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Updated: 02 अगस्त, 2016 12:10 PM
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बांग्लादेश के एक रेस्त्रां में हुए आतंकी हमले के बाद जिस व्यक्ति का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में आया वह है मुस्लिम उपदेशक जाकिर नाइक. नाइक पर आरोप लगा कि उनके भड़काऊ भाषणों से ही बांग्लादेश के रेस्त्रां पर हुए हमले में शामिल आतंकी प्रेरित हुए थे. हालांकि नाइक ने हमेशा से ही इन आरोपों का खंडन किया और इसे मीडिया पर उनके बयानों को तोड़-मरोड़कर पेश करने का आरोप लगा दिया.

जाकिर नाइक के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई की जा सकती है कि नहीं, इसकी जांच के लिए गृह मंत्रालय ने सुरक्षा एजेंसियों की टीम गठित की. नाइक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जमीन तलाशने में जुटी सुरक्षा एजेंसियां बहुत ही फूंक-फूंक कर कदम रख रही हैं. इसके लिए सुरक्षा एजेंसियों ने उन 55 लोगों की लिस्ट बनाई है जिन्हें आतंकवाद के आरोपों में अरेस्ट किया गया है. आइए जानें कौन हैं ये 55 लोग जिनके बारे में सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि वे जाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित हुए थे.

जाकिर नाइक के भाषणों से प्रेरित हुए 55 'आतंकी'?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जाकिर नाइक के खिलाफ कानूनी कार्रवाइयों की जमीन तलाशने में लगी सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उन्होंने पिछले एक दशक के दौरान आतंकवाद के आरोपों में गिरफ्तार उन 55 व्यक्तियों की एक लिस्ट तैयार की है, जिन्होंने जाकिर नाइक के भाषणों से प्रभावित या प्रेरित होने की बात कही थी.  55 लोगों की इस लिस्ट में 2005 से लेकर इस साल तक एनआईए द्वारा की गई गिरफ्तारियां भी शामिल हैं. इन 55 लोगों का संबंध सिमी लश्कर ए तैयबा, इंडियन मुजाहिदीन और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों से रहा है.

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बांग्लादेश में हुए आतंकी हमले के बाद जाकिर नाइक पर अपने भाषणों द्वारा आतंकियों को प्रेरित करने के आरोप लग रहे हैं

इस लिस्ट में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन का एक पूर्व कर्मचारी फिरोज देशमुख, जिसे 2006 में औरंगाबाद में हथियार उतारने के मामले में उसकी कथित भूमिक के लिए महाराष्ट्र एटीएस ने अरेस्ट किया था, इंडियन मुजाहिदीन का सदस्य कातील अहमग सिद्दीकी, जिसकी 2012 में पुणे की यरवदा जेल में हत्या कर दी गई थी, केरल पुलिस के हाई-टेक सेल का पूर्व सब-इंस्पेक्टर और सिमी का हमदर्द बिजू सलीम, जोकि मुस्लिम समुदाय के नेताओं और विचारकों की पुलिस जासूसी किए जाने की जानकारी को मीडिया में लीक करके धार्मिक समुदायों के बीच आशांति फैलाने का आरोपी था, सितंबर 2015 में सऊदी अरब से गिरफ्तार और प्रत्यर्पित की गईं आईएस के लिए कथित तौर पर भर्तियां करने वाली अफ्शा जबीन, शेख मोहम्मद, ओबैदुल्लाह खान, अबू अनस और मोहम्मद नफीस खान, जिन्हें जनवरी में एनआईए ने देश भर में छापे मारकर जुनैद अल खलीफा ए हिंद नामक एक स्थानीय ISIS के सहयोगी को भगाने के आरोपों में अरेस्ट किया था और वर्धवान ब्लास्ट की जांच के दौरान अरेस्ट किए गए जमाएत उल मुजाहिदीन बांग्लादेश से कथित तौर पर जुड़े असदुल्लाह अली और रफीक इस्लाम के नाम शामिल हैं.

इतना ही नहीं सुरक्षा एजेंसियां अतीत में नाइक के खिलाफ भारत में दर्ज किए गए चार आपराधिक मामलों की भी जांच कर रही हैं. इनमें से तीन एफआईआर में जांच चल रही है जबकि चौथा मामला कोल्हापुर कोर्ट में पेंडिंग है.

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2013 में नाइक के खिलाफ सुभाष पांडुरंगा द्वारा मुंबई के कुर्ला पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एक शिकायत के बाद, नाइक के खिलाफ विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने (153ए आईपीसी) का मामला दर्ज किया गया था. 2012 में नाइक के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज किए गए थे. गोपाल नामक शिकायतकर्ता की शिकायत पर नाइक के खिलाफ महाराष्ट्र के सिंधुदुर्ग जिले स्थित वेंगुर्ला पुलिस स्टेशन में विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने (153ए आईपीसी) का मामला दर्ज किया गया था.   

हालांकि जाकिर नाइक के वकील मुबीन सोलकर ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि मैं आतंकवाद के उन आरोपियों के बारे में कुछ नहीं कह सकता जिन्होंने डॉक्टर जाकिर नाइक से प्रभावित होने की बात की है. मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि ये पूरी तरह झूठ है. मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि ये 55 लोग आतंकी गतिविधियों में शामिल होने के लिए डॉक्टर नाइक से प्रेरित हुए थे.

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने नाइक के खिलाफ सभी मामलों की जांच एक एजेंसी से कराए जाने की अपील सो संज्ञान में लेते हुए इन शिकायतों की कार्यवाही पर रोक लगा दी है.

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