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Updated: 07 जुलाई, 2019 07:04 PM
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राहुल गांधी कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो कभी दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की कॉपी करते देखे जाते रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कॉपी करने से राहुल गांधी को भले ही कोई फायदा न हुआ हो, लेकिन कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है. अरविंद केजरीवाल की नकल राहुल गांधी को फिलहाल तो भारी पड़ रही है - और बाद में महंगी पड़ने वाली है.

नेशनल हेरल्ड केस में तो राहुल गांधी पहले से ही जमानत पर हैं, मानहानि के कई मुकदमों कांग्रेस नेता को जगह जगह अदालतों में पेश होना पड़ रहा है. मुंबई कोर्ट में पेशी के दो दिन बाद ही राहुल गांधी को पटना की एक अदालत में पेश होकर जमानत लेनी पड़ी है - और ऐसे सिर्फ दो मामले नहीं हैं.

एक अरसे से अरविंद केजरीवाल भी मानहानि के मुकदमे लड़ रहे थे - लेकिन आम चुनाव से पहले ही आम आदमी पार्टी के नेता ने सभी नेताओं से माफी मांग कर सुलह कर लिया.

मानहानि के जितने मुकदमे अरविंद केजरीवाल के खिलाफ थे, करीब करीब उतने ही राहुल गांधी के खिलाफ भी चल रहे हैं - तो क्या राहुल गांधी भी अरविंद केजरीवाल की तरह माफी मांग कर मामला खत्म करेंगे या लड़ते रहेंगे?

कितने मुकदमे हैं मानहानि के?

राहुल गांधी के खिलाफ पिछले तीन दिनों में मानहानि के तीन मुकदमों की तारीख थी. दो मामलों में तो राहुल गांधी को खुद पेश होकर जमानत लेनी पड़ी, एक मामले में सुनवाई 19 अक्टूबर तक टल गयी है.

राहुल गांधी के पटना कोर्ट में पेशी के साथ ही भूख लगने पर उनके शहर के एक रेस्तरां में डोसा और कॉफी के आनंद लेने की भी खूब चर्चा रही - ये बात अलग है कि उसी वक्त कर्नाटक कांग्रेस में कोहराम मचा हुआ था. कांग्रेस विधायक विधानसभा स्पीकर के दफ्तर में इस्तीफा जमा कर राजभवन चले गये राज्यपाल से मिलने - और फिर वहीं से कड़ी सुरक्षा में उन्हें एयरपोर्ट ले जाया गया. उसके बाद से तो मुंबई में जमे हुए हैं. एक विधायक का तो बयान भी आ चुका है कि जब तक इस्तीफा मंजूर नहीं होगा, लौटेंगे नहीं - और जब लौटेंगे तो बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे.

rahul gandhi faces many defemation casesक्या करेंगे राहुल गांधी - माफी मांगेंगे या लड़ेंगे मानहानि के मुकदमे?

बहरहाल, मुद्दे की बात ये है कि राहुल गांधी के खिलाफ आधा दर्जन मानहानि के मुकदमे चल रहे हैं - ये मुकदमें महाराष्ट्र और गुजरात के साथ साथ बिहार की अदालतों में भी ट्रायल चल रहा है.

1. भिवंडी कोर्ट में : राहुल गांधी के खिलाफ भिवंडी कोर्ट में मानहानि का जो केस चल रहा है वो काफी पुराना है. 6 जुलाई को अदालत ने मुकदमे की सुनवाई की अगली तारीख 19 अक्टूबर मुकर्रर कर दी.

6 मार्च, 2014 को महाराष्ट्र के सोनाले में एक सार्वजनिक सभा में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महात्मा गांधी की हत्या में जो लोग शामिल थे वे RSS के लोग थे. राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ संघ के एक कार्यकर्ता ने भिवंडी कोर्ट में कांग्रेस नेता के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया.

मानहानि के इस मुकदमे को खत्म कराने के लिए राहुल गांधी की ओर से सुप्रीम कोर्ट तक अपील हुई. सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता के वकीलों के सामने दो विकल्प रखे या तो राहुल गांधी माफी मांग लें या फिर मुकदमा लड़ें. राहुल गांधी को पहला विकल्प मंजूर नहीं था इसलिए भिवंडी में तारीख पर तारीख चली आ रही है.

2. शिवडी, मझगांव कोर्ट : 4 जुलाई को राहुल गांधी एक अन्य मामले में शिवडी कोर्ट में पेश हुए जहां उन्हें जमानत मिल गयी. राहुल गांधी ने अदालत में खुद को बेकसूर बताया. ये मुकदमा भी RSS की मानहानि के खिलाफ भी दायर किया गया है. कर्नाटक में पत्रकार गौरी लंकेश की सितंबर, 2017 में बेंगलुरू में हुई हत्या के बाद राहुल गांधी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था कि जो भी संघ और बीजेपी की आइडियोलॉजी के खिलाफ बोलता है वो पीटा जाता है, उस पर हमले होते और यहां तक कि हत्या कर दी जाती है.

3. पटना कोर्ट : राहुल गांधी ने कर्नाटक के कोलान में एक चुनावी रैली में कहा था - 'सभी चोरों के उपनाम मोदी क्यों हैं?'

बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने अप्रैल, 2018 में पटना में CJM की अदालत में राहुल गांधी के बयान को लेकर मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया. राहुल गांधी, दरअसल, नीरव मोदी और ललित मोदी के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कठघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे. राहुल गांधी ने 6 जुलाई को पेश होकर इस केस में जमानत ले ली है. मुकदमा तो चलता ही रहेगा.

राहुल गांधी के कोलार वाले बयान के खिलाफ सूरत में भी मानहानि का एक मुकदमा दर्ज कराया गया है. सूरत-पश्चिमी सीट से बीजेपी विधायक पूर्णेश मोदी ने ये केस दायर किया है.

4. अहमदाबाद कोर्ट : अहमदाबाद में राहुल गांधी के खिलाफ नोटबंदी के दौरान उनके एक बयान के खिलाफ दर्ज कराया गया है. ये मुकदमा अहमदाबाद जिला सहकारी बैंक की ओर से दायर किया गया है. राहुल गांधी और कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने नोटबंदी के दौरान करीब साढ़े सात सतौ करोड़ बंद हो चुके नोट बदलाने का आरोप लगाया था.

पहले तो राहुल गांधी के वकील ने इस बिनाह पर तारीख ले ली कि दस्तावेजों का अंग्रेजी में अनुवाद नहीं हुआ है. फिर राहुल गांधी को 27 मई को पेश होने को कहा गया. राहुल गांधी के वकील ने जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर दिल्ली में श्रद्धांजलि देने जाने के नाम पर अगली तारीख देने की गुजारिश की जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया - अब इस केस में 12 जुलाई को पेशी है. रणदीप सुरजेवाला की पेशी भी उसी दिन है.

अहमदाबाद की ही एक और अदालत ने बीजेपी अध्यक्ष को लेकर दिये राहुल गांधी के बयान के लिए समन भेजा था. राहुल गांधी ने एक चुनावी रैली में कहा था - 'हत्या के आरोपी बीजेपी अध्यक्ष वाह क्या शान है!'

राहुल गांधी के इस बयान को लेकर बीजेपी के एक नेता ने राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का केस इस दलील के साथ दर्ज कराया है कि जब अदालत से अमित शाह बरी हो चुके हैं तो कोई ऐसे आरोप कैसे लगा सकता है.

केजरीवाल ने तो माफी मांग ली, राहुल क्या करेंगे?

दिल्ली के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि को लेकर देश भर की अदालतों में कई शिकायतें दर्ज करायी गयीं थीं और ज्यादातर मामले सुनवाई के लायक नहीं समझे गये. केजरीवाल के बयानों को लेकर चर्चा तो संसद तक में भी हुई लेकिन चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कायर और मनोरोगी बताने के बाद कुछ लोग अदालत का दरवाजा खटखटाये जरूर थे, लेकिन कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार नहीं हुए. अरविंद केजरीवाल के खिलाफ एक पुलिसकर्मी ने भी मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था. ये मुकदमा दिल्ली के पुलिसवालों को ठुल्ला कहने को लेकर दायर किया गया था - लेकिन अदालत से खारिज हो गया.

दरअसल, मानहानि के मुकदमों में अगर व्यक्ति खुद शिकायत लेकर अदालत में जाता है तो मामला ज्यादा गंभीर हो जाता है. दिल्ली पुलिस और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर की गई अपीलों को सुनवाई लायक न समझे जाने की यही वजह रही.

केजरीवाल के खिलाफ बिक्रम सिंह मजीठिया, अरुण जेटली सहित कई नेताओं ने खुद कोर्ट में अपील दायर की थी. मुकदमा लंबा चल रहा था और हर मुकदमे की पैरवी भारी पड़ रही थी - आखिर में मजबूर होकर केजरीवाल ने एक तरफ से सभी माफी मांगनी शुरू की और सब रफा दफा हो गया. धीरे धीरे राहुल गांधी की भी स्थिति केजरीवाल जैसी ही होती जा रही है. देखा जाये तो दो हफ्ते के भीतर राहुल गांधी को महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात की अदालतों में पेश होना पड़ रहा है - ऐसे में सवाल उठता है कि क्या राहुल गांधी सारे मुकदमे लड़ेंगे?

माफी का विकल्प तो हमेशा खुला है, लेकिन जिस तरह भिवंडी कोर्ट केस में राहुल गांधी ने माफी मांगने से इंकार कर दिया था - हो सकता है बाकी मामलों में भी राहुल गांधी वही रूख अख्तियार करें. वैसे भिवंडी वाला केस तब अकेला था. अब राहुल गांधी के खिलाफ मुकदमों की भरमार हो गयी है.

आखिरी सवाल यही है कि क्या राहुल गांधी यूं ही घूम घूम कर मुकदमों की पैरवी करते रहेंगे या फिर केजरीवाल से प्रेरित होकर माफी मांग कर झंझट खत्म करेंगे?

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