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Updated: 23 सितम्बर, 2018 03:58 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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राफेल डील पर मोदी सरकार बचाव की मुद्रा में नजर आ रही है, इसलिए कांग्रेस का ज्यादा आक्रामक होना तो बनता भी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के मौजूदा कैंपेन को खुद राहुल गांधी लीड कर रहे हैं - कभी चुनावी सभा में, कभी रोड शो में, तो कभी प्रेस कांफ्रेंस के जरिये राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी को लगातार टारगेट कर रहे हैं. सवाल ये है कि आखिर किस सबूत के बूते राहुल गांधी प्रधानमंत्री को लेकर 'चोर-चोर' चिल्ला रहे हैं?

ये तो मॉब लिंचिंग जैसा ही है

केंद्र की बीजेपी सरकार को कभी 'सूट-बूट की सरकार' बताने वाले राहुल गांधी अब तो सीधे सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चोर कहने लगे हैं. सवाल ये है कि देश की जनता द्वारा चुने हुए प्रधानमंत्री चोर कहना कैसे उचित हो सकता है? अगर विपक्ष को प्रधानमंत्री पर भरोसा नहीं रहा तो एक बार फिर वो अविश्वास प्रस्ताव ला सकता है, लेकिन वो चोर-चोर कैसे चिल्ला सकता है - राहुल गांधी को मालूम होना चाहिये कि संसद में अविश्वास प्रस्ताव लाना उनका अधिकार है तो प्रधानमंत्री को चोर कहना किसी भी संगीन जुर्म जैसा है.

narendra modi, rahul gandhiमोदी से दो-दो हाथ करने को तैयार राहुल गांधी

बेशक राफेल डील संदेह के घेरे में है, लेकिन क्या बगैर सबूतों के सामने आये, बिना संवैधानिक और न्यायिक ट्रायल चले देश के प्रधानमंत्री को चोर कहा जा सकता है?

क्या राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री को चोर कहने और सड़क पर आये दिन होने वाली भीड़ के इंसाफ जैसी घटनाओं में कुछ कॉमन नहीं लगता? गौर से देखें तो राहुल गांधी का प्रधानमंत्री को चोर कहना बिलकुल मॉब लिंचिंग जैसा ही है.

अविश्वास प्रस्ताव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा भी था 'भगवान शिव उन्हें शक्ति दें कि वो 2024 में भी मेरे खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लायें.' होने को तो राफेल पर भी वैसा ही बवाल हो रहा है जैसा बोफोर्स या 2G, CWG और कोयला घोटाले को लेकर हुआ. बवाल, घोर राजनीतिक बवाल. हकीकत में हुआ जो भी हो, हंगामा तो खूब मचा - लेकिन सच का पता न चला. खैर, ट्रायल तो अब तक खत्म नहीं हो पाया है.

ध्यान देने वाली बात ये है कि तमाम घोटालों के बाद भी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कभी किसी ने उंगली नहीं उठायी. कभी उनकी इमानदारी पर आंच नहीं आयी. यहां तक कि गलाकाट सियासी दुश्मनी के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने बस इतना कहा - 'मालूम नहीं कैसे रेनकोट पहन कर बाथरूम में नहाते रहे?'

राफेल कंट्रोवर्सी के दरम्यान राहुल गांधी को बोफोर्स सौदे की भी याद तो आ ही रही होगी. वैसे इसी 28 सितंबर को उस केस में तारीख पड़ी है. अब भी मानना पड़ेगा कि वीपी सिंह ने चुनावों में जितनी कुशलता से बोफोर्स चलाया और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर कब्जा कर लिया, राहुल गांधी राफेल को इतना भी हैंडल नहीं कर पा रहे हैं कि लगे कि मंजिल ज्यादा दूर नहीं है.

बार बार हथियार क्यों बदल रहे हैं राहुल गांधी?

राजनीतिक हमलों में 'शब्द' ही 'हथियार' होते हैं, कुछ और नहीं. मोदी के खिलाफ कांग्रेस नेतृत्व के हमलों में एक खास पैटर्न नजर आ रहा है. ज्यादातर हमलों में राहुल गांधी के तेवर तो वैसे ही रहते हैं, लेकिन हथियार वो लगातार बदल रहे हैं.

सवाल ये है कि क्या राहुल गांधी को लगातार नये हथियार आजमाने का शौक है? या फिर एक हथियार के नाकाम हो जाने पर वो दूसरा हथियार उठाना पड़ रहा है? फिर तो सवाल ये भी होगा कि कांग्रेस के पास सियासी हथियारों की इतनी कमी क्यों है? अगर कांग्रेस के पास सियासी हथियारों की कमी है तो भला वो 2019 में प्रधानमंत्री मोदी से मुकाबला कैसे करेगी?

या फिर प्रधानमंत्री मोदी इतने मजबूत हो चुके हैं कि कांग्रेस का बड़े से बड़ा हथियार काम नहीं आ रहा है? कुछ तो लोचा है, जो कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष में किसी के समझ में नहीं आ रहा है.

कांग्रेस के हमले का सिलसिला तो चार साल से जारी है, स्वाभाविक है, लेकिन उसका ज्यादा इस्तेमाल गुजरात चुनाव से देखने को मिल रहा है. एक खास वजह ये भी है कि गुजरात चुनाव से ऐन पहले राहुल गांधी के लिए विदेशी धरती पर अपने पिता राजीव गांधी के सहयोगी रहे सैम पित्रोदा के आयोजन में बड़े पैमाने पर युद्धाभ्यास किया था - और मां सोनिया गांधी के सलाहकारों की टीम 'विकास पागल है...' के जरिये जमीन तैयार कर रही थी. गुजरात चुनाव के साथ ही हिमाचल प्रदेश में भी चुनाव हुए थे. तारीखों के ऐलान में जो घालमेल हुआ उसकी चर्चा यहां जरूरी नहीं लगती.

VP SINGH, RAJIV GANDHIबोफोर्स जैसे दिन आने वाले हैं क्या?

अब जरा गौर करते हैं कांग्रेस के उन सियासी हथियारों पर जिनका प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ राहुल गांधी बारी बारी इस्तेमाल कर रहे हैं -

1. 'प्रधानमंत्री झूठ बोलते हैं' : गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने मोदी के खिलाफ जिस हथियार का इस्तेमाल किया उसका नाम था - 'झूठा'. कभी नौकरी के नाम पर तो कभी चुनावी वादों को लेकर या फिर गब्बर सिंह टैक्स के बहाने राहुल गांधी ने पूरे चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को झूठा साबित करने की हर संभव कोशिश की. काउंटर अटैक में जब बीजेपी बीस पड़ी तो चारों खाने चित्त होने की नौबत आ पड़ी. फिर चुनावी अखाड़े से धूल झाड़ते हुए टीम राहुल के लोग खड़े हुए और बताया कि उनके नेता ने प्रधानमंत्री को टारगेट न करने की हिदायद दी है, कारण भी बताया - 'वो हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री हैं और हम उस पद का सम्मान करते हैं.' बात आयी गयी हो गयी. हिमाचल में कांग्रेस की हार के साथ कर्नाटक चुनाव भी छिटफुट गोलीबारी और मुठभेड़ के साथ खत्म हो गया. सुप्रीम कोर्ट की मदद की बदौलत कांग्रेस को कर्नाटक का मंच और कैराना में विपक्ष की जीत से आगे बढ़ कर मोर्चा लेने का हौसला हुआ.

2. 'प्रधानमंत्री चौकीदार नहीं भागीदार हैं' : जब अविश्वास प्रस्ताव पर बहस चल रही थी तो राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को 'भागीदार' बताया था. संसद में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी द्वारा खुद को चौकीदार बताये जाने के प्रसंग की संदर्भ सहित व्याख्या भी की थी. अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बीजेपी के नफरत के खिलाफ कांग्रेस के प्यार बांटने के दावे को चरितार्थ करते करते राहुल गांधी प्रधानमंत्री से जबरन गले मिले और जब लौट कर अपनी सीट पर पहुंचे तो इतनी जोर से आंख मारी कि कई दिनों तक सुर्खियां लुटते रहे. बहरहाल, प्रधानमंत्री मोदी ने राहुल गांधी के 'भागीदार' पर जवाबी हमले में सरेआम मान लिया कि वो भागीदार हैं - और फिर विस्तार से समझाया कि किस तरह वो लोगों के दुख दर्द में और जरूरतों में भागीदार हैं.

हो सकता है, राहुल गांधी को लगा हो कि भागीदार तो मिसफायर हो गया, इसलिए चौकीदार के साथ कोई नयी तुकबंदी की कोशिश छोड़ अनुप्रास अलंकार का सहारा लिया और कहने लगे - 'गली गली में शोर है, हिंदुस्तान का चौकीदार चोर है.'

राहुल गांधी ने इस हथियार का परीक्षण राजस्थान में किया जहां वसुंधरा राजे सिंधिया गौरव यात्रा पर निकली हुई हैं. राजस्थान में राफेल डील का जिक्र छेड़ कर राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को चोर बताते हुए भीड़ से नारे भी लगवाये.

3. 'प्रधानमंत्री मोदी चोर हैं' : राफेल डील विवाद के साये में फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद के बयान से कांग्रेस को बड़ा बल मिला है. फ्रांस्वा ओलांद के बयान पर औपचारिक बयान तो फ्रांस सरकार का भी आ चुका है, लेकिन मोदी सरकार को बार बार सफाई देनी पड़ रही है. घेरा तो केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने भी है, लेकिन अंबानी समूह के रिलायंस को लपेटते हुए कांग्रेस कुछ ज्यादा ही हमलावर है.

पहले ट्वीटर पर, फिर दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेंस करके राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि घाटे में चल रहे अनिल अंबानी को उबारने के लिए प्रधानमंत्री

मोदी ने ये कारनामा किया है. राहुल यहीं नहीं रुके, बोले - "नरेंद्र मोदी ने स्वयं अंबानी को कांट्रेक्ट दिया... पीएम मोदी ने हिंदुस्तान के लोगों की जेब से पैसा निकाला और अनिल अंबानी की जेब में डाला... जिस व्यक्ति पर आपने भरोसा किया था, उसने भरोसा तोड़ा है. आज जब ओलांद ने ये कहा है तो उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकल रहा है. सब बोलेंगे, लेकिन वे नहीं..."

प्रेस कांफ्रेंस में भी संसद की तरह राहुल गांधी ने कहा "नरेंद्र मोदी ने मेरी आंख में आंख नहीं मिलाई. इधर उधर देखते रहे. देश का चौकीदार चोरी कर गया."

मोदी को मौत का सौदागर कह चुकी सोनिया गांधी और चोर बता रहे राहुल गांधी को मालूम होना चाहिये कि पलटवार में उन्हें भी जमानत पर छूटे हुए लोग बताया जाता है. नेशनल हेरल्ड केस में सच तो यही है, और ये भी कि गुजरात दंगों की हर जांच में मोदी के रोल के कोई सबूत नहीं मिले. तब भी जब देश में यूपीए की सरकार थी - और कुर्सी पर एक 'ऐक्सीडेंटल पीएम' बैठा हुआ था. अगर प्रधानमंत्री को चोर कहना राहुल गांधी का ब्रह्मास्त्र नहीं है, फिर तो कोई फर्जी सीडी आनी ही बाकी है.

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Rahul Gandhi, Rajasthan, Narendra Modi

लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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