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सियासत

 |  5-मिनट में पढ़ें  |   16-05-2018
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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जहां एक ओर कर्नाटक चुनाव के नतीजे सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक दर्दनाक हादसा हो गया है. वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का एक हिस्सा गिर गया, जिसके नीचे दबकर करीब 18 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और करीब 9 लोग घायल हैं. पीएम मोदी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक चुनाव में अच्छा प्रदर्शन करने को लेकर खुशी जाहिर की और साथ ही वाराणसी के दर्दनाक हादसे पर शोक व्यक्त किया. यहां पीएम मोदी की बात सुनकर ऐसा लगा जैसे उनके संसदीय क्षेत्र में गिरा पुल सिर्फ एक हादसा है, जबकि अन्य किसी सरकार के क्षेत्र में गिरने वाला पुल भ्रष्टाचार का सबूत होता है. अगर एक जगह पुल गिरने के पीछे भ्रष्टाचार है, तो वाराणसी में क्यों नहीं?

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ऐसे बदले पीएम मोदी के बोल

31 मार्च 2016 को उत्तरी कोलकाता में एक निर्माणाधीन फ्लाईओवर का हिस्सा गिर गया था, जिसमें करीब 21 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी. यह हादसा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से चंद दिन पहले हुआ था. उस समय पीएम मोदी इस मौके का राजनीतिक फायदा उठाने से नहीं चूके. उन्होंने कहा था- "ये पुल चुनाव के दिनों में गिरा, ताकि पता चले कि आपने कैसी सरकार चलाई है, ये भगवान ने लोगों को संदेश भेजा है कि जैसे ये पुल टूटा है वैसे ही ये पूरा पश्चिम बंगाल खत्म कर देगी, इस राज्य को बचाओ." उन्होंने कहा था कि पुल टूटने की घटना को 'एक्ट ऑफ गॉड' कहते हैं, लेकिन ये 'एक्ट ऑफ फ्रॉड' है. ये वीडियो इस बयान की गवाही देता है :

अब वाराणसी में निर्माणाधीन फ्लाईओवर का हिस्सा कर्नाटक चुनाव के नतीजे के दिन गिरा है. इस हादसे का पीएम मोदी ने दुख जताया है और हादसे में मरने वाले लोगों के लिए अपनी संवेदना व्यक्ति की है. पश्चिम बंगाल में पुल गिरने को पीएम मोदी ने भगवान का संदेश कहा था, लेकिन वाराणसी के पुल गिरने को एक हादसा कहा है. अगर पश्चिम बंगाल के पुल का गिरना एक भ्रष्ट सरकार की ओर भगवान का इशारा था, तो फिर वाराणसी का पुल गिरने के पीछे भ्रष्ट सरकार की बात क्यों नहीं? क्योंकि यूपी में तो पहले से ही भाजपा की सरकार है, अगर यहां किसी और पार्टी की सरकार होती तो शायद इसे भी पीएम मोदी भगवान का इशारा ही कहते.

यूपी सरकार ने तो पूरा पोस्टर ही छाप डाला

वाराणसी में पुल गिरने से जिन लोगों की मौत हुई उनके परिजनों को योगी सरकार ने 5-5 लाख रुपए और घायलों को 2-2 लाख रुपए की मदद देने की घोषणा की है. मौके पर तुरंत एनडीआरएफ के 250 जवान भी पहुंचे, लेकिन फ्लाईओवर का हिस्सा इतना भारी था कि बचाव कार्य में काफी देरी हो गई. तत्काल प्रभाव से चार अधिकारियों को निलंबित भी कर दिया गया. अब जब सरकार ने मरने वालों और घायलों के लिए इतना कुछ किया है तो उसका ढोल पीटना भी तो बनता है ना. हादसे के अगले दिन यूपी सीएम ऑफिस से एक बैनर बनाकर उसे ट्वीट किया गया और उसमें बताया कि फ्लाईओवर गिरने के बाद सरकार ने लोगों के लिए क्या-क्या किया. क्या ऐसी मुसीबत की घड़ी में भी सरकार को अपनी पीठ थपथपाने के लिए ये बैनर बनाने की जरूरत थी? किसी की सरकार के दौरान कोई हादसा हो जाना शर्मिंदगी की बात है, ना कि पोस्टर छपवाकर उसके बाद की गई कार्रवाई का ढोल बजाना चाहिए.

नरेंद्र मोदी, कर्नाटक चुनाव 2018, वाराणसी पुल हादसा, योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेशकिसी की सरकार के दौरान कोई हादसा हो जाना शर्मिंदगी की बात है, ना कि पोस्टर छपवाकर उसके बाद की गई कार्रवाई का ढोल बजाना चाहिए.

बचाव कार्य में भी हादसों को न्योता

फ्लाईओवर का हिस्सा इतना अधिक भारी था कि उसे उठाने के लिए कई बड़ी-बड़ी क्रेन मंगानी पड़ीं. लेकिन उनमें से कई क्रेन फ्लाईओवर उठाते समय खुद ही उठ जा रही थीं, जिससे बचाव कार्य में और भी देरी हुई. हद तो तब हो गई जब क्रेन का वजह बढ़ाने के लिए उस पर वहां खड़े बहुत से लोगों को चढ़ाया गया. बचाव कार्य कर रहे अधिकारियों की ये लापरवाही एक और बड़े हादसे को न्योता थी. शुक्र है कि कोई अनहोनी नहीं हुई.

नरेंद्र मोदी, कर्नाटक चुनाव 2018, वाराणसी पुल हादसा, योगी आदित्यनाथ, उत्तर प्रदेशक्रेन का वजन बढ़ाने के लिए लोगों को उस पर चढ़ा दिया गया, जो हादसे को न्योता था.

वाराणसी का पुल तो गिर गया, अब इसे लेकर राजनीति भी शुरू होगी. इस हादसे पर मदारी फिल्म की एक क्लिप याद आ रही है, जिसे एक बार आप भी देखिए. भले ही ये क्लिप एक फिल्म की है, लेकिन सभी को हकीकत का आइना दिखाने के लिए काफी है.

वाराणसी हादसे में कई सवाल हैं, जिनके जवाब किसी से देते नहीं बन रहा है. सवाल ये है कि आखिर जब फ्लाईओवर निर्माणाधीन था तो उसके नीचे ट्रैफिक कैसे चल रहा है, उसे रोका क्यों नहीं गया था? जिस समय फ्लाईओवर का हिस्सा गिरा उस समय नीचे जाम जैसी स्थिति थी, क्योंकि रास्ते में बड़ी गाड़ियां भी थीं. अगर निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां से कम से बड़ी गाड़ियों को तो जाने से रोकना चाहिए था, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया. इन सबसे साफ है कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि अधिकारियों की लापरवाही का नतीजा है. अगर वहां का ट्रैफिक रोका गया होता तो इस हादसे में किसी की भी जान नहीं जाती. देखना ये होगा कि दोषियों को सिर्फ सस्पेंड भर कर के सरकार खुश हो जाएगी या 18 लोगों के कातिलों को सजा भी मिलेगी.

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