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Updated: 13 मई, 2016 05:59 PM
कमलेश सिंह
कमलेश सिंह
  @kamksingh
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मझे टैक्स जमा करना है. और इसके लिए ये वक्त भी बड़ा अजीब है. आसमान में पनामा पेपर्स उड़ रहे हैं, विजय माल्या देश से उड़ चुके हैं, टैक्स चोरों की बड़ी लिस्ट चारो तरफ लहरा रही है और इनके बावजूद किसी को परवाह नहीं है. बीते साल हमें बताया गया था कि देश में कुछ 30 लोगों पर 1,500 करोड़ रुपये टैक्स बकाया है. यह बकाया उस कमाई पर है जिसे उन्होंने घोषित किया है. अमीर आदमी आमतौर पर कुछ चीजें घोषित नहीं करते और कमाई उनमें से एक है. अमीर आदमी अपनी कमाई ऐसे टैक्स मुक्त देशों में छिपा देते हैं जिनका नाम गरीबों ने सुना भी नहीं होगा.

क्या टैक्स आपको परेशान करते हैं? जाहिर है, करते ही होंगे. यह जानते हुए भी कि सरकार मुझे लूट रही है, प्रति वर्ष मुझे टैक्स का आंकलन करने के लिए एक अकाउंटेंट के साथ बैठना पड़ता है. वहीं बड़ी मछलियां आसानी से बहामा, पनामा, मॉरिशस, सिंगापुर, सेंट कीट्स जैसे टैक्स हैवन कहे जाने वाले देशों तक तैर कर निकल जाती हैं. वहीं राजा मछली देश के इमीग्रेशन काउंटर से होकर इंग्लैंड चली जाती है, वापस आने से मना करती है और हमारी सरकार उसे लाने के लिए कुछ नहीं कर सकती है.

आप एक छोटी मछली हैं और यदि अपना टैक्स नहीं अदा करते तो आपको भून कर खा लिया जाएगा. हकीकत यह है कि आपको खाया नहीं जाएगा क्योंकि आप अपना टैक्स पहले ही दे चुके होते हैं. अकाउंटेंट के साथ तो आपको महज इसलिए बैठना पड़ता है जिससे आप अपना टैक्स रिटर्न फाइल कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि बैंक से कमाए गए ब्याज के 300 रुपये पर भी आपने टैक्स अदा कर दिया है. आप स्वेच्छा से उसे सरकार को दे देते हैं.

यह काम आप कितनी स्वेच्छा से करते हैं यह आप भी जानते हैं. आप इसलिए करते हैं क्योंकि आप एक वेतनभोगी हैं. यदि अपनी कमाई से एक हिस्सा आप सरकार को नहीं देंगे तो एक नकली रेबैन का काला चश्मा पहने दूसरा मोटा वेतनभोगी आपसे अनेक सवाल कर सकता है, आपको गिरफ्तार कर सकता है और मानसिक और शारीरिक तौर पर आपको प्रताड़ित कर सकता है. यह मोटा वेतनभोगी सरकार का आदमी है. यह रंगदारी लेने वाले उन गुंडों की तरह नहीं है जो गैरकानूनी वसूली करते हैं. ये न तो बिहार के उन माओवादियों जैसे हैं जो आपको जान से न मारने के लिए लेवी वसूलते हैं.

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टैक्स रिटर्न दाखिल करते लोग

सरकार को आपकी गाढ़ी कमाई का एक हिस्सा देश को विकसित करने के नाम पर चाहिए. इसके लिए सरकार के पास कानून है जिसका इस्तेमाल कर वह आपकी आत्मा तक को कुचल सकती है. यह एक विशाल तंत्र है जिसका संचालन शक्तिशाली लोग आपके पैसे और आपकी मर्जी से करते हैं. कम से कम आप यही समझें, ऐसा ये लोग चाहते हैं. आप हर पांच साल में अपना वोट देकर सरकार चुनते हैं जिससे उन्हें आपके साथ स्वेच्छा से बर्ताव करने का लाइसेंस मिल जाता है.

आपकी सरकार को हमेशा आपका पैसा चाहिए ताकि इस पैसे से चुनाव में वह वोट खरीद सके. इस पैसे से वह खुद की जरूरतों को पूरी कर सके और उन अधिकारियों को वेतन दे सके जो आपका काम करने के लिए रखे गए हैं. यह बात अलग है कि ये अधिकारी आपका काम करने के लिए दोबारा आपसे पैसे वसूल ले. अब इन कामों के बाद अगर कुछ पैसा बच जाता है तो सरकार वीवीआईपी के लिए हेलिकॉप्टर खरीद लेती है जिससे वह वोट खरीदने के लिए रैलियों में शामिल हो सके. इसमें भी ये वीवीआईपी अपना हिस्सा हेलिकॉप्टर बनाने वाली कंपनियों से वसूल लेते हैं और इस खरीद में दलाली करने वाले कुछ और करोड़ रुपयों से अमीर हो जाते हैं.

आप फिर उस जांच के लिए भी भुगतान करते हैं जिससे यह पता चल सके कि हेलीकॉप्टर खरीदने में घूस किसने ली. आपके नौकरशाह दुनियाभर के फर्स्ट क्लास शहरों की हवाई जहाज के फर्स्ट क्लास टिकटों पर यह जानने के लिए यात्रा करते हैं कि पैसा कहां से कहां गया. जहां तक सरकार का सवाल है, वह बचे हुए पैसों के कुछ अंश से मिसाइलें और टैंक खरीदकर सेना को दे देती है जिससे आप इस लूट के बावजूद देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत रहें. वहीं वह सेना से रिटायरमेंट पर मिल रही पेंशन से भी इनकम टैक्स वसूल लेती है.

लिहाजा, देश में सिवाए बेहद प्रदूषित हवा के आपको हर चीज के लिए भुगतान करना पड़ता है. सर्विस टैक्स और सरचार्ज अतिरिक्त भुगतान है. आप पीने का पानी खरीदते हैं. आप बाथरूम में रोज सुबह मुंह धोने, नहाने और सफाई करने के लिए भी पानी का भुगतान करते हैं. फिलहाल पीने के पानी से सस्ता है यह पानी लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है कि हमेशा सस्ता रहेगा. आप अपने घर में इस्तेमाल के लिए कई तरह की मशीन खरीदते हैं और सभी खरीद पर टैक्स का भुगतान करते हैं. फिर इन मशीनों को चलाने के लिए बिजली खरीदते हैं और इन सबके अलावा अपने घर के लिए प्रति वर्ष प्रॉपर्टी टैक्स का भी भुगतान करते हैं. आप चाहे घर में खाना खाएं या घर के बाहर खाएं, खपत की जा रही हर चीज का भुगतान करते हैं और सभी भुगतान पर आप टैक्स भई अदा करते हैं.

आप स्वास्थ सुविधा, ट्रांसपोर्ट, शिक्षा, फीस और जीवन रक्षक दवाओं की खरीद करते हैं. वहीं सरकार आपसे टैक्स की वसूली आपकी कमाई से पहले और खर्च करने से पहले वसूल लेती है. आमतौर पर जिस सरकार पर अपने पैसे को लेकर आप भरोसा जताते हैं उसे आप के ऊपर ही भरोसा नहीं रहता है. आप जब कार खरीदते हैं तो पहले टैक्स अदा करने के साथ-साथ रोड टैक्स भी अदा कर देते हैं जबकि आपकी कार तब तक शोरूम में ही खड़ी रहती है. एक बार कार लेकर सड़क पर उतरते हैं तो आपको टोल टैक्स का भी भुगतान करना पड़ता है. ऐसी स्थिति में टैक्स देने की सूची बनाना लगभग नामुमकिन है क्योंकि इसमें सबकुछ शामिल है.

लिहाजा, सर्वोपरि सिद्धांत यही कहता है कि यदि आप टैक्स के दायरे में आते हैं तो ये शक्तिशाली लोग आपसे टैक्स वसूल ही लेंगे. वहीं यह फैसला कि आप टैक्स दायरे में आते हैं या नहीं भी यही शक्तिशाली लोग करते हैं. आपकी आमदनी यदि टैक्स दायरे के पहले ढ़ांचे से अधिक है तो आप अधिक टैक्स का भुगतान करेंगे. जाहिर है जितना अधिक आप कमाते जाएंगे, उतना अधिक टैक्स आपको चुकाना होगा. लिहाजा, बेहतर यही है कि आपकी आमदनी कम से कम रहे. इतना कम कि सरकार आपको इसलिए भुगतान करे कि आप की आमदनी बहुत कम है. यकीन मानिए, आपको मिलने वाले पैसे से कहीं ज्यादा दलाली करने वाले आमदनी कर लेते हैं.

आप यदि कारोबारी हैं तो थोड़ी उम्मीद है कि सरकार के इस खेल में आप उसे मात दे दें. यदि आप बड़े कारोबार में हैं तो सरकार को मात देने की उम्मीद बढ़ जाती है. लेकिन आप अगर वैतनिक हैं तो सरकार का रुचि महज आपकी आमदनी पर है. वह भी जब तक आपकी आमदनी हो रही है.

आप अपनी नौकरी गंवा देंगे, तो खुद पर निर्भर हो जाएंगे. आप ईएमआई का भुगतान नहीं कर पाएंगे और बैंक आपका घर नीलाम कर देगी. आप बीमार पड़ जाएंगे तो दवाओं के लिए भुगतान करना होगा. बीमारी यदि गंभीर है, तो आपका मृतक होना तय है. मुझे सरकार से अभी इस घोषणा का इंतजार है कि आप यदि चुनौतियों से घिरे हैं और बुरे दौर से गुजर रहे हैं तो आपका कर्ज माफ कर दिया जाएगा. किसानों का कर्ज यदा-कदा माफ किया जाता है, ज्यादातर वे अपनी जमीन और जिंदगी गंवा देते हैं. आखिर आपका पैसा जाता कहां है? क्या हाल फिलहाल में आपने अपने नेता की तरफ देखा है?

उसके घर, गाड़ियों और बेनामी संपत्ति पर गौर कीजिए. जाहिर है कि बेनामी संपत्ती का पता आपको नहीं चलेगा क्योंकि उसपर कोई नाम नहीं होता. लेकिन नोएडा और गुड़गांव की गगनचुम्बी इमारतों को जरा ध्यान से देखें तो पता चलेगा कि इनमें से ज्यादातर का निर्माण आपके पैसे से हुआ है. लेकिन आपको ही नहीं पता होगा कि यह संपत्ति आपकी है. यही बेनामी संपत्ति है. यदि आप देख नहीं सकते तो अपने क्षेत्र के ठेकेदार को पकड़िए. उस अधिकारी से मिलिए जहां वह ठेकेदार बराबर आता-जाता है. उनकी मुलाकात अक्सर आपके पैसों को आपस में बांटने के लिए होती है.

लेकिन उस ठेकेदार के बेटे के ज्यादा नजदीक जाने से बचिएगा क्योंकि उसके पास आपके पैसे से ही खरीदी हुई पिस्तौल होगी...

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