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Updated: 29 नवम्बर, 2019 06:39 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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साध्वी प्रज्ञा ठाकुर (Sadhvi Pragya Thakur) ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त वाले बयान (Nathuram Godse patriot comment) पर बाजी पलट दी है. साध्वी के इस मिशन में बीजेपी नेताओं से बड़े मददगार कांग्रेस नेता राहुल गांधी का रोल है. कहां साध्वी प्रज्ञा के बयान को लेकर संसद में माफी और कार्रवाई पर बहस हो रही थी - और कहां राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार के हनन के मुद्दे पर चर्चा चल पड़ी है.

एक साध्वी का माफीनामा!

अभी तो साध्वी प्रज्ञा को रक्षा मामलों की समिति में शामिल किये जाने को लेकर निशाने पर आयी सत्ताधारी बीजेपी बचाव का रास्ता खोज रही थी, तभी साध्वी प्रज्ञा ने नाथूराम गोडसे को देशभक्त बता कर नयी मुसीबत में डाल दिया. वो भी तब जब SPG सुरक्षा को लेकर संसद में बहस चल रही थी. जब महाराष्ट्र में फटाफट सरकार बनाने और फिर भाग खड़े होने की कोशिशों में बीजेपी नेतृत्व और लोकल कमांडर देवेंद्र फडणवीस घिरा हुआ महसूस कर रहे थे तभी साध्वी प्रज्ञा दूर से ही छलांग लगाते हुए कूद पड़ी और नयी मुसीबत खड़ी कर दी.

साध्वी प्रज्ञा का बयान कार्यवाही से तो हटाया ही गया, बीजेपी और साध्वी प्रज्ञा के बचाव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को आगे आना पड़ा - संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी को भी कई बार सफाई देनी पड़ी. संसद में शोर-शराबा और नारेबाजी थमने का नाम ही नहीं ले रही थी - 'महात्मा गांधी की जय' और 'डाउन डाउन गोडसे'.

वैसे तो साध्वी प्रज्ञा मुंबई पुलिस के अधिकारी हेमंत करकरे को श्राप देने से लेकर हिंदुत्व से जुड़े तमाम ज्वलंत मुद्दों पर विचार व्यक्त करती रही हैं - लेकिन गोडसे-विमर्श उनका सबसे ज्यादा चर्चित हॉट ब्रांड रहा है. वैसे भी साध्वी प्रज्ञा संघ के साये में पले बढ़े हिंदुत्व की राजनीतिक करने वाले बहुतेरे नेताओं के मन की बात ही करती हैं - और यही वजह है कि उनके सपोर्ट में पूरी लॉबी खड़ी हो जाती है.

sadhvi pragya and rahul gandhiराहुल गांधी के एक ट्वीट ने पूरे विपक्ष को बैकफुट पर ला दिया

जब कभी भी साध्वी प्रज्ञा महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को एक देशभक्त के तौर पर पेश करती हैं - उनके विरोधी गांधीवाद में आस्था रखने वाले की जगह संघ और बीजेपी विरोधी राजनीति करने वाली जमात का हिस्सा बन जाते हैं.

नतीजा ये होता है कि 'गांधी बनाम गोडसे' की बहस अचानक पटरी से उतर कर कांग्रेस बनाम संघ और बीजेपी की ओर फोकस हो जाती है. दरअसल, जब कांग्रेस गांधीवाद की बहस बढ़ाती है तो लगता है वो गांधी परिवार की बात कर रही है. जाने माने कवि कुमार विश्वास की टिप्पणी इस बहस को एक महत्वपूर्ण पड़ाव से आगे गुजरते हुए देखती है.

हुआ ये था कि लोक सभा में SPG संशोधन विधेयक पर चर्चा चल रही थी. एसपीजी सुरक्षा को लेकर संसद में कांग्रेस नेताओं ने पहले भी हंगामा किया था. कांग्रेस नेताओं की शिकायत सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की एसपीजी सुरक्षा वापस लेने से थी. लोकसभा में बिल पर चर्चा के दौरान DMK सांसद ए. राजा ने महात्मा गांधी की हत्या को लेकर नाथूराम गोडसे के एक बयान का हवाला दे रहे थे, तभी साध्वी प्रज्ञा ने टोक दिया - 'आप एक देशभक्त का उदाहरण नहीं दे सकते.' हालांकि, प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बयान को लोकसभा की कार्यवाही से हटा दिया गया.

अपनी सफाई में साध्वी प्रज्ञा का कहना रहा 'यह नाथूराम गोडसे के लिए नहीं था. मैंने ए. राजा को तब टोका जब उन्होंने उधम सिंह का नाम लिया. उसके बाद स्पीकर ने मुझे बैठने के लिए कहा और मैं बैठ गई. ए. राजा ने अपना भाषण जारी रखा और उसी अंदाज में नाथूराम गोडसे के बारे में भी कहा... तब मैंने उन्हें नहीं टोका था.'

बाद में संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने तकनीकी पक्षों को सदस्यों के सामने रखा - 'प्रज्ञा सिंह ठाकुर का माइक ऑन नहीं था. जब वो ऊधम सिंह का नाम ले रहे थे तब उन्होंने इस पर आपत्ति जताई है. इसके अलावा गोडसे या किसी और के बारे में उन्होंने कुछ नहीं कहा है. इसका स्पष्टीकरण भी उन्होंने दिया है. ये रिकॉर्ड पर भी नहीं है. ये खबर फैलाना सही नहीं है.'

साध्वी प्रज्ञा की इस हरकत के बाद बाद राजनाथ सिंह को भी बचाव में आगे आना पड़ा और बीजेपी नेतृत्व के सख्त रूख के चलते साध्वी प्रज्ञा की बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा और सीनियर नेता भूपेंद्र यादव के सामने पेशी हुई. बीजेपी की ओर से डिफेंस कमेटी से निकाले जाने के साथ ही पार्टी की संसदीय बोर्ड की मीटिंग से भी मौजूदा सत्र तक साध्वी प्रज्ञा को बाहर रखने की बात भी बतायी गयी.

मुद्दा महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने का था इस कारण मीडिया में भी सुर्खियां बनी और पूरा विपक्ष संसद में हंगामा करने लगा. लोक सभा स्पीकर ओम बिड़ला ने कहा कि अगर इस विषय पर हम राजनीतिक करेंगे तो पूरी दुनिया में हमारे बारे में गलत संदेश जाएगा.

संसदीय कार्यमंत्री जोशी को एक बार फिर स्पीकर ने बोलने के लिए कहा और वो भी राजनाथ सिंह की बात से ही जवाब देने लगे - राजनाथ सिंह ने गोडसे के बारे में ऐसी किसी सोच को ही गलत बताया था. प्रह्लाद जोशी ने कहा कि अब तो सदस्य ने माफी मांग ली है इसलिए सब लोग शांत हो जायें. साध्वी प्रज्ञा ने भरी संसद में जो माफीनामा पढ़ा उसमें तो वो गोडसे और गांधी से भी चार कदम आगे बढ़ते हुए राहुल गांधी को ही लपेट लिया, 'बयान को तोड़मरोड़ कर पेश करने की कोशिश की गई है... अगर मेरे बयान से किसी को ठेस पहुंची तो क्षमा चाहती हूं... मुझे खेद है.'

साध्वी प्रज्ञा के इस संक्षिप्त माफीनामे में ज्यादा जोर तो कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस ट्वीट पर दिखा जिसमें वो बीजेपी सांसद को आतंकवादी बता रहे हैं.

राहुल गांधी का ट्वीट तो बैकफायर हो गया

गोडसे पर बयान को लेकर साध्वी प्रज्ञा ने अपने सफाई भरे माफीनामे में राहुल गांधी की ओर 'इसी सदन के माननीय सदस्य' कह कर इशारा किया, नाम नहीं लिया. भोपाल से बीजेपी सांसद राहुल गांधी के उस ट्वीट की तरफ ध्यान खींचना चाह रही थीं जिसमें राहुल गांधी ने साध्वी प्रज्ञा और गोडसे के नाम से पहले 'आतंकवादी' लिखा हुआ है.

साध्वी प्रज्ञा के सपोर्ट में बीजेपी नेता गिरिराज सिंह के बाद सांसद निशिकांत दुबे भी आये और राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का मुद्दा बनाने की कोशिश करने लगे. निशिकांत दुबे ने बीजेपी सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर को 'आतंकवादी' कहने के लिए वायनाड से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ प्रिविलेज्ड मोशन लाने की मांग कर दी, लिहाजा कांग्रेस को बचाव में आना पड़ा.

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की दलील रही कि संसद के भीतर और संसद के बाहर की बातों को अलग रखा जाये. अधीर रंजन ने स्पीकर से कहा कि कांग्रेस और विपक्षी नेता स्पीकर का ध्यान संसद में हुई घटना की ओर दिलाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उसे संसद के बाहर की बातों में उलझाया जा रहा है. असल में साध्वी प्रज्ञा ने जो कुछ कहा था वो संसद के भीतर कहा था और राहुल गांधी ने जो कुछ कहा वो ट्विटर पर यानी संसद के बाहर रहा.

साध्वी प्रज्ञा पर राहुल गांधी के एक ट्वीट से मामले में ट्विस्ट आ गया है - जो बीजेपी कल तक बचाव में इधर-उधर हाथ-पांव मार रही थी, वही अब कांग्रेस के खिलाफ हमलावर हो गयी है.

ये सही है कि साध्वी प्रज्ञा पर मालेगांव ब्लास्ट जैसे गंभीर किस्म के आरोप हैं. ये भी सही है कि साध्वी प्रज्ञा जमानत पर छूटी हुई हैं - और सही तो ये भी है कि वो जनता की अदालत से चुने जाने के बाद लोक सभा पहुंची हैं.

जब साध्वी प्रज्ञा के चुनाव लड़ने पर चुनाव आयोग को कोई आपत्ति नहीं रही. जब भोपाल के चुनाव अधिकारी को साध्वी प्रज्ञा के चुनाव जीतने के सर्टिफिकेट देने पर कोई ऐतराज नहीं रहा. जब लोकसभा स्पीकर ने साध्वी प्रज्ञा को संवैधानिक तरीके से संसद की सदस्यता दिलायी. जब अदालत ने साध्वी प्रज्ञा को अब तक न तो दोषी माना है और न ही कोई सजा नहीं सुनायी है - फिर राहुल गांधी किस वजह से साध्वी प्रज्ञा को आतंकवादी कह सकते हैं?

वैसे मामले को विराम देने के लिए दोबारा माफी मांग ली है और यहां तक कह दिया है, 'मैंने गोडसे को देशभक्त नहीं कहा' - और ये बात विपक्ष ने भी मान ली है. संसद की बात संसद में तो खत्म हो चुकी है, बाहर की बात और है. वैसे कोई कुछ भी कहे - साध्वी प्रज्ञा 'गोडसे को देशभक्त मानने वाली सोच' की पोस्टर गर्ल तो बन ही गयी हैं.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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