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Updated: 18 मार्च, 2016 04:54 PM
आशीष मिश्रा
आशीष मिश्रा
  @Ruritania
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इस वक़्त मोदी देश से बाहर हैं, केजरीवाल दिल्ली से, राहुल पहुँच से और कांग्रेस के क्रियाकलाप मेरी समझ से. दिल्ली पुलिस के जरिए कांग्रेस केन्द्र पर राहुल गाँधी की जासूसी करवाने का आरोप लगा रही है. हुआ ये कि दिल्ली पुलिस का एक एएसआई राहुल गाँधी के घर पहुँचकर उनसे जुड़ी जानकारियाँ जुटा रहा था. कांग्रेस को ये नागवार गुजरा और उन्होंने इसे राजनैतिक जासूसी का नाम दे दिया. इस हंगामे में कांग्रेस के नेताओं का रुख देख मुझे अपनी वो जूनियर्स याद आती हैं जिनसे एक टुच्चा सा इंट्रो भी ले लो तो उसे वे रैगिंग समझ रोने लग जाती थीं.

राहुल गाँधी के बारे में पूछ-परख करने पर इतनी बौखलाहट क्यों है? ये तो नही पता पर अनुमान ये लगाया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस के नुमाइंदों ने शायद ये पूछ लिया हो कि राहुल आजकल काम-धन्धा क्या करते हैं? कांग्रेस की प्रतिक्रिया के राजनैतिक अर्थ भी तलाशे जा रहे हैं, जानने वाले इसे कांग्रेस का हथकंडा बताते हैं. जासूसी का डर दिखा कांग्रेस ये बताना चाह रही है कि राहुल ऐसा कुछ कर रहे हैं जिसकी जासूसी भी की जा सकती है. इसे राहुल गाँधी की छवि सुधारने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है.

कांग्रेस भले इसे राहुल गाँधी की जासूसी से जोड़े पर उन्हें खुद नही पता इसके पहले भी एक बार राहुल गाँधी की जासूसी का प्रयास हो चुका है. ये वो वक़्त था जब देश में लोकसभा चुनाव होने को थे. राजनैतिक दलों के वॉर रूम में सच में जंग छिड़ी थी. बैठकें-षड्यंत्र, सुलह-कलह जोरों पर थी. सोशल मीडिया पर दिन भर धमाचौकड़ी चलती और टीवी डिबेट्स पर प्रवक्ता सींग रगड़ कर पहुंचा करते. उन्हीं दिनों में एक प्रमुख राजनैतिक दल ने राहुल गाँधी की जासूसी का प्रयास किया था. इस दुस्साहस का मकसद ये पता करना था कि राहुल गाँधी लोकसभा चुनाव की तैयारी में क्या-क्या कर रहे हैं? किससे मिल रहे हैं? उनकी दिनचर्या से लेकर उनके व्यवहार पर नजर रखने के लिए पेशेवर जासूस रखे गए थे.

जासूसी का प्रयास तब असफल हुआ जब तीसरे ही दिन जासूस अपने काम से पीछे हट गए. जासूसों ने जो बताया उसे सच मानें तो आधा दिन उन्हें राहुल के जागने का इंतजार करना पड़ा. कांग्रेस के वॉर रूम में जब सब रणनीति बना रहे होते तब राहुल दाँतों से नाख़ून कुतरते दिखते. एक दिन राहुल ने कांग्रेस के सारे बड़े नेताओं को दस जनपथ बुला लिया. बाद में डेढ़ घंटे तक साबुन के गुब्बारे फुलाने का कौशल दिखाते रहे. जासूसी में ये बात भी सामने आई कि पार्टी में टिकट वितरण पर्ची फेंककर हुआ था. जासूसों ने दो दिन बाद ये कहकर काम छोड़ दिया कि ये सब काम जैसा नही लगता. ये तो वो घर पर बच्चों को भी करते देखते हैं.

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लेखक

आशीष मिश्रा आशीष मिश्रा @ruritania

लेखक एक व्यंग्यकार हैं.

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