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Updated: 02 जनवरी, 2023 08:04 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रातों रात नोटबंदी की घोषणा करना भर था. पूरे देश में खलबली मच गयी. क्या विपक्ष के नेता और क्या बुद्धिजीवियों का एक वर्ग सभी ने एक सुर में प्रधानमंत्री के नोटबंदी पर लिए गए फैसले की आलोचना की. बाद में नोटबंदी के सिलसिले में कुछ याचिकाएं भी सुप्रीम कोर्ट में दायर की गयीं. सुप्रीम कोर्ट की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने मोदी सरकार के नवंबर 2016 के 500 रुपये और 1,000 रुपये के करेंसी नोटों को बंद करने के फैसले की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं के एक समूह पर अपना फैसला सुनाया है. देश की सर्वोच्च अदालत ने सरकार के फैसले को बरकरार रखा और दायर हुई सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है. भले ही सुप्रीम कोर्ट से आए इस महत्वपूर्ण फैसले के बाद सरकार को बड़ी राहत मिली हो और उसकी बाछें खिल गयी हों लेकिन उसके लिए जश्न  मनाना इतना भी आसान नहीं है. SC की पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ की एक महिला जज बीवी नागरत्ना की नोट बंदी पर की गयी टिप्पणी भाजपा का जश्न फीका करती नजर आ रही है.

Notebandi, Supreme Court, Judge, verdict, prime Minister, Narendra Modi, BJP, Congressनोटबंदी के तहत आए फैसले में जस्टिस बीवी नागरत्ना ने कई गौर किये जाने लायक बातें की हैं

आइये नजर डालें कि नोट बंदी पर अपना पक्ष रखते हुए अक्सर ही अपने फैसलों से लोगों को चकित करने वाली जस्टिस बीवी नागरत्ना ने फैसले के तहत अपने क्या विचार रखे हैं. 

आनन फानन में नोटबंदी जैसे सरकार के फैसले पर असहमति जताने वाले सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना ने कहा कि 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोटों की पूरी सीरीज को एक कानून के जरिए खत्म किया जाना चाहिए, न कि गजट नटिफिकेशन के जरिए, क्योंकि संसद इसे रद्द नहीं कर सकती. वहीं उन्होंने ये भी कहा कि केवल केन्द्र सरकार के कहने पर सभी सीरीज़ नोट को प्रचलन से बाहर करना काफी गंभीर विषय है.

नोटबंदी पर अपना तर्क पेश करते हुए नागरत्ना ने रिजर्व बैंक का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आरबीआई द्वारा दिए गए रिकॉर्ड से ये साफ होता है कि रिजर्व बैंक द्वारा स्वायत्त रूप से कोई फैसला नहीं लिया गया बल्कि सबकुछ केन्द्र सरकार की इच्छा के मुताबिक हुआ. फैसले में उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नोटबंदी करने का फैसला सिर्फ 24 घंटे में ले लिया गया.

क्योंकि अपने फैसले में नागरत्ना सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ थीं उन्होंने ये भी कहा कि आरबीआई अधिनियम में केंद्र सरकार द्वारा नोटबंदी  की शुरुआत की परिकल्पना नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि धारा 26(2) के अनुसार नोटबंदी का प्रस्ताव आरबीआई के केंद्रीय बोर्ड से आएगा. अगर केंद्र सरकार द्वारा विमुद्रीकरण की पहल की जानी है, तो ऐसी शक्ति लिस्ट 1 की एंट्री 36 से प्राप्त की जानी है जो मुद्रा, सिक्का, कानूनी निविदा और विदेशी मुद्रा की बात करती है.

अपने आर्डर में नागरत्ना ने बार बार इस बात को दोहराया कि  केंद्र सरकार की शक्तियां विशाल हैं, यदि नोटबंदी एक कानून के तहत थी तो ये जायज ठहराई जा सकती थी. 

नोटबंदी के तहत जो फैसला आना था, आ चुका है. जजों के रुख से साफ़ है कि भ्रष्तचार और कालाबाजारियों पर नियंत्रण के लिए पीएम मोदी द्वारा लिया गया फैसला एक जरूरी कदम था, ऐसे में जो कुछ भी बतौर जज बीवी नागरत्ना ने कहा है, उससे किसी को संतोष मिले न मिले. विपक्ष को जरूर मिलेगा. ऐसा इसलिए क्योंकि नागरत्ना की बातों ने विपक्ष के आरोपों को थोड़ी हिम्मत जरूर दे दी है.

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बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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