस पूछताछ शुरू कर देती है. पंजाब पुलिस हरियाणा के डीजीपी को लिखित जानकारी देती है कि ये अपहरण का मामला नहीं है. ये सिर्फ एक आरोपी को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किये जाने का केस भर है.

तीन राज्यों की पुलिस अपनी अपनी ड्यूटी कर रही हैं - और बदले की राजनीति पर बहस शुरू हो जाती है. बग्गा की गिरफ्तारी दिल्ली से होती है. गिरफ्तारी पंजाब पुलिस करती है. पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार है. दिल्ली पुलिस केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट करती है - और हरियाणा में भी बीजेपी की सरकार है.

बग्गा के मामले में बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने सामने आ जाते हैं. जो बीजेपी नेता अब तक केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई पर समझाते फिर रहे थे कि कानून अपना काम कर रहा है, वे ही आम आदमी पार्टी नेता अरविंद केजरीवाल पर सत्ता और पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगा रहे हैं - और आम आदमी पार्टी की तरफ प्रतिध्वनि सुनाई देती है कि कानून अपना काम कर रहा है.

अगर ये सब किसी के कहने पर हो रहा है, फिर तो हम्माम में सब एक जैसे ही लगते हैं. जिनके बारे में खबर नहीं आयी, समझिये वे रेनकोट पहने हुए हैं या पहनने की कोशिश कर रहे हैं.

tejinder pal singh baggaबग्गा को पंजाब पुलिस ने पकड़ा, हरियाणा पुलिस ने रास्ते में रोक लिया, दिल्ली पुलिस ने छुड़ा लिया - गजब की राजनीति है!

सवाल ये है कि यहां कानून अपना काम कर रहा है या कानून की रखवाली के जिम्मेदार लोगों को आपस में लड़ाया जा रहा है? जैसे पंजाब पुलिस पर आम आदमी पार्टी की सत्ता का प्रभाव है, बिलकुल वैसे ही हरियाणा और दिल्ली पुलिस पर बीजेपी के शासन का दबाव है.

तभी तो जिस आरोपी को पंजाब पुलिस गिरफ्तार करती है, हरियाणा पुलिस उसे अपहरण का केस मान कर बग्गा को छुड़ा लेती है - और फिर दिल्ली पुलिस को सौंप देती है. हां, बग्गा की गिरफ्तारी के बाद जो कुछ हुआ है, वो अपनेआप में अनूठा केस जरूर है.

सवाल ये नहीं है कि जिसे गिरफ्तार किया गया है उसका नाम बग्गा है या कोई और. सवाल ये भी नहीं है कि जिसके दबाव में या पहल पर ये काम हो रहा है वो नेता आम आदमी पार्टी का है या बीजेपी का. सवाल ये है कि ये खतरनाक ट्रेंड किसी दिशा में बढ़ रहा है - और सवाल ये भी है कि लोकतंत्र ही नहीं, देश के संघीय ढांचे के साथ ऐसा खिलवाड़ क्यों हो रहा है?

बग्गा ने अभी अभी क्या किया है?

तेजिंदर सिंह बग्गा और आम आदमी पार्टी का पुराना रिश्ता रहा है - ऐसे भी समझ सकते हैं कि बग्गा की राजनीति चमकाने में AAP की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. बीते दिल्ली विधानसभा चुनाव में तेजिंदर सिंह बग्गा ने बीजेपी का टिकट मिलने पर कहा था वो उनकी बरसों की मेहनत का नतीजा है. बग्गा हरिनगर से चुनाव तो हार गये, लेकिन आम आदमी पार्टी की तरक्की के साथ ही उनका राजनीतिक ग्राफ भी बढ़ता ही रहा.

बहरहाल, तेजिंदर बग्गा की जिस केस में गिरफ्तारी हुई है, उसकी शिकायत आम आदमी पार्टी के एक प्रवक्ता सन्नी आहलूवालिया ने पुलिस में दर्ज करायी थी. बग्गा भी दिल्ली बीजेपी के प्रवक्ता हैं और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव. बग्गा के खिलाफ पंजाब पुलिस के मोहाली साइबर क्राइम सेल में दर्ज हुआ था.

1 अप्रैल को दर्ज किये गये केस के बाद पंजाब पुलिस का कहना है कि बग्गा को CrPC की धारा 41 के तहत 5 नोटिस भेजे गये थे - 9 अप्रैल, 11 अप्रैल, 15 अप्रैल, 22 अप्रैल और 28 अप्रैल को भी. पुलिस के मुताबिक, जब बग्गा जांच में सहयोग के लिए राजी नहीं दिखे तो गिरफ्तार करना पड़ा. पंजाब पुलिस के मुताबिक, बग्गा के खिलाफ IPC की धारा 153A, 505, 505(2) और 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

बताते हैं कि पंजाब पुलिस ने बग्गा को उनके इंटरव्यू, मीडिया में दिये गये बयानों और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट के सिलसिले में किया है - और केजरीवाल के खिलाफ तेजिंदर सिंह बग्गा ने ताजा मुहिम फिल्म द कश्मीर फाइल्स को लेकर उनके बयान के खिलाफ शुरू की थी.

बीजेपी की युवा शाखा BJYM अध्यक्ष तेजस्वी सूर्या के नेतृत्व में अरविंद केजरीवाल के मुख्यमंत्री आवास पर विरोध प्रदर्शन और तोड़फोड़ में बग्गा भी शामिल थे - और आरोप है कि उसी दौरान टीवी चैनलों से बातचीत में बग्गा ने अरविंद केजरीवाल को लेकर कहा था, 'भारतीय जनता युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उनको जीने नहीं देंगे.'

बग्गा और AAP का रिश्ता क्या कहलाता है: आम आदमी पार्टी से पाला बदल कर बीजेपी में जा चुके कपिल मिश्रा ने बग्गा की गिरफ्तारी को लेकर कई ट्वीट किये हैं. कपिल मिश्रा का कहना है, 'पंजाब की पुलिस का इस्तेमाल केजरीवाल के पर्सनल नाराजगी, पर्सनल खुन्नस को निपटाने के लिए किया जा रहा है.'

बग्गा बताते तो यही हैं कि वो बचपन से ही पिता के साथ संघ की शाखाओं में जाते रहे हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर पहली बार चर्चा में वो तब आये थे जब सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण के चैंबर में घुस कर हमला बोल दिया था.

ये संयोग ही रहा कि बग्गा जब प्रशांत भूषण के चेंबर में दाखिल हुए वो टीवी इंटरव्यू दे रहे थे. बग्गा ने प्रशांत भूषण के साथ जो जो किया वो लाइव टीवी पर देखा गया. हालांकि, तब बग्गा बीजेपी से जुड़े हुए नहीं थे. तब वो भगत सिंह क्रांति सेना के बैनर तले काम कर रहे थे. प्रशांत भूषण से बग्गा की नाराजगी जम्मू कश्मीर में जनमत संग्रह की उनकी सलाह से रही. प्रशांत भूषण पर हमले के दौरान बग्गा के मुंह से 'कश्मीर-कश्मीर' बोलते भी सुना गया था.

भगत सिंह क्रांति सेना ने बाद में अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा भी था, 'अगर तुम मेरे देश को तोड़ने की कोशिश करोगे, मैं तुम्हारा सिर फोड़ दूंगा.'

बग्गा के मामले में कैसे गच्चा खा गयी पंजाब पुलिस?

तेजिंदर पाल सिंह बग्गा केस में फिलहाल दो पहलू दिखाई पड़ते हैं - एक राजनीतिक और दूसरा कानूनी पहलू. बग्गा केस में आम आदमी पार्टी राजनीतिक तौर पर बीजेपी के आगे कमजोर तो पड़ी ही है, एक कानूनी चूक के चलते पंजाब पुलिस ने अपनी भी फजीहत करा ली है.

पंजाब पुलिस ये भूल गयी कि दिल्ली से मोहाली के रास्ते में हरियाणा भी पड़ता है. दिल्ली पुलिस तो केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी सरकार के गृह मंत्रालय के कंट्रोल में तो है ही, हरियाणा में भी बीजेपी के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर सरकार चला रहे हैं. पंजाब पुलिस की गाड़ी दिल्ली की सीमा तो फटाफट पार कर ली, लेकिन हरियाणा के कुरुक्षेत्र में फंस गयी. अगर हरियाणा में किसी और पार्टी की सरकार होती तो बग्गा को बीच रास्ते में छुड़ाना बीजेपी के लिए मुमकिन नहीं हो पाता.

जैसे दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी की तरफ से बताया जा रहा था कि जांच में सहयोग न करने के लिए बग्गा को पंजाब पुलिस ने गिरफ्तार किया, वैसे ही हरियाणा की तरफ से गृह मंत्री अनिल विज तस्वीर साफ करने के लिए खुद आगे आये और कहा कि वो कोई बाधा नहीं खड़ी कर रहे हैं. बोले, हमें दिल्ली पुलिस से अपहरण की जानकारी मिली थी... जहां उनके अपहरण का मामला दर्ज किया गया है... हम बग्गा को जनकपुरी एसएचओ को सौंपेंगे.' साथ ही, अनिल विज ने हरियाणा सरकार की तरफ से आश्वस्त भी किया कि वो पंजाब पुलिस की शिकायत की भी समीक्षा जरूर करेंगे.

पंजाब पुलिस से कहां चूक हुई? पंजाब पुलिस ने काम तो वैसे ही किया है, जैसे रोज किया करती है. ये तो केस ही राजनीतिक बुनियाद पर शुरू हुआ, लिहाजा राजनीतिक बाधा तो खड़ी होनी ही थी. बग्गा की गिरफ्तारी के बाद जब बीजेपी नेता एक्टिव हुए तो काउंटर एक्शन खोजा जाने लगा. तभी पता चला कि पंजाब पुलिस ने वो सब तो किया ही नहीं जो ऐसी गिरफ्तारियों में जरूरी होता है.

होना ये चाहिये था कि पंजाब पुलिस को पहले जनकपुरी थाने में बग्गा की गिरफ्तारी की सूचना के साथ आमद दर्ज करानी चाहिये थी. बग्गा को गिरफ्तार करने के फौरन बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश कर ट्रांजिट रिमांड लेना चाहिये था - अगर ये सब पेपरवर्क करके बग्गा को मोहाली ले जाया जाता तो हरियाणा पुलिस भी रास्ते में बाधा नहीं बन पाती.

केजरीवाल के आगे बग्गा टिकते कहां हैं?

आम आदमी पार्टी के नेता के खिलाफ जिस बयानबाजी के लिए तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ पुलिस एक्शन हुआ है, देखा जाये तो अरविंद केजरीवाल राजनीति की उस विधा के चैंपियन रहे हैं.

1. अन्ना हजारे के रामलीला आंदोलन के बाद जब अरविंद केजरीवाल राजनीतिक पारी की तैयारियों में लगे थे तब उत्तर प्रदेश में 2012 के विधानसभा चुनाव हो रहे थे. फायदे का मौका देख कर अरविंद केजरीवाल स्वच्छ छवि के उम्मीदवारों को चुनने के लिए जगह जगह रैली कर रहे थे.

ऐसी ही एक रैली में अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि संसद में लुटेरे, हत्यारे और बलात्कारी भरे पड़े हैं और इनसे निजात दिलाने के लिए काम करना होगा. संसद में केजरीवाल के खिलाफ प्रस्ताव भी लाया गया. सदन में सदस्यों ने बहस भी की लेकिन आखिर में चेतावनी देकर छोड़ दिया गया.

2. 2015 में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रिंसिपल सेक्रेट्री राजेंद्र कुमार के दफ्तर सीबाआई की एक टीम जांच पड़ताल के लिए पहुंची थी. अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर घटना की जानकारी दी और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ शुरू हो गये - देखते ही देखते मोदी को 'कायर' और 'मनोरोगी' तक बता डाला.

और हाल ही में कर्नाटक में रैली करने पहुंचे अरविंद केजरीवाल दावा कर रहे थे कि प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से उनको सबसे ईमानदार मुख्यमंत्री का सर्टिफिकेट मिल चुका है. अपनी रैली में केजरीवाल ने दफ्तर पर सीबीआई के छापे का जिक्र करते हुए कर्नाटक में सरकार बनने पर पंजाब की तरह ही इमानदार सरकार देने का वादा कर रहे थे. ऐसा ही दावा केजरीवाल हिमाचल प्रदेश में भी कर चुके हैं.

फर्ज कीजिये... दिल्ली पुलिस की रिपोर्टिंग अरविंद केजरीवाल को होती! फिर तो स्पेशल सेल के छापे मालूम नहीं कहां कहां पड़ चुके होते. तब क्या होगा अगर दिल्ली पुलिस अरविंद केजरीवाल को रिपोर्ट करने लगे?

तेजिंदर सिंह बग्गा का मामला काफी उलझ गया लगता है. दो राजनीतिक दलों की लड़ाई में एक राज्य की पुलिस को दूसरे राज्य की पुलिस ही आरोपी बना देती है - क्या ये देश के संघीय ढांचे के लिए खतरनाक नहीं है?

इन्हें भी पढ़ें :

केजरीवाल के 'बदलापुर' में कुमार विश्वास तो बस शुरुआती टारगेट हैं!

केजरीवाल को गुजरात और हिमाचल से ज्यादा कर्नाटक क्यों पंसद आने लगा?

अरविंद केजरीवाल को बड़ा नेता बनाने के पीछे संघ ही तो नहीं?

लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय